उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर स्थित प्रसिद्ध केबीपीजी कॉलेज में सीटों की संख्या बढ़ाने को लेकर चल रहा छात्रों का 24 घंटे लंबा धरना आखिरकार समाप्त हो गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा सीट वृद्धि की मांग को पूरा करने का ठोस आश्वासन मिलने के बाद आंदोलनकारी छात्रों ने अपना अनशन वापस ले लिया। इस निर्णय से दाखिले का इंतजार कर रहे सैकड़ों वंचित विद्यार्थियों को बड़ी राहत मिली है।
24 घंटे चला धरना और प्रशासन की पहल
केबीपीजी कॉलेज में नए शैक्षणिक सत्र के दौरान सीटों में बढ़ोतरी न होने की वजह से कई मेधावी और स्थानीय छात्र प्रवेश लेने से वंचित रह गए थे। छात्र लगातार मांग कर रहे थे कि हर साल की तरह इस बार भी कॉलेज में सीटें बढ़ाई जाएं ताकि दाखिला प्रक्रिया सुगम हो सके। जब अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ, तो छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा और वे 24 घंटे के भूख हड़ताल तथा अनशन पर बैठ गए। आंदोलन को बढ़ता देख कॉलेज प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को समझा और एक आधिकारिक पत्र तैयार करके उच्च स्तर पर विश्वविद्यालय को भेजा। इसके बाद विश्वविद्यालय की तरफ से सीट बढ़ाने का भरोसा दिया गया, जिसके बाद छात्रों ने अपना विरोध प्रदर्शन समाप्त कर दिया।
विश्वविद्यालय संबद्धता का बदलाव और पुराना ढर्रा
इस पूरे विवाद की जड़ में कॉलेज की संबद्धता में हुआ बदलाव भी एक बड़ा कारण बताया जा रहा है। पहले यह महाविद्यालय महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से संबद्ध था, और उस दौरान हर वर्ष नियमित रूप से आवश्यकता अनुसार सीटों में वृद्धि कर दी जाती थी। हालांकि, पिछले वर्ष इस संस्थान को मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय के अधीन स्थानांतरित कर दिया गया। नए विश्वविद्यालय प्रशासन के तहत पिछले साल भी छात्रों को सीट वृद्धि के लिए आंदोलन करना पड़ा था, जिसके बाद ही प्रशासनिक कदम उठाए गए थे। इस वर्ष भी समय पर सीटों का कोटा न बढ़ाए जाने के कारण छात्रों में निराशा का माहौल व्याप्त हो गया था, जिसे दूर करने के लिए उन्हें पुनः सड़क पर उतरना पड़ा।
गरीब परिवारों के बच्चों पर पड़ता है सीधा असर
आंदोलन की अगुवाई कर रहे छात्र सूचित पांडेय ने बताया कि केबीपीजी कॉलेज को क्षेत्र में आमतौर पर कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि वाले बच्चों का प्रमुख सहारा माना जाता है। उन्होंने कहा कि यहां अधिकांश दाखिले गरीब परिवारों के छात्रों के होते हैं। यदि समय पर सीटें नहीं बढ़ाई जाती हैं, तो दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों से आने वाले इन आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए आगे की पढ़ाई जारी रखना मुश्किल हो जाता है। इसी चिंता के कारण छात्र लगातार धरना दे रहे थे और मांग कर रहे थे कि जरूरतमंद बच्चों का भविष्य अधर में न लटके।
सीटों के आवंटन में सोर्स बाजी का आरोप
अनशन में शामिल एक अन्य छात्रा अजमा खान ने महाविद्यालय में चल रही प्रवेश प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। अजमा खान का कहना था कि कॉलेज परिसर में फिलहाल कई सीटें खाली होने के बावजूद साधारण छात्रों को प्रवेश नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन अभ्यर्थियों के पास मजबूत पैरवी या सोर्स है, केवल उन्हीं के दाखिले आसानी से किए जा रहे हैं। बिना सोर्स वाले आम छात्र भटकने को मजबूर हैं। छात्रों ने मांग उठाई कि रिक्त सीटों पर पारदर्शी तरीके से नए आवेदकों का दाखिला सुनिश्चित किया जाए ताकि किसी भी योग्य छात्र के साथ अन्याय न हो।


















