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पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में खूनी संघर्ष, सेना की गोलीबारी से सड़कों पर बिछी लाशेंदुनिया
28 जुल॰ 2026, 10:42 pm (10 दिन पहले)· 0

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में खूनी संघर्ष, सेना की गोलीबारी से सड़कों पर बिछी लाशें

पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर में चुनावों का विरोध कर रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर सेना ने गोलियां बरसाईं, जिससे भारी तबाही मच गई है और लोग अंतरराष्ट्रीय मदद की गुहार लगा रहे हैं।

पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों में मानवाधिकारों को कुचलने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जहां बुनियादी अधिकारों की मांग कर रहे निहत्थे नागरिकों पर सैन्य कार्रवाई के बाद हालात बेहद भयावह हो गए हैं। स्थानीय स्तर पर लोग जबरन थोपी जा रही चुनावी प्रक्रियाओं और प्रशासनिक नीतियों का विरोध कर रहे थे, जिसके जवाब में सुरक्षा बलों ने भारी बल प्रयोग किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर वायरल हो रहे दृश्यों और संदेशों के माध्यम से वहां के हालात का खौफनाक मंजर सामने आ रहा है, जिसमें खून से सनी गलियां और सड़कों पर बिखरे शव साफ देखे जा सकते हैं। इस हिंसा के बाद से आम जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है और इलाके में गहरा डर व्याप्त है।

रावलकोट में बिगड़ते हालात और खून से सनी सड़कें

रावलकोट के द्रेक ईदगाह इलाके में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर बनी हुई है, जहां विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़े पैमाने पर खूनखराबा हुआ। स्थानीय निवासियों ने पूर्व में घोषित विधानसभा चुनाव प्रक्रिया का पूरी तरह से बहिष्कार करते हुए अपने हक के लिए शांतिपूर्ण ढंग से आवाज उठाई थी। हालांकि, इस अहिंसक विरोध को प्रशासन ने बर्दाश्त नहीं किया और इसे दबाने के लिए सैन्य ताकत का खुला इस्तेमाल किया गया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि गोलीबारी इतनी अंधाधुंध थी कि कई लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और सौ से अधिक नागरिक गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि घायलों को ले जाने के लिए एंबुलेंस की कमी पड़ गई है और लोग अपनों को अपने कंधों पर उठाकर ले जाने को विवश हैं।

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अस्पतालों पर ताले और गंभीर रूप से घायल लोग

इस खूनी संघर्ष के बाद घायलों के इलाज के रास्ते भी पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं। प्राप्त विवरण के अनुसार, सुरक्षा बलों ने कई अस्पतालों को सील कर दिया है ताकि घायलों को चिकित्सीय सहायता न मिल सके और वे बिना इलाज के दम तोड़ने को मजबूर हों। फेसबुक पर बड़ी संख्या में फॉलोअर्स रखने वाले एक स्थानीय व्लॉगर अकील ने इस दर्दनाक सच्चाई को बयां करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है। उन्होंने कहा कि कश्मीरियों का खून सड़कों पर बह रहा है और इस खौफनाक मंजर को दुनिया के सामने लाया जाना चाहिए। सोशल मीडिया पर एक अन्य पीड़ित नागरिक ने रोते हुए साझा किया कि चारों तरफ लाशें पड़ी हैं और कोई भी उनकी आवाज सुनने वाला नहीं बचा है।

अवामी हकूक लॉन्ग मार्च और सैन्य बर्बरता

यह पूरा विवाद तब और भड़क उठा जब अवामी हकूक लॉन्ग मार्च के तहत हजारों की संख्या में लोग रावलकोट से मुजफ्फराबाद की तरफ बढ़ने की तैयारी कर रहे थे। जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी और स्थानीय कार्यकर्ताओं ने बताया कि जब जनता अपने बुनियादी अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरी, तो सेना, पंजाब रेंजर्स और स्थानीय पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए क्रूरता की सारी सीमाएं लांघ दीं। चश्मदीदों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों की शांतिपूर्ण भीड़ पर सीधी असॉल्ट राइफलों से गोलियां चलाई गईं, आंसू गैस के बड़े गोले छोड़े गए और ऊंची इमारतों की छतों पर स्नाइपर्स तैनात किए गए थे, जिन्होंने आगे बढ़ने वाले हर शख्स को निशाना बनाया।

मानवीय संकट और अंतरराष्ट्रीय चुप्पी

अब तक 19 मृतकों की पहचान सुनिश्चित की जा चुकी है, लेकिन माना जा रहा है कि वास्तविक आंकड़ा इससे काफी अधिक है क्योंकि दर्जनों लोग लापता हैं। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो में महिलाओं और बच्चियों के साथ गंभीर बदसलूकी और हमलों के आरोप भी लगाए गए हैं, जिससे भय का माहौल और गहरा गया है। इस बीच, स्थानीय नागरिकों और कार्यकर्ताओं में इस बात को लेकर भारी रोष है कि वैश्विक मानवाधिकार संगठन और अंतरराष्ट्रीय मीडिया इस गंभीर मानवीय संकट पर पूरी तरह से खामोश हैं और उन्होंने इस पर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं दी है।

सवाल-जवाब

पीओके में हिंसा क्यों भड़की?
पाकिस्तान द्वारा थोपे जा रहे विधानसभा चुनावों के विरोध और बुनियादी अधिकारों की मांग को लेकर लोग शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, जिसके बाद यह हिंसा भड़की।
इस संघर्ष के दौरान किस प्रमुख मार्च का आयोजन किया गया था?
प्रदर्शनकारियों द्वारा अवामी हकूक लॉन्ग मार्च निकाला जा रहा था, जिसके तहत हजारों लोग रावलकोट से मुजफ्फराबाद की ओर बढ़ने की तैयारी कर रहे थे।
घायलों और अस्पतालों को लेकर क्या स्थिति है?
चश्मदीदों के अनुसार सुरक्षा बलों ने कई अस्पतालों को सील कर दिया है ताकि घायलों का इलाज न हो सके, और एंबुलेंस कम पड़ने पर लोग अपनों को कंधों पर ले जाने को मजबूर हैं।
इस प्रदर्शन का नेतृत्व कौन कर रहा था?
इस विरोध प्रदर्शन में जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) और स्थानीय कार्यकर्ताओं ने प्रमुख भूमिका निभाई।
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