उत्तर प्रदेश के ताजनगरी क्षेत्र में कानून की पढ़ाई और वकालत के पेशे को लेकर छात्र-छात्राओं में असाधारण आकर्षण देखने को मिल रहा है। शहर के प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक आगरा कॉलेज के विधि संकाय में इस शैक्षणिक सत्र में प्रवेश लेने के लिए अभूतपूर्व भीड़ उमड़ी है। संस्थान में संचालित लॉ पाठ्यक्रम में उपलब्ध कुल 300 सीटों के सापेक्ष 2250 से अधिक विद्यार्थियों ने प्रवेश के लिए अपने आवेदन जमा कराए हैं। आवेदनों की इस भारी संख्या के चलते प्रत्येक सीट के लिए कड़ा मुकाबला पैदा हो गया है, क्योंकि उपलब्ध स्थानों की तुलना में उम्मीदवारों की संख्या कई गुना अधिक पहुंच चुकी है।
सीटों की तुलना में आवेदनों का नया कीर्तिमान
संस्थान के लॉ संकाय के विभागाध्यक्ष डीसी मिश्रा के अनुसार, कॉलेज के इतिहास में यह पहला अवसर है जब 300 सीटों की क्षमता के सामने 2250 से ज्यादा अभ्यर्थियों ने अपना पंजीकरण कराया है। आवेदन प्रक्रिया संपन्न होने के पश्चात अब प्रवेश समिति मेरिट के आधार पर योग्य छात्र-छात्राओं को शॉर्टलिस्ट करने के काम में जुटी हुई है। विभागाध्यक्ष का कहना है कि युवा पीढ़ी कानून के क्षेत्र को एक सशक्त और सुरक्षित करियर विकल्प के तौर पर देख रही है। इसी रुझान का नतीजा है कि विधि संकाय में प्रवेश पाने के लिए फॉर्म भरने वालों की संख्या ने पिछले तमाम आंकड़ों को पीछे छोड़ दिया है।
तकनीक और बदलाव के दौर में भी कानूनी पेशे का दबदबा
मौजूदा दौर में जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीकों का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है, तब भी कानूनी पेशे के प्रति युवाओं का भरोसा डिगा नहीं है। छात्र वकालत को बौद्धिक स्वतंत्रता और मजबूत करियर संभावनाओं से जुड़े क्षेत्र के रूप में प्राथमिकता दे रहे हैं। विभागाध्यक्ष डीसी मिश्रा ने इस बात पर जोर दिया कि आवेदनों में आई यह भारी उछाल स्पष्ट संकेत देती है कि विद्यार्थी न्याय प्रणाली और कानूनी प्रक्रियाओं की बारीकियों को समझने के प्रति बेहद गंभीर हैं। सीमित सीटों के चलते प्रवेश पाना चुनौतीपूर्ण हो गया है और अब हर छात्र की नजर आने वाली चयन सूची पर टिकी है।
इस तरह तैयार की जा रही है दाखिले की मेरिट
आगरा कॉलेज की चयन प्रणाली पूरी तरह से शैक्षणिक प्रदर्शन पर केंद्रित रखी गई है। विधि संकाय में प्रवेश देने के लिए 12वीं कक्षा और स्नातक स्तर पर हासिल किए गए अंकों को जोड़कर एक संयुक्त मेरिट लिस्ट तैयार की जाती है। इसी समग्र स्कोर के आधार पर शीर्ष स्थान पाने वाले आवेदकों को सीट आवंटित की जाएगी। डीसी मिश्रा ने स्पष्ट किया कि निर्धारित नियमों के तहत ही पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जा रही है। चूंकि कुल सीटें केवल 300 ही हैं, इसलिए अधिकांश आवेदकों को स्थान मिल पाना मुमकिन नहीं होगा। ऐसे में मेरिट सूची जारी होने के बाद ही यह तस्वीर साफ हो सकेगी कि किन भाग्यशाली और मेधावी विद्यार्थियों को कॉलेज से लॉ की पढ़ाई करने का अवसर मिल पाता है।



















