सितंबर 2021 में जब भारत ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी, तब संपूर्ण विश्व कोरोना महामारी की चुनौतियों से जूझ रहा था। 9 सितंबर 2021 को वर्चुअल माध्यम से आयोजित उस बैठक के समय ब्रिक्स समूह में केवल पांच राष्ट्र शामिल थे, जिनमें भारत, रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका थे। उस दौर में वैश्विक मंच पर अमेरिका और चीन के मध्य बढ़ता प्रतिस्पर्धात्मक तनाव, अफगानिस्तान से अमेरिकी सैन्य बलों की वापसी और वैश्विक स्वास्थ्य संकट मुख्य बिंदु थे। हालांकि, पांच वर्षों के अंतराल के बाद जब सितंबर 2026 में भारत पुनः ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन कर रहा है, तब तक भू-राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह रूपांतरित हो चुका है। इन पांच वर्षों की समयावधि में यूरोप में भीषण सैन्य संघर्ष छिड़ा, पश्चिम एशिया में नए युद्ध मोर्चे खुले, दक्षिण एशिया में भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य टकराव हुआ, अमेरिका में व्यापार नीतियों में व्यापक बदलाव आया और ब्रिक्स संगठन का आकार एवं प्रभाव दोनों काफी बढ़ गए।
यूरोप में सैन्य संघर्ष और नाटो का रणनीतिक विस्तार
24 फरवरी 2022 को रूस द्वारा यूक्रेन के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई शुरू किए जाने के साथ ही वैश्विक सुरक्षा संरचना में गहरा संकट उत्पन्न हो गया। यह संघर्ष केवल दो पड़ोसी देशों की सीमाओं तक सीमित न रहकर शीघ्र ही रूस और पश्चिमी देशों के बीच एक वृहद भू-राजनीतिक टकराव में बदल गया। संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस पर सख्त आर्थिक और वित्तीय प्रतिबंध लागू किए। इसके परिणामस्वरूप संपूर्ण यूरोप को गंभीर ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ा और वैश्विक बाजार में कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस, खाद्यान्न तथा उर्वरकों के दामों में तेज वृद्धि देखी गई।
यूक्रेन युद्ध के प्रभाव स्वरूप उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) की भूमिका पुनः सुदृढ़ हुई। अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से फ़िनलैंड ने अप्रैल 2023 में और स्वीडन ने मार्च 2024 में आधिकारिक रूप से नाटो की सदस्यता ग्रहण की। इसी समय अंतराल में पूर्वी एशिया में भी तनाव की स्थितियां उत्पन्न हुईं। अगस्त 2022 में तत्कालीन अमेरिकी हाउस स्पीकर नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा के तुरंत बाद चीन ने ताइवान जलडमरूमध्य के आसपास व्यापक सैन्य अभ्यास आयोजित किए, जिससे वैश्विक समुदाय के सामने यूरोप में रूस-पश्चिम संघर्ष और एशिया में अमेरिका-चीन प्रतिद्वंद्विता की दोहरी सुरक्षा चुनौती स्पष्ट रूप से उभर आई।
पश्चिम एशिया में बढ़ता युद्ध और लाल सागर का समुद्री संकट
वर्ष 2023 में वैश्विक स्थिरता को नए संकटों ने घेरा। सूडान में आंतरिक गृहयुद्ध भड़कने के कुछ महीनों बाद, 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा इज़राइल पर किए गए बड़े हमले ने गाज़ा में सैन्य कार्रवाई की शुरुआत कर दी। यह संघर्ष केवल गाज़ा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका विस्तार लेबनान, सीरिया और लाल सागर के समुद्री मार्गों तक हो गया। यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाना शुरू किया, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर अत्यधिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
इसी वर्ष अगस्त 2023 में जोहान्सबर्ग में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में समूह के विस्तार का ऐतिहासिक फैसला लिया गया। इसके बाद 1 जनवरी 2024 से मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात औपचारिक रूप से ब्रिक्स के पूर्णकालिक सदस्य बन गए। इस विस्तार ने ब्रिक्स के भौगोलिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय प्रभाव में भारी वृद्धि की और इसे वैश्विक दक्षिण की एक सशक्त आवाज बना दिया।
वैश्विक राजनीतिक परिवर्तन और अमेरिका की नई व्यापार नीति
वर्ष 2024 में विभिन्न देशों में बड़े राजनीतिक उलटफेर देखने को मिले। बांग्लादेश में महीनों तक चले जनविरोध प्रदर्शनों के बाद अगस्त 2024 में शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद से त्यागपत्र देकर भारत में शरण लेनी पड़ी। वहीं दिसंबर 2024 में सीरिया में दशकों से जारी बशर अल-असद के शासन का पतन हो गया। नवंबर 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की ऐतिहासिक जीत ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ा।
डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा सत्ता संभालने के बाद 2 अप्रैल 2025 को अमेरिका ने एक व्यापक एवं सख्त टैरिफ व्यवस्था लागू करने की घोषणा की। इसके तहत अमेरिका आयातित वस्तुओं पर न्यूनतम 10 प्रतिशत का बेसलाइन टैरिफ लगाया गया और कई साझेदार देशों पर इससे भी अधिक आयात शुल्क आरोपित किए गए। इस कदम से अमेरिका और चीन सहित विश्व के अन्य बड़े व्यापारिक साझेदारों के बीच आर्थिक तनाव चरम पर पहुंच गया, जिससे स्पष्ट हो गया कि वैश्विक शक्ति संतुलन अब केवल सैन्य क्षमता तक सीमित न रहकर तकनीक, सेमीकंडक्टर निर्माण, आपूर्ति श्रृंखला और टैरिफ नीतियों से निर्धारित हो रहा है।
दक्षिण एशिया में सुरक्षा संकट और इजराइल-ईरान संघर्ष
दक्षिण एशिया में भी सुरक्षा स्थितियां उस समय अत्यंत तनावपूर्ण हो गईं जब 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक भयावह आतंकी हमला हुआ, जिसमें 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई। इसके प्रत्युत्तर में भारत ने 7 मई 2025 को 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया। इस सैन्य कार्रवाई के तहत भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में स्थित नौ रणनीतिक आतंकी ठिकानों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया। इस घटनाक्रम के बाद दोनों देशों के बीच कई दिनों तक गंभीर सैन्य तनाव बना रहा, जो 2021 के बाद इस क्षेत्र की सबसे बड़ी सुरक्षा घटना साबित हुई।
दूसरी ओर, 13 जून 2025 को इज़राइल द्वारा ईरान पर सीधे व्यापक सैन्य हमले शुरू करने के बाद पश्चिम एशिया में भीषण युद्ध छिड़ गया। तनाव तब और अधिक बढ़ गया जब 22 जून 2025 को अमेरिका स्वयं इस युद्ध में सीधे कूद पड़ा और ईरान के तीन अत्यंत महत्वपूर्ण परमाणु स्थलों- फोर्डो, नतांज और इस्फहान पर हवाई हमले किए। इस घटनाक्रम ने वैश्विक तेल आपूर्ति और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के समुद्री मार्ग पर भारी खतरा मंडरा दिया।
2026 का बहुध्रुवीय विश्व और ब्रिक्स की नई संरचना
वर्ष 2025 में इंडोनेशिया के ब्रिक्स में पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल होने के साथ ही, 2021 के पांच देशों वाले समूह से 2026 के एक विशाल बहुराष्ट्रीय संगठन तक की यात्रा पूरी हुई। सितंबर 2026 में जब भारत दोबारा ब्रिक्स सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहा है, तब यह समूह केवल उभरती अर्थव्यवस्थाओं का अनौपचारिक मंच नहीं रह गया है, बल्कि एशिया, अफ्रीका, पश्चिम एशिया और लातिन अमेरिका के महत्वपूर्ण राष्ट्रों का एक आर्थिक एवं रणनीतिक गठजोड़ बन चुका है जो एक नए बहुध्रुवीय विश्व की नींव रख रहा है।



















