पश्चिम एशिया में सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति का संकट एक बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच चुका है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर की गई सैन्य कार्रवाई के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और प्राकृतिक गैस का परिवहन लगभग रुक गया है। इस मुख्य समुद्री गलियारे के प्रभावित होने के बाद विभिन्न देशों ने अपने व्यापारिक जहाजों को लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाले बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य की ओर मोड़ना शुरू किया था, लेकिन वहां भी हूतियों की आक्रामक गतिविधियों के कारण मार्ग असुरक्षित हो गया। इसके अलावा सऊदी अरब की 1200 किलोमीटर लंबी ईस्ट वेस्ट पाइपलाइन पर हमला हुआ, जिससे बुनियादी ढांचे को गंभीर क्षति पहुंची। दुनिया की कुल तेल खपत का 5 फीसद हिस्सा इसी पाइपलाइन के माध्यम से पहुंचाया जाता था, जिसे नुकसान के बाद सऊदी अरब को तुरंत बंद करना पड़ा। इसके तुरंत बाद सऊदी अरब के हवाई अड्डे को भी निशाना बनाया गया, जिससे हालात तेजी से बिगड़े। इस पूरे संकट के बीच युद्ध समाप्ति के लिए ईरान ने वॉशिंगटन के समक्ष 7 शर्तें रखी हैं।
फारस की खाड़ी में अमेरिकी वायुसेना और निगरानी उड़ानों की सक्रियता
तनाव के इस दौर में ब्रिटिश हवाई अड्डे से एक अमेरिकी बॉम्बर जेट उड़ान भर चुका है, जबकि फारस की खाड़ी के हवाई क्षेत्र में अमेरिकी वायुसेना के कम से कम 7 एरियल रीफ्यूलिंग टैंकर विमानों को संचालित होते देखा गया है। रविवार 20 सितंबर को रिकॉर्ड की गई इस गतिविधि से यह संकेत मिलता है कि लड़ाकू और रणनीतिक विमानों को हवा में ही ईंधन देने की व्यवस्था तैयार रखी जा रही है। इसी अभियान के हिस्से के रूप में अमेरिकी नौसेना के MQ-4C Triton निगरानी ड्रोन ने भी पूरे इलाके में व्यापक टोह ली है। दूसरी ओर, ईरानी सरकारी टेलीविजन ने बंदर अब्बास के ऊपर अज्ञात विमानों की उड़ानों का दावा किया है, यद्यपि इस बात की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है।
ईरान की जवाबी कार्रवाई की चेतावनी और अमेरिकी नागरिकों को सतर्कता
संभावित सैन्य कार्रवाई की आहट देखते हुए ईरान के रक्षा तंत्र ने कड़े तेवर दिखाए हैं। ईरान की खतम-अल-अनबिया सेंट्रल कमांड ने सार्वजनिक तौर पर कहा है कि यदि अमेरिका ने कोई नया हमला किया, तो पूरे क्षेत्र में स्थापित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और उनके रणनीतिक हितों पर जोरदार प्रहार किया जाएगा। ईरानी सैन्य कमान का कहना है कि उसे नए अमेरिकी सैन्य हमलों की तैयारियों से जुड़े खुफिया इनपुट मिले हैं। दूसरी तरफ, अमेरिका ने भी किसी भी अप्रत्याशित खतरे को देखते हुए क्षेत्र में मौजूद अपने सभी नागरिकों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आधिकारिक सलाह जारी कर दी है।
इरबिल और सना में विस्फोटों से बढ़ा क्षेत्रीय टकराव
सैन्य जमावड़े के बीच इराक और यमन से भी गंभीर घटनाएं दर्ज की गई हैं। इराक में इरबिल एयरपोर्ट के निकटवर्ती इलाके में एक जोरदार धमाका सुना गया है। यह क्षेत्र बेहद संवेदनशील माना जाता है क्योंकि इसी परिसर के समीप अमेरिकी सैन्य बल तैनात हैं। इस विस्फोट में हुए नुकसान या हताहतों की स्थिति अभी आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं हो सकी है और न ही किसी गुट ने इसकी जिम्मेदारी ली है। उधर यमन की राजधानी सना के अंदर भी कई बड़े विस्फोट दर्ज किए गए हैं। इन हमलों को रियाद स्थित किंग खालिद एयरपोर्ट पर दो दिन पहले अंसारल्ला यानी हूती विद्रोहियों द्वारा किए गए हमले के जवाब में सऊदी अरब की सैन्य कार्रवाई से जोड़कर देखा जा रहा है।
ऊर्जा व्यापार और होर्मुज जलडमरूमध्य का रणनीतिक महत्व
पूरे पश्चिम एशिया में फैला यह टकराव सीधे तौर पर वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिलाने की क्षमता रखता है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के समूचे समुद्री तेल व्यापार के करीब पांचवें हिस्से का प्रमुख मार्ग है। यहां किसी भी प्रकार की स्थायी रुकावट पैदा होने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल, डीजल और माल ढुलाई की लागत में भारी उछाल आ सकता है, जिसका सीधा असर परिवहन लागत और रोजमर्रा के खाद्य उत्पादों की कीमतों पर पड़ेगा। बाब अल-मंदेब और ईस्ट वेस्ट पाइपलाइन के बंद होने से विकल्पों का अभाव पहले ही गहरा चुका है।



















