दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियों की ओर से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्चर पर रिकॉर्ड तोड़ पूंजी लगाने की होड़ अब शेयर बाजार में चिंता की नई वजह बन गई है। पिछले दो हफ्तों के दौरान अल्फाबेट, अमेज़न, मेटा और माइक्रोसॉफ्ट ने मिलकर इस चालू वर्ष में 740 अरब डॉलर से अधिक पूंजीगत व्यय करने की विस्तृत योजना सामने रखी है। वॉल स्ट्रीट इस भारी भरकम रकम को पूरी तरह से एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, विशाल डेटा सेंटर्स और एडवांस्ड चिप्स की खरीद पर होने वाले निवेश के रूप में देख रहा है। शुरुआती दौर में जब कंपनियों ने एआई पर आक्रामक पूंजी खर्च करने का ऐलान किया था, तब निवेशकों ने इसे भविष्य के विकास और तकनीकी नेतृत्व का मजबूत संकेत मानकर शेयरों में जबरदस्त खरीदारी की थी। हालांकि चौथी तिमाही की शुरुआत के साथ ही बाजार का यह उत्साह अचानक ठंडे बस्ते में जाता दिख रहा है, क्योंकि कंपनियों का निगेटिव फ्री कैश फ्लो, तेजी से बढ़ता कर्ज और इन भारी प्रोजेक्ट्स से होने वाले मुनाफे पर अनिश्चितता अब साफ दिखने लगी है।
बाजार में भारी बिकवाली और चिप कंपनियों को बड़ा झटका
इस बढ़ती बेचैनी का सीधा असर शुक्रवार को शेयर बाजार पर बेहद तीखे रूप में दिखाई दिया। टेक शेयरों पर केंद्रित नैस्डैक कंपोजिट इंडेक्स में 2.9% की भारी गिरावट दर्ज की गई। हार्डवेयर और चिप निर्माता कंपनियों के शेयरों में भी तीखी बिकवाली देखने को मिली। एनवीडिया के शेयरों में 4% की कमी आई, जबकि ब्रॉडकॉम 5% से अधिक लुढ़क गया और क्वालकॉम के शेयर 11% टूट गए। गूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट के लिए स्थिति और भी गंभीर रही। गुरुवार को अपने इतिहास के सबसे खराब कारोबारी दिन में 12% टूटने और लगभग 500 अरब डॉलर की मार्केट वैल्यू गंवाने के बाद शुक्रवार को भी इसके शेयरों में गिरावट जारी रही।
सर्च बिजनेस की सुस्ती और गूगल पर दोहरा दबाव
बाजार में सबसे गंभीर चिंता इस बात को लेकर पैदा हुई है कि जिन टेक कंपनियों के पास अपने मुख्य व्यवसायों से नकदी का अंबार लगा रहता था, उनकी वित्तीय सेहत पर अब एआई की लागत सीधा वार कर रही है। अल्फाबेट इसका सबसे स्पष्ट उदाहरण बनकर उभरी है। कंपनी ने तीसरी तिमाही में 9.1 अरब डॉलर का निगेटिव फ्री कैश फ्लो दर्ज किया, जो लगातार दूसरी तिमाही है जब कंपनी का कैश फ्लो लाल निशान में रहा है। इसी अवधि के दौरान उसका तिमाही पूंजीगत व्यय उछलकर 51.4 अरब डॉलर पर पहुंच गया। अल्फाबेट का अनुमान है कि इस साल उसका कुल पूंजीगत खर्च 205 अरब डॉलर तक जा सकता है, और कंपनी को उम्मीद है कि 2027 में भी यह खर्च लगातार बढ़ता रहेगा।
इसके साथ ही गूगल सर्च के भीतर सीधे जोड़े गए एआई मोड फीचर की जबरदस्त लोकप्रियता कंपनी के सबसे बड़े कमाई वाले स्रोत को ही प्रभावित करने लगी है। गूगल का सर्च विज्ञापन कारोबार, जो कंपनी के कुल राजस्व का लगभग आधा हिस्सा बनाता है, उसकी वृद्धि दर घटकर 12% रह गई। यह पिछले पांच तिमाहियों में इसकी सबसे सुस्त रफ्तार है। इससे कंपनी के सामने एक अजीब विरोधाभास पैदा हो गया है, क्योंकि वह उसी तकनीक पर अरबों डॉलर लुटा रही है जो उसके मूल सर्च विज्ञापन राजस्व को कमजोर कर रही है।
अमेज़न और मेटा में भी कैश फ्लो का भारी संकट
ई-कॉमर्स और क्लाउड दिग्गज अमेज़न भी बिल्कुल इसी तरह की वित्तीय चुनौती से जूझ रहा है। कंपनी ने पिछले 12 महीनों के दौरान 42.4 अरब डॉलर का निगेटिव फ्री कैश फ्लो दर्ज किया है, जबकि ठीक एक साल पहले समान अवधि में उसके पास 14.8 अरब डॉलर का पॉजिटिव फ्री कैश फ्लो मौजूद था। अमेज़न का अनुमान है कि वह इस साल पूंजीगत व्यय के तौर पर 220 अरब डॉलर खर्च करेगा। हालांकि उसके एडब्ल्यूएस क्लाउड डिवीजन का राजस्व 39% बढ़ा, लेकिन गुरुवार को वित्तीय नतीजे जारी होने के बाद उसके शेयर में 7% की तेज गिरावट दर्ज की गई।
सोशल मीडिया दिग्गज मेटा भी तेजी से नकदी जला रही है। तीसरी तिमाही में मेटा का फ्री कैश फ्लो निगेटिव 2.1 अरब डॉलर रहा, क्योंकि उसका पूंजीगत व्यय उसके परिचालन से आने वाली नकदी से कहीं अधिक निकल गया। कंपनी इस साल अपने पूंजीगत खर्च के 145 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान लगा रही है। मेटा ने यह भी स्वीकार किया कि उसका नया मुफ्त पर्सनल एआई एजेंट म्यूज काफी महंगा साबित हो रहा है। कंपनी के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने कहा है कि इसे चलाना “कंप्यूट के लिहाज से बेहद खर्चीला” है। हालांकि मेटा के विज्ञापन राजस्व में 26% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, लेकिन इस अच्छी खबर के बावजूद पिछले हफ्ते उसके शेयर में 10% की गिरावट को रोका नहीं जा सका।
माइक्रोसॉफ्ट का अपवाद और छोटे क्लाउड वेंडर्स पर मार
इस पूरे परिदृश्य में फ्री कैश फ्लो के मोर्चे पर एकमात्र अपवाद माइक्रोसॉफ्ट रहा। कंपनी ने अपनी पिछली तिमाही में 18.6 अरब डॉलर का पॉजिटिव फ्री कैश फ्लो दर्ज किया। इस दौरान उसका पूंजीगत खर्च 45.2 अरब डॉलर रहा, जो उसके अपने अनुमानित 50 अरब डॉलर से कम था। हालांकि माइक्रोसॉफ्ट ने साफ किया कि यह एआई खर्च में जानबूझकर की गई कोई कटौती नहीं थी, बल्कि तीसरे पक्ष के बुनियादी ढांचा प्रदाताओं की ओर से क्षमता मिलने में हुई देरी के कारण ऐसा हुआ। इसका नतीजा यह हुआ कि एआई कंप्यूटिंग क्षमता किराए पर देने वाली छोटी कंपनियों के शेयर बाजार में धड़ाम हो गए।
कर्ज और बॉन्ड के सहारे खड़ा हो रहा इंफ्रास्ट्रक्चर
इस पूरे एआई ढांचे को तैयार करने का खर्च सिर्फ कंपनियों के आंतरिक मुनाफे से नहीं आ रहा है, बल्कि इसके लिए शेयर और बॉन्ड बाजार से भी जमकर उधारी उठाई जा रही है। एसएंडपी ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस के आंकड़ों के अनुसार माइक्रोसॉफ्ट, अल्फाबेट, अमेज़न, मेटा और ओरेकल ने मिलकर वर्ष 2026 में कुल 326 अरब डॉलर का कर्ज जुटाया है, जो पिछले साल जुटाए गए कर्ज की तुलना में तीन गुना अधिक है।
हालांकि एआई कंप्यूट की मांग अब भी मजबूत बनी हुई है और गूगल, अमेज़न और माइक्रोसॉफ्ट तीनों के क्लाउड कारोबार में बढ़त देखी गई है। लेकिन इस असीमित मांग को पूरा करने के लिए होने वाले अनियंत्रित खर्च ने वॉल स्ट्रीट के निवेशकों को बुरी तरह डरा दिया है। यह अनिश्चितता एंथ्रोपिक के बहुप्रतीक्षित आईपीओ के लिए भी परिस्थितियां जटिल बना सकती है। एंथ्रोपिक ने इसी हफ्ते सार्वजनिक निर्गम के लिए आवेदन दाखिल किया है और उसका भविष्य भारी भरकम कंप्यूटिंग क्षमता हासिल करने पर टिका है। ब्लैकस्टोन ने निवेशकों को आगाह किया है कि आईपीओ के बाद कंपनी शायद इन्वेस्टमेंट-ग्रेड रेटिंग हासिल करने की पात्रता पूरी न कर पाए, जिसका मतलब यह होगा कि उसे अपनी महत्वाकांक्षाओं के लिए हाइपरस्केलर्स और तीसरे पक्ष के मंचों पर और ज्यादा निर्भर रहना पड़ सकता है।























