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स्कारबोरो शोआल पर चीनी दावों के खिलाफ उतरा अमेरिका, दक्षिण चीन सागर में बढ़ा टकरावदुनिया
9 अग॰ 2026, 1:16 pm (73 दिन पहले)· 1

स्कारबोरो शोआल पर चीनी दावों के खिलाफ उतरा अमेरिका, दक्षिण चीन सागर में बढ़ा टकराव

दक्षिण चीन सागर के स्कारबोरो शोआल पर चीन द्वारा राष्ट्रीय प्रकृति रिजर्व स्थापित करने के फैसले को अमेरिका ने खारिज कर दिया है। वॉशिंगटन ने चीन पर पर्यावरण संरक्षण के नाम पर फिलीपींस के मछुआरों को रोकने का आरोप लगाया है।

दक्षिण चीन सागर में स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्कारबोरो शोआल को लेकर बीजिंग, मनीला और वॉशिंगटन के बीच कूटनीतिक और समुद्री टकराव गहरा गया है। चीन द्वारा इस क्षेत्र को राष्ट्रीय प्रकृति रिजर्व घोषित किए जाने और नए नियम लागू करने के कदम को अमेरिकी प्रशासन ने कड़ा विरोध जताते हुए खारिज कर दिया है। अमेरिका ने स्पष्ट तौर पर चीन पर पर्यावरण संरक्षण का बहाना बनाकर इलाके में अस्थिरता फैलाने और पड़ोसी देश के अधिकारों में बाधा डालने का आरोप लगाया है।

अमेरिकी विदेश विभाग का तीखा हमला और पर्यावरण का मुद्दा

हालिया तनाव उस समय बढ़ा जब अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने आधिकारिक बयान जारी कर चीन की नीतियो पर सवाल उठाए। टॉमी पिगॉट के अनुसार, पर्यावरण संरक्षण के नाम पर बनाई जा रही योजनाएं वास्तव में एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण सुरक्षा की आड़ लेकर चीन फिलीपींस के मछुआरों को उनके पारंपरिक जल क्षेत्र से दूर रखने का प्रयास कर रहा है।

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अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी चीन की इन कार्रवाइयों की कड़ी निंदा करते हुए फिलीपींस के रुख का समर्थन किया है। वॉशिंगटन ने दोहराया है कि वह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को पूरी तरह स्वतंत्र और खुला रखने की अपनी प्रतिबद्धता पर कायम है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे रक्षा समझौते के तहत अमेरिका ने यह साफ कर दिया है कि वह फिलीपींस की संप्रभुता और समुद्री अधिकारों की रक्षा में उसके साथ खड़ा रहेगा।

स्कारबोरो शोआल की भौगोलिक स्थिति और आर्थिक महत्व

विवाद के केंद्र में स्थित स्कारबोरो शोआल फिलीपींस के मुख्य लूजोन द्वीप से लगभग 240 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। भौगोलिक रूप से छोटा दिखने वाला यह समुद्री इलाका वैश्विक व्यापार और नौवहन के दृष्टिकोण से रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। यह क्षेत्र दक्षिण चीन सागर के प्रमुख व्यस्ततम समुद्री मार्गों के पास स्थित है।

दक्षिण चीन सागर के इन व्यापारिक रास्तों से हर साल 3 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का अंतरराष्ट्रीय व्यापार गुजरता है। इस वजह से स्कारबोरो शोआल या इसके आसपास के जल क्षेत्र पर किसी भी देश का प्रशासनिक अथवा सैन्य नियंत्रण होना उसे विशाल आर्थिक शक्ति और रणनीतिक बढ़त दिलाता है। यही कारण है कि इस क्षेत्र पर वर्चस्व जमाने के लिए वैश्विक शक्तियों के बीच खींचतान बनी हुई है।

चीन के नए प्रशासनिक नियम और सरकारी निगरानी

स्कारबोरो शोआल को लेकर चीन का विवाद कोई नया विषय नहीं है, लेकिन हालिया फैसलों ने आग में घी डालने का काम किया है। चीन ने सितंबर 2025 में इस विवादित शोआल को राष्ट्रीय प्रकृति रिजर्व घोषित किया था। इसके पश्चात 1 अगस्त को चीन ने इस रिजर्व के संचालन और प्रबंधन से जुड़े नए प्रशासनिक नियम लागू कर दिए।

इन नए नियमों के तहत चीन ने पूरे क्षेत्र की निगरानी और नियंत्रण को मजबूत करने के लिए अपनी कई सरकारी एजेंसियों को तैनात करने की योजना बनाई है। इसमें चीनी कोस्ट गार्ड की सीधी भागीदारी शामिल की गई है। यद्यपि चीनी अधिकारियों का दावा है कि ये कदम समुद्री पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए उठाए गए हैं, परंतु फिलीपींस और अमेरिका का मानना है कि इन विनियमों का असली मकसद क्षेत्र पर चीन के प्रशासनिक और सैन्य प्रभुत्व को कानूनी रूप देना है।

फिलीपींस का कड़ा विरोध और वाटर कैनन की घटनाएं

फिलीपींस लंबे समय से स्कारबोरो शोआल पर अपना संप्रभु अधिकार जताता रहा है। फिलीपीन के मछुआरे कई पीढ़ियों से इस क्षेत्र में मछली पकड़ने का काम करते आए हैं और यह उनकी आजीविका का मुख्य साधन है। फिलीपींस का आरोप है कि चीन की कोस्ट गार्ड और अन्य समुद्री एजेंसियां लगातार उनके मछुआरों तथा सरकारी गश्ती जहाजों को इलाके में जाने से रोकती हैं।

हाल के दिनों में स्थिति तब अधिक गंभीर हो गई जब चीनी कोस्ट गार्ड के जहाजों ने फिलीपींस के जहाजों को खदेड़ने के लिए वाटर कैनन का प्रयोग किया। इस तरह की हिंसक और उकसावे वाली कार्रवाइयों से दोनों देशों के बीच समुद्री सीमाओं पर तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है, जिससे क्षेत्र में सैन्य झड़प की आशंका बढ़ गई है।

नाइन-डैश लाइन और 2016 का अंतरराष्ट्रीय फैसला

चीन पूरे दक्षिण चीन सागर के बड़े हिस्से पर अपने ऐतिहासिक अधिकारों का दावा करता है, जिसे वह नाइन-डैश लाइन के जरिए दर्शाता है। हालांकि, वर्ष 2016 में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत ने इस मामले पर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि नाइन-डैश लाइन के आधार पर चीन के व्यापक समुद्री दावे अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के अनुरूप नहीं हैं।

इसके बावजूद चीन ने इस अंतरराष्ट्रीय अदालत के फैसले और क्षेत्राधिकार को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था और अपनी विस्तारवादी नीतियों को जारी रखा। चीन का आरोप है कि अमेरिका दक्षिण चीन सागर के मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप कर रहा है और क्षेत्रीय देशों को भड़काकर अपने पाले में करने की कोशिश कर रहा है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए स्कारबोरो शोआल अब केवल फिलीपींस और चीन के बीच का स्थानीय विवाद नहीं रहा, बल्कि यह अमेरिका और चीन के बीच वैश्विक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का एक बड़ा मोर्चा बन चुका है।

सवाल-जवाब

स्कारबोरो शोआल को लेकर विवाद क्या है?
चीन ने स्कारबोरो शोआल पर राष्ट्रीय प्रकृति रिजर्व घोषित कर नए प्रशासनिक नियम लागू किए हैं, जिसे अमेरिका और फिलीपींस ने अपने अधिकार क्षेत्र पर कब्जे का प्रयास बताकर खारिज कर दिया है।
स्कारबोरो शोआल फिलीपींस से कितनी दूर है?
स्कारबोरो शोआल फिलीपींस के मुख्य लूजोन द्वीप से लगभग 240 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने क्या कहा?
टॉमी पिगॉट ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की आड़ में चीन फिलीपींस के मछुआरों को उनके जल क्षेत्र से दूर रखने की साजिश रच रहा है।
दक्षिण चीन सागर का आर्थिक महत्व क्या है?
दक्षिण चीन सागर के समुद्री व्यापारिक मार्गों से प्रतिवर्ष 3 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का अंतरराष्ट्रीय व्यापार गुजरता है।
2016 के अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत के फैसले में क्या कहा गया था?
2016 में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत ने फैसला सुनाया था कि नाइन्स-डैश लाइन पर आधारित चीन के व्यापक दावे अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के अनुरूप नहीं हैं।
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