ब्रिटेन की राजनीति में एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने सोमवार सुबह लंदन के डाउनिंग स्ट्रीट स्थित अपने सरकारी आवास के बाहर खड़े होकर इस्तीफे का ऐलान किया। 2016 में ब्रेग्जिट जनमत संग्रह के बाद से यह ब्रिटेन का छठा प्रधानमंत्री है जिसने पद गंवाया है।
स्टार्मर के अपने शब्दों में
स्टार्मर ने अपने जाने की वजह खुद साफ की। उन्होंने कहा, "मेरी पार्टी अभी यह सवाल पूछ रही है कि क्या मैं अगले आम चुनाव में पार्टी का नेतृत्व करने के लिए सबसे सही व्यक्ति हूं। मैंने अपनी संसदीय पार्टी का जवाब सुन लिया है, और मैं उस जवाब को सहर्ष स्वीकार करता हूं।" ब्रिटेन में अगला आम चुनाव 2029 से पहले होने की उम्मीद नहीं है।
गिरती साख और स्थानीय चुनावों में करारी हार
स्टार्मर की लोकप्रियता प्रधानमंत्री बनने के शुरुआती दिनों से ही लुढ़कनी शुरू हो गई थी। ब्रिटेन के लोगों को टैक्स में बढ़ोतरी, सरकारी खर्च में कटौती और सार्वजनिक सेवाओं की बिगड़ती हालत का सामना करना पड़ा जबकि सुधार के वादे खोखले साबित होते रहे। मई के स्थानीय चुनावों में लेबर पार्टी की बुरी तरह हार हुई। पूरे देश में पार्टी ने करीब 1,500 पार्षद गंवाए और 38 नगर परिषदों पर से अपना नियंत्रण खो दिया। इनमें से बड़ी संख्या में परिषदें नाइजेल फराज की चुनौती देने वाली पार्टी रिफॉर्म UK के हाथों में चली गईं।
एंडी बर्नहैम की उपचुनाव जीत बनी आखिरी तिनका
शुक्रवार को हालात और पेचीदा हो गए जब मैनचेस्टर के पूर्व लेबर महापौर एंडी बर्नहैम ने नॉर्थ वेस्ट इंग्लैंड में उपचुनाव जीतकर संसद में अपनी जगह बना ली। इस जीत से पार्टी के भीतर लोकप्रिय बर्नहैम नेतृत्व की दौड़ में शामिल होने के लिए औपचारिक रूप से पात्र हो गए। स्टार्मर के इस्तीफे की घोषणा न होती तो वे सीधे उनकी प्रधानमंत्री की कुर्सी को भी चुनौती दे सकते थे।
उत्तराधिकारी की तस्वीर साफ
यह लगभग तय माना जा रहा है कि एंडी बर्नहैम ही स्टार्मर की जगह लेंगे। इस कयास को और बल मिला जब पूर्व स्वास्थ्य सचिव वेस स्ट्रीटिंग ने बर्नहैम को अपने समर्थन का ऐलान किया। स्ट्रीटिंग ने पिछले महीने स्टार्मर की सरकार से इस्तीफा दिया था और पहले यह कह चुके थे कि वे किसी भी नेतृत्व चुनाव में खड़े होंगे। स्टार्मर तब तक प्रधानमंत्री पद पर बने रहेंगे जब तक लेबर पार्टी नया नेता नहीं चुन लेती। उन्होंने बताया कि यह प्रक्रिया सितंबर में संसद के दोबारा शुरू होने से पहले पूरी हो जाएगी।
ट्रम्प ने पहले ही भांप लिया था
सप्ताहांत में डोनाल्ड ट्रम्प ने भी इस घटनाक्रम में दखल दिया। उन्होंने अपने ट्रूथ सोशल प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए स्टार्मर के इस्तीफे की भविष्यवाणी की और उन पर आरोप लगाया कि वे आव्रजन और ऊर्जा के मोर्चे पर "बुरी तरह विफल" रहे। सच यह है कि स्टार्मर के कार्यकाल में ब्रिटेन में शुद्ध प्रवास में कमी ज़रूर आई है, लेकिन छोटी नावों से होने वाली अवैध घुसपैठ को वे काबू नहीं कर पाए, जो जनता के बीच अनधिकृत आव्रजन का सबसे बड़ा प्रतीक बन चुकी है। ट्रम्प लेबर सरकार की नॉर्थ सी में तेल और गैस की खुदाई पर लगाई गई पाबंदियों के भी खुले आलोचक रहे हैं।
एक दशक में छह प्रधानमंत्री
2016 के ब्रेग्जिट जनमत संग्रह के बाद से ब्रिटेन ने जिस रफ्तार से प्रधानमंत्री बदले हैं, वह आधुनिक इतिहास में बेमिसाल है। सबसे पहले डेविड कैमरन ने ब्रेग्जिट वोट के फौरन बाद इस्तीफा दिया। फिर थेरेसा मे ने 2019 में संसद में अपना ब्रेग्जिट समझौता पास न करवा पाने के बाद पद छोड़ा। बोरिस जॉनसन अपनी सरकार के मंत्रियों के इस्तीफों की बाढ़ और व्यक्तिगत विवादों के बोझ तले दब गए। लिज़ ट्रस के मिनी-बजट ने बाज़ारों में हड़कंप मचा दिया और उन्हें जल्द ही हटना पड़ा। जुलाई 2024 के आम चुनाव में लेबर पार्टी की प्रचंड जीत के बाद ऋषि सुनक की विदाई हुई, जिसने कंजर्वेटिव पार्टी के 14 साल के शासन का पर्दा गिरा दिया। उस पूरे कार्यकाल में पांच अलग-अलग कंजर्वेटिव प्रधानमंत्री आए। उस वक्त स्टार्मर ने इसी अस्थिरता की तीखी आलोचना की थी। अब वे खुद उसी सिलसिले की एक और कड़ी बन गए हैं।
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