अमेरिकी राजधानी वॉशिंगटन में सत्ता के केंद्र यानी व्हाइट हाउस से महज दो सौ मीटर की दूरी पर एक ऐतिहासिक इमारत की खरीद को लेकर सुरक्षा और खुफिया महकमों में हड़कंप मच गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े फिलिप किउ ने अपने पारिवारिक फाउंडेशन के माध्यम से वॉशिंगटन की सिक्योरिटीज बिल्डिंग को लगभग 84 लाख डॉलर में अपने नाम किया है। यह रियल एस्टेट सौदा 21 जुलाई 2026 को अंतिम रूप से संपन्न हुआ था। अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास के इतने पास इस तरह की संपत्ति का अधिग्रहण होने और खरीदार के चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के साथ कथित रिश्तों ने सामरिक हलकों में गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विश्लेषक इस बात की गहराई से पड़ताल कर रहे हैं कि क्या यह महज एक सामान्य व्यावसायिक निवेश है या इसके पीछे कोई छिपा हुआ रणनीतिक और सामरिक उद्देश्य छिपा है।
चीनी पुलिस और स्नाइपर ट्रेनिंग का पुराना इतिहास
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात खरीदार की पृष्ठभूमि है। सामने आई जानकारी के अनुसार, फिलिप किउ ने शंघाई की क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन टीम में अपनी सेवाएं दी हैं। यह विशेष इकाई शंघाई पब्लिक सिक्योरिटी ब्यूरो के अधीन काम करती है, जो सीधे तौर पर चीन के मिनिस्ट्री ऑफ पब्लिक सिक्योरिटी के अंतर्गत आती है। इसके अलावा, दस्तावेजों और रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि किउ ने विशेष रूप से स्नाइपर और कॉम्बैट यानी युद्धक प्रशिक्षण हासिल किया हुआ है। वर्ष 2011 के दौरान शंघाई जिओ टोंग विश्वविद्यालय में आयोजित एक वॉरगेम प्रतियोगिता में उनके उत्कृष्ट व्यक्तिगत स्नाइपर प्रदर्शन का विशेष रूप से उल्लेख मिलता है। वर्तमान समय में वह एक ऐसे फाउंडेशन की कमान संभाल रहे हैं, जिसे चीन के यूनाइटेड फ्रंट वर्क डिपार्टमेंट से जुड़ा हुआ माना जाता है, जो विदेशों में प्रभाव स्थापित करने के अभियानों के लिए जाना जाता है।
व्हाइट हाउस से चंद कदमों की दूरी और जासूसी का खतरा
इस मामले में सबसे बड़ा मुद्दा इस ऐतिहासिक इमारत की भौगोलिक स्थिति यानी लोकेशन है। व्हाइट हाउस परिसर से केवल 650 फीट की दूरी पर स्थित होने के कारण यह जगह किसी भी बेहद संवेदनशील सरकारी गतिविधि या सुरक्षा घेरे के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों और खुफिया विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी ताकतों द्वारा जासूसी अभियानों को अंजाम देने के लिए रणनीतिक रूप से अहम ठिकानों के नजदीक संपत्तियां हासिल करना एक पुराना तरीका रहा है। इस घटनाक्रम को लेकर विभिन्न सुरक्षा विश्लेषकों ने चिंता जताई है। जानकारों का कहना है कि यह चीन की सोची-समझी सॉफ्ट टूल्स रणनीति का एक सटीक उदाहरण है, जिसके तहत बीजिंग अपनी व्यापक खुफिया और विस्तारवादी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए केवल पारंपरिक सैन्य तरीकों पर ही निर्भर नहीं रहता है। इसके बजाय वह संपत्तियों, व्यावसायिक नेटवर्क, सांस्कृतिक संगठनों और विभिन्न संस्थानों के माध्यम से चुपचाप अपना प्रभाव और दायरा बढ़ाने की कोशिश करता रहता है।
पूर्व खुफिया अधिकारियों की सख्त जांच की मांग
इस संवेदनशील सौदे के सामने आने के बाद अमेरिकी खुफिया तंत्र भी सक्रिय हो गया है। पूर्व सीआईए अधिकारियों ने मीडिया के सामने खुलकर यह मांग उठाई है कि अमेरिकी संघीय एजेंसियों को इस पूरी संपत्ति खरीद की गहनता से जांच करनी चाहिए। सुरक्षा जानकारों के मन में यह प्रबल आशंका बनी हुई है कि व्हाइट हाउस के इतनी नजदीक स्थित इस इमारत से किसी भी प्रकार की इलेक्ट्रॉनिक निगरानी करने, सिग्नल्स को कैप्चर करने या संवेदनशील जानकारियां जुटाने के रास्ते खुल सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह स्थिति बेहद संवेदनशील मानी जा रही है, क्योंकि इस तरह के ठिकानों से प्रशासनिक गतिविधियों पर नजर रखना और तकनीकी उपकरणों के जरिए खुफिया जानकारी जुटाना तकनीकी रूप से संभव हो सकता है, जिससे देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर सीधा असर पड़ सकता है।
संवेदनशील सैन्य अड्डों के पास भी खरीदे गए हैं ठिकाने
यह कोई पहला मौका नहीं है जब चीन या उससे जुड़ी ताकतों पर अमेरिकी भूमि पर ऐसी संवेदनशील संपत्तियां खरीदने का आरोप लगा हो। इस प्रकार के मामलों का इतिहास काफी पुराना रहा है और पहले भी कई ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। रिपोर्टों में इस बात का भी विस्तार से जिक्र किया गया है कि किस तरह से अतीत में भी चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े लोगों या मुखौटा संस्थाओं ने अमेरिका के कई बेहद संवेदनशील सैन्य ठिकानों और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे के आसपास जमीन और बड़ी संपत्तियां खरीदी हैं। इनमें मुख्य रूप से टेक्सास राज्य में स्थित लॉफलिन एयर फोर्स बेस और नॉर्थ डकोटा राज्य में स्थित ग्रैंड फोर्क्स एयर फोर्स बेस के आसपास के इलाके शामिल हैं, जहां इस तरह की संदिग्ध खरीद ने पहले भी अमेरिकी प्रशासन और रक्षा विभाग की नींद उड़ाई थी।





















