इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि दुनिया में इजरायल का इकलौता ताकतवर साथी सिर्फ अमेरिका है. रविवार को दिए एक इंटरव्यू में नेतन्याहू ने पलटवार करते हुए कहा कि भारत जैसे 1.4 अरब की आबादी वाले देश से भी उन्हें जबरदस्त समर्थन मिलता है, और यह दोस्ती किसी से कम नहीं है.
तनाव की जड़ में ईरान और लेबनान का मसला
अमेरिका और इजरायल की दोस्ती हमेशा से बेहद गहरी मानी जाती रही है. दोनों देशों ने मिलकर ही ईरान के खिलाफ जंग की शुरुआत की थी. लेकिन उसी जंग के बाद अब ईरान और लेबनान से जुड़े मसलों पर दोनों मुल्कों के बीच खटास बढ़ने लगी है. जो अमेरिका और इजरायल कभी एक-दूसरे के लिए जान देने की बात करते थे, अब वही आपस में तीखी बयानबाजी कर रहे हैं. एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप खुद बेंजामिन नेतन्याहू को लगातार आड़े हाथों ले रहे थे, तो दूसरी तरफ अब उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी इजरायल को नसीहत देने का सिलसिला शुरू कर दिया. लेकिन नेतन्याहू भी पीछे हटने वाले नहीं थे, उन्होंने वेंस के बयान का मुंहतोड़ जवाब दिया.
फॉक्स न्यूज़ के इंटरव्यू में नेतन्याहू का जवाब
फॉक्स न्यूज़ को दिए एक इंटरव्यू में बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कहा कि वह जेडी वेंस का पूरा सम्मान करते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह उनकी हर बात से इत्तेफाक रखते हैं. नेतन्याहू ने कहा, 'सबसे पहले मैं जेडी वेंस का सम्मान करता हूं. हमारे संबंध बहुत अच्छे हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मैं उनकी हर बात से सहमत हूं. और मुझे यह बात कहनी होगी कि डोनाल्ड ट्रंप व्हाइट हाउस में हमारे अब तक के सबसे अच्छे दोस्त रहे हैं और मैं इस बात पर पूरी तरह कायम हूं.' यानी नेतन्याहू ने एक तरफ ट्रंप की तारीफ की, तो दूसरी तरफ वेंस की उस दलील को खारिज कर दिया कि इजरायल के पास सिर्फ अमेरिका ही एकमात्र मजबूत साथी है.
नेतन्याहू बोले, भारत जैसा मजबूत दोस्त भी हमारे साथ
इसके बाद नेतन्याहू ने खास तौर पर भारत का नाम लेते हुए वेंस की टिप्पणी का जवाब दिया. उन्होंने कहा, 'दूसरी बात कि हमारे कुछ और दोस्त भी हैं, जैसे भारत. आप जानते हैं कि वहां 1.4 अरब लोग हैं. हमें वहां जबरदस्त समर्थन मिलता है. आप जानते हैं कि मेरा फेसबुक पेज है और मुझे वहां से भारी समर्थन मिलता है.' नेतन्याहू का यह बयान सीधे तौर पर वेंस के इस दावे को चुनौती दे रहा था कि इजरायल के पास दुनिया में बचा एकमात्र शक्तिशाली सहयोगी अमेरिका ही है. नेतन्याहू ने आगे यह भी कहा कि दुनिया की कई सरकारें घरेलू राजनीतिक दबाव के बावजूद निजी तौर पर इजरायल का समर्थन करती रही हैं, भले ही वे इसे खुलकर सामने न लाएं.
वेंस ने जून में क्या कहा था
नेतन्याहू की यह प्रतिक्रिया जेडी वेंस के जून महीने में दिए एक बयान का सीधा जवाब थी. उस वक्त इजरायल के कुछ मंत्रियों की तरफ से आलोचना झेल रही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान नीति का बचाव करते हुए वेंस ने कहा था, 'उनके लिए मेरा संदेश दो तरह का होगा. नंबर 1, डोनाल्ड ट्रंप दुनिया के एकमात्र ऐसे राष्ट्राध्यक्ष हैं, जो इस समय इजरायल देश के प्रति सहानुभूति रखते हैं.' इतना ही नहीं, वेंस ने नेतन्याहू की कैबिनेट के मंत्रियों को वॉशिंगटन की सार्वजनिक आलोचना करने से भी साफ मना किया था. उन्होंने कहा था, 'अगर मैं इजरायली सरकार की कैबिनेट में होता तो मैं दुनिया में बचे अपने एकमात्र शक्तिशाली सहयोगी पर हमला नहीं करता.' यानी वेंस का इशारा साफ था कि इजरायल को अमेरिका के सिवा और कोई भरोसेमंद ताकत नहीं मिलने वाली, इसलिए उसे वॉशिंगटन से पंगा नहीं लेना चाहिए.
वाशिंगटन दौरे से पहले उठा विवाद, लेबनान पर भी मतभेद
गौर करने वाली बात यह है कि नेतन्याहू ने यह बयान ठीक उस वक्त दिया है, जब वह जल्द ही वाशिंगटन की यात्रा पर जाने वाले हैं. वहां उनकी मुलाकात सीधे डोनाल्ड ट्रंप से होगी. इस मुलाकात से पहले ही यह बयानबाजी सामने आना बताता है कि दोनों पक्षों के बीच रिश्तों में कुछ तल्खी जरूर आई है. इसके अलावा लेबनान के मसले पर भी इजरायल और अमेरिका के बीच मतभेद खुलकर सामने आ चुके हैं. यानी सिर्फ बयानों तक ही यह असहमति सीमित नहीं है, बल्कि नीतिगत स्तर पर भी दोनों देशों के बीच सोच का फर्क दिख रहा है. फिर भी नेतन्याहू ने यह जरूर साफ किया कि इस सारे विवाद के बावजूद वह डोनाल्ड ट्रंप को व्हाइट हाउस में इजरायल का अब तक का सबसे अच्छा दोस्त मानते हैं, बस जेडी वेंस के इस दावे से इनकार करते हैं कि इजरायल के पास अमेरिका के अलावा कोई और मजबूत सहयोगी नहीं बचा.











