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उत्तराखंड के जोशीमठ में हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त, बद्रीनाथ से लौट रहे बेंगलुरु के पुलिस इंस्पेक्टर और 4 दोस्तों समेत 6 की मौतभारत
31 अक्तू॰ 2026, 7:20 am (2 घंटे पहले)· 1

उत्तराखंड के जोशीमठ में हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त, बद्रीनाथ से लौट रहे बेंगलुरु के पुलिस इंस्पेक्टर और 4 दोस्तों समेत 6 की मौत

बद्रीनाथ धाम के दर्शन कर ऋषिकेश लौट रहा एक हेलीकॉप्टर चमोली जिले के जोशीमठ में हादसे का शिकार हो गया, जिसमें पायलट समेत कर्नाटक के 5 तीर्थयात्रियों की जान चली गई।

उत्तराखंड के पर्वतीय इलाके में चार धाम यात्रा से लौट रहे श्रद्धालुओं के साथ एक भीषण सड़क हादसा होने के बाद अब हवाई सफर में दर्दनाक त्रासदी सामने आई है। बद्रीनाथ से ऋषिकेश जा रहा एक हेलीकॉप्टर चमोली जिले के ज्योतिर्मठ यानी जोशीमठ के पास अचानक दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस गंभीर हादसे में कॉकपिट में मौजूद पायलट के साथ-साथ केबिन में बैठे सभी पांच यात्रियों की मौके पर ही जान चली गई। प्रशासनिक टीमों ने घटनास्थल से सभी छह शव बरामद कर लिए हैं और इस पूरे मामले की विस्तृत तकनीकी जांच विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो को सौंप दी गई है। पायलट के अलावा विमान में सवार बाकी सभी पांचों यात्री कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के रहने वाले थे, जो अपने घर वापसी की राह देख रहे थे।

कर्नाटक पुलिस के इंस्पेक्टर भी थे बद्रीनाथ से लौट रहे यात्रियों में शामिल

विमान में सवार मृतकों की पहचान सामने आने पर पुलिस महकमे में भी शोक की लहर दौड़ गई। हादसे का शिकार होने वालों में बेंगलुरु पुलिस की सेंट्रल क्राइम ब्रांच यानी सीसीबी में तैनात 44 वर्षीय पुलिस इंस्पेक्टर अरुण सालुंके शामिल थे। 28 अगस्त को सालुंके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर सीसीबी में ही तैनात अपने एक साथी पुलिसकर्मी के निधन पर दुख जताते हुए लिखा था कि वे बहुत जल्दी चले गए। नियति का क्रूर संयोग देखिए कि इस पोस्ट के ठीक एक महीने और कुछ दिनों बाद खुद सालुंके की भी एक दर्दनाक हादसे में असमय मौत हो गई। शुक्रवार को वे अपने चार करीबी दोस्तों के साथ बद्रीनाथ मंदिर के दर्शन करके हेलीकॉप्टर से वापस लौट रहे थे, तभी यह हादसा पेश आया।

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अरुण सालुंके वर्ष 2007 बैच के कर्नाटक पुलिस अधिकारी थे। उनका पैतृक घर बेलगावी जिले के अथानी तालुक स्थित अरातल गांव में था। खाकी वर्दी पहनने से पहले उन्होंने बेंगलुरु के प्रतिष्ठित एमएस रमैया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से उच्च शिक्षा हासिल की थी। पुलिस बल में सेवा देते हुए उन्होंने सेंट्रल क्राइम ब्रांच में इंस्पेक्टर का पद संभालने से पहले हलसूर पुलिस स्टेशन और राज्य के क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट यानी सीआईडी में भी अपनी जिम्मेदारियां निभाई थीं। वे जिस रेंटल अपार्टमेंट में रहते थे, उसके मालिक दसाप्पा ने उन्हें बेहद मिलनसार और आसपास के लोगों से आत्मीय संबंध रखने वाला इंसान बताया। वहीं उनके पड़ोसी गजेंद्र ने साझा किया कि सुबह की सैर के वक्त अक्सर उनकी मुलाकात होती थी। सालुंके आमतौर पर सुबह 10 बजे ड्यूटी के लिए निकलते थे और रात 10 बजे के आसपास घर लौटते थे।

तीन दिन पहले तीर्थयात्रा पर निकले थे पांचों दोस्त, शाम को था घर लौटने का कार्यक्रम

हादसे में जान गंवाने वाले अन्य चार यात्रियों की पहचान 51 वर्षीय एच एस नटराज, 41 वर्षीय प्रताप निंगराजू, 49 वर्षीय सुधीर के और 39 वर्षीय शंकर गौड़ा के रूप में दर्ज की गई है। प्रशासनिक पुष्टि के अनुसार ये सभी पांचों दोस्त बेंगलुरु शहर में निवास करते थे। इनमें से तुमकुर जिले के हुलियुरदुर्गा क्षेत्र के मूल निवासी नटराज 'विद्या भारती' शिक्षण संस्थान का संचालन कर रहे थे और उसके प्रमुख थे। 39 साल के शंकर गौड़ा पेशे से एक वकील थे। वहीं हासन जिले के सकलेशपुरा तालुक स्थित बचनहल्ली गांव के मूल निवासी प्रताप निंगराजू सिविल निर्माण कार्यों के ठेकेदारी कारोबार से जुड़े थे।

प्रताप करीब 15 साल पहले अपने गांव से बेंगलुरु आ बसे थे और थानिसंद्रा इलाके में अपनी पत्नी और दो बेटों के साथ रहते थे। उनके दोनों बेटे स्कूल में पढ़ते हैं, जिनमें से एक 7वीं कक्षा में और दूसरा तीसरी कक्षा में है। प्रताप के साढ़ू और पेशे से कॉफी प्लांटर प्रज्वल ने बताया कि ये पांचों साथी महज तीन दिन पहले ही पवित्र चार धाम यात्रा पर रवाना हुए थे। सभी परिवार शुक्रवार की शाम तक उनके सकुशल घर पहुंचने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, लेकिन शाम ढलने से पहले ही इस भयानक तबाही की मनहूस खबर आ पहुंची।

उड़ान से ठीक पहले दोस्त से फोन पर बातचीत, बताया था घने कोहरे का हाल

इस हादसे से चंद घंटे पहले की गई बातचीत अब परिजनों और दोस्तों के दिलों को कचोट रही है। हुलियुरदुर्गा के एक कारोबारी और नटराज के बचपन के साथी नागेश के लिए यह आघात असहनीय है। नागेश ने बताया कि शुक्रवार की सुबह करीब 11 बजे नटराज ने खुद हेलीकॉप्टर के भीतर से उन्हें फोन मिलाया था। उस अंतिम बातचीत में नटराज ने कहा था कि वे सभी लोग हेलीकॉप्टर के अंदर सवार हो चुके हैं और मौसम साफ होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

पायलट ने यात्रियों को सूचित किया था कि आसपास की पहाड़ियों में बेहद घना कोहरा छाया हुआ है और जब तक विजिबिलिटी यानी देखने की क्षमता बेहतर नहीं हो जाती, तब तक उड़ान भरना मुमकिन नहीं है। बातचीत के दौरान जब नागेश ने वहां के मौसम का मिजाज पूछा, तो नटराज ने बताया था कि उस ऊंचाई पर कड़ाके की ठंड पड़ रही है। मौसम की इसी अनिश्चितता के बीच बाद में भरी गई उड़ान कुछ ही देर में जोशीमठ की पहाड़ियों में हादसे का शिकार हो गई।

सवाल-जवाब

जोशीमठ में हेलीकॉप्टर हादसा कब और कहां हुआ?
यह हादसा शुक्रवार को उत्तराखंड के चमोली जिले में ज्योतिर्मठ यानी जोशीमठ के पास हुआ, जब हेलीकॉप्टर बद्रीनाथ से ऋषिकेश जा रहा था।
इस दुर्घटना में कुल कितने लोगों की जान गई?
हेलीकॉप्टर में सवार पायलट समेत सभी छह लोगों की इस दुखद हादसे में मौत हो गई।
हादसे का शिकार हुए यात्री कहां के निवासी थे?
पायलट को छोड़कर बाकी सभी पांचों यात्री कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के रहने वाले थे।
मृतकों में शामिल बेंगलुरु पुलिस अधिकारी कौन थे?
मृतकों में बेंगलुरु पुलिस की सेंट्रल क्राइम ब्रांच में तैनात 44 वर्षीय इंस्पेक्टर अरुण सालुंके शामिल थे, जो 2007 बैच के अधिकारी थे।
हादसे में जान गंवाने वाले अन्य चार दोस्त कौन थे?
अन्य चार मृतकों में शिक्षण संस्थान प्रमुख एच एस नटराज, सिविल कॉन्ट्रैक्टर प्रताप निंगराजू, वकील शंकर गौड़ा और सुधीर के शामिल थे।
हादसे से ठीक पहले यात्री नटराज ने अपने दोस्त को क्या बताया था?
नटराज ने फोन पर बताया था कि वे हेलीकॉप्टर में बैठकर मौसम साफ होने का इंतजार कर रहे हैं क्योंकि पायलट के मुताबिक वहां घना कोहरा और कड़ाके की ठंड थी।
इस विमान दुर्घटना की आधिकारिक जांच किसे सौंपी गई है?
इस पूरे मामले की तकनीकी और सुरक्षा जांच विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो को सौंपी गई है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Priya Sharma@priya-sharma·50 मिनट पहले

बद्रीनाथ से लौटते वक्त ऐसी अनहोनी का सोचना भी सिहरन पैदा कर देता है। कुछ साल पहले जब मैं वहाँ गई थी, तो मौसम का मिजाज देखकर ही दिल बैठ जाता था।

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 घंटे पहले

अगस्त में दोस्त के जाने पर अरुण सालुंके का वो पोस्ट देखकर सिहरन हो गई। जिंदगी सच में इतनी ही कच्ची होती है क्या?

Ravikash Gupta@ravikash·1 घंटे पहले

अर्जुन, बात तो सही है, पर इसे किस्मत या कच्ची जिंदगी कहना ठीक नहीं। पहाड़ी उड़ानों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी असली वजह है।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

बद्रीनाथ से लौटते वक्त ऐसा हादसा दिल दहलाने वाला है। एक महीने पहले पुलिस इंस्पेक्टर ने किसी साथी की मौत पर पोस्ट किया था और आज खुद दुनिया छोड़ गए, किस्मत का खेल अजीब है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

रोहन भाई, किस्मत का खेल तो अजीब है ही, पर मुझे लगता है कि अकेले किस्मत को दोष देने से काम नहीं चलेगा। इस बात की तकनीकी जांच होनी चाहिए कि आखिर चमोली जैसे रूट पर मौसम खराब था या हेलीकॉप्टर में कोई और गड़बड़ थी।

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