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30 अक्तू॰ 2026, 11:08 pm (5 मिनट पहले)· 1

अंतरिक्ष में सक्रिय हुआ गूगल का पहला डेटा सेंटर उपग्रह, कक्षा से रचाई कविता

गूगल के सनकैचर प्रोजेक्ट का प्रायोगिक उपग्रह कक्षा में सक्रिय हो गया है और इसके टीपीयू प्रोसेसर ने जेम्मा 4 एआई मॉडल के जरिए अंतरिक्ष से पहला संदेश भेजा है।

धरती से सैकड़ों किलोमीटर ऊपर अंतरिक्ष के शून्य में तैरते हुए एक प्रायोगिक सिलिकॉन प्रोसेसर ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के कार्य निष्पादित करने शुरू कर दिए हैं। गूगल के सनकैचर प्रोजेक्ट के तहत तैयार किए गए इस प्रोटोटाइप स्पेस डेटा सेंटर ने पृथ्वी पर मौजूद नियंत्रण कक्ष के साथ दोतरफा संपर्क स्थापित कर लिया है। इस उपग्रह को इसी महीने स्पेसएक्स के फॉल्कन 9 रॉकेट के जरिए 100 से अधिक अन्य अंतरिक्ष यानों के साथ कक्षा में प्रक्षेपित किया गया था। यह परीक्षण भविष्य में पृथ्वी की कक्षा में चक्कर लगाने वाले उन उपग्रह नेटवर्कों की नींव रख रहा है, जो अंतरिक्ष में ही बड़े पैमाने पर एआई इन्फरेंस से जुड़े कार्य प्रोसेस करेंगे।

सीमित ऊर्जा में टीपीयू का संचालन

इस प्रयोगात्मक उपग्रह में गूगल का एक एकल टेंसर प्रोसेसिंग यूनिट यानी टीपीयू चिप लगाया गया है। अंतरिक्ष यान में लगे सौर पैनल अधिकतम 1 किलोवाट बिजली पैदा करने में सक्षम हैं। टीपीयू जैसे उच्च क्षमता वाले चिप की अत्यधिक बिजली खपत के कारण इसे एक बार में केवल लगभग बीस मिनट के लिए ही चालू रखा जा सकता है। संचालन समय की इस पाबंदी ने अंतरिक्ष से जमीन तक डेटा भेजने और संचार स्थापित करने की पहले से मौजूद जटिल प्रक्रिया को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है। इंजीनियरों को उपग्रह के सक्रिय होने की छोटी सी समय-सीमा के भीतर ही सारे निर्देश भेजने और डेटा प्राप्त करने का काम पूरा करना होता है।

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शुरुआती परीक्षण और अंतरिक्ष से पहला हाइकू

कक्षा में स्थापित होने के बाद लगभग तीन सप्ताह तक उपग्रह के सभी उप-प्रणालियों की गहन जांच और कमिशनिंग प्रक्रिया चली। जब यान पूरी तरह तैयार हो गया, तब जमीन पर तैनात इंजीनियरों ने इस पर पहले से लोड किए गए गूगल डीपमाइंड के जेम्मा 4 मॉडल को पहला निर्देश भेजा। इंजीनियरों ने इस कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल से अंतरिक्ष में होने के अनुभव पर एक हाइकू कविता रचने को कहा, जिसके जवाब में सिस्टम ने लिखा

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मॉडल ने अंतरिक्ष विषय पर आधारित कई छोटी कविताएं तैयार कीं। इसके अलावा, ग्राउंड कंट्रोल ने उपग्रह से उसके आसपास के कक्षीय वातावरण और तापमान की स्थिति की पूरी जानकारी भी मांगी। अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में यह उपग्रह सामान्य रूप से अपनी सेवाएं दे रहा है और सभी सिस्टम तय मानकों के अनुरूप काम कर रहे हैं।

विकिरण और थर्मल तनाव की जमीनी बनाम वास्तविक परख

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि अंतरिक्ष के अत्यधिक तापमान में बदलाव और घातक कॉस्मिक विकिरण के बीच सिलिकॉन चिप्स किस तरह बर्ताव करते हैं। धरती पर वैज्ञानिकों ने कण त्वरक यानी पार्टिकल एक्सेलरेटर में इन टीपीयू चिप्स पर व्यापक विकिरण परीक्षण किए थे, लेकिन अंतरिक्ष के वास्तविक वातावरण में इसका प्रभाव जांचना बिल्कुल अलग चुनौती है। अंतरिक्ष में विकिरण के संपर्क से मेमोरी रजिस्टरों में बिट फ्लिप की स्थिति बन सकती है, जहां कंप्यूटर मेमोरी में दर्ज शून्य का मान एक या एक का मान शून्य में बदल जाता है। यह तकनीकी खराबी सामान्य निगरानी टूल्स को सक्रिय किए बिना ही डेटा को दूषित कर सकती है।

जमीनी परीक्षणों से पता चला था कि इन्फरेंस या निष्कर्ष निकालने वाले कार्यभार पर विकिरण का असर बहुत मामूली रहता है, जबकि किसी एआई मॉडल को प्रशिक्षित करने यानी ट्रेनिंग देने के दौरान यह एक गंभीर समस्या बन सकता है। अब वैज्ञानिक पहली बार किसी कंप्यूटर सिमुलेशन के बजाय वास्तविक अंतरिक्षीय परिस्थितियों में इन भौतिक प्रभावों का विश्लेषण कर रहे हैं।

2027 का रोडमैप और लेजर लिंक की योजना

यदि इस अंतरिक्ष यान में लगा टीपीयू चिप उम्मीद के मुताबिक परिणाम देने में सफल रहता है, तो इस परियोजना के अगले चरण के तहत वर्ष 2027 में ऐसे ही दो और उन्नत उपग्रह अंतरिक्ष में भेजे जाएंगे। वे नए अंतरिक्ष यान अधिक मात्रा में बिजली पैदा कर सकेंगे और आपस में जुड़े रहने के लिए ऑप्टिकल लेजर लिंक का प्रदर्शन करेंगे।

गूगल की स्टारक्लाउड परियोजना अंतरिक्ष-आधारित डेटा केंद्रों की अन्य अवधारणाओं से काफी अलग है। यह उपग्रहों के बीच हाई-स्पीड इंटर-सैटेलाइट लिंक बनाकर एक संयुक्त और वितरित कंप्यूटिंग नेटवर्क तैयार करने की दिशा में काम कर रही है। इसके विपरीत, स्पेसएक्स के डेटा केंद्र भी लेजर तकनीक का उपयोग करेंगे लेकिन उनके उपग्रह एक-दूसरे से काफी दूरी पर परिक्रमा करेंगे, जिससे कंप्यूटिंग भार को साझा करना कठिन होगा। काउबॉय स्पेस और स्टारक्लाउड जैसी कंपनियां प्रत्येक उपग्रह पर स्वतंत्र रूप से इन्फरेंस कार्य करने की रणनीति पर आगे बढ़ रही हैं।

स्टारशिप की अनिवार्यता और अल्फाबेट की दीर्घकालिक योजना

गूगल और स्पेसएक्स के अंतरिक्ष कंप्यूटिंग विजन आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं। गूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट के पास स्पेसएक्स में खासी हिस्सेदारी है। दोनों कंपनियों के कक्षीय डेटा केंद्र के सपने को हकीकत में बदलने के लिए एलोन मस्क के स्टारशिप रॉकेट का पूरी तरह से और तेजी से दोबारा इस्तेमाल में लाया जाना अनिवार्य है।

सनकैचर के शोधकर्ताओं द्वारा प्रकाशित एक समीक्षा अध्ययन के अनुसार, स्पेसएक्स को अपने स्टारशिप रॉकेट को लगभग 1,800 बार अंतरिक्ष में उड़ाना होगा, तभी वह निर्माण और प्रक्षेपण लागत में वैसी भारी कमी ला पाएगा जैसी उसने अपने शुरुआती रॉकेटों के साथ हासिल की थी। यह परियोजना 2030 के दशक के लिए किफायती तकनीकी बुनियादी ढांचा तैयार करने का एक महत्वाकांक्षी प्रयास है। हालांकि, अल्फाबेट के लिए निकट भविष्य की चुनौतियां भी कम नहीं हैं, जहां सर्च इंजन में एआई को जोड़ने के प्रयासों के चलते कंपनी की विज्ञापन आय की वृद्धि पर असर पड़ा है और इसके शेयरों में हाल ही में गिरावट भी देखी गई है।

सवाल-जवाब

गूगल के इस अंतरिक्ष उपग्रह का क्या नाम है?
यह उपग्रह गूगल की प्रयोगात्मक परियोजना 'सनकैचर' के तहत तैयार किया गया एक प्रोटोटाइप स्पेस डेटा सेंटर है।
उपग्रह को किस रॉकेट से और कितने अन्य पेलोड के साथ भेजा गया था?
इसे स्पेसएक्स के फॉल्कन 9 रॉकेट की मदद से 100 से अधिक अन्य अंतरिक्ष यानों के साथ कक्षा में प्रक्षेपित किया गया था।
इस उपग्रह में कौन सा प्रोसेसर लगा है और यह कितनी देर काम करता है?
इसमें गूगल का एक एकल टीपीयू लगा है और ऊर्जा की भारी मांग के कारण यह एक बार में केवल 20 मिनट ही काम कर सकता है।
उपग्रह पर किस एआई मॉडल ने पहली कविता लिखी?
उपग्रह पर पहले से लोड किए गए गूगल डीपमाइंड के जेम्मा 4 मॉडल ने जमीन से भेजे गए निर्देश पर अंतरिक्ष से हाइकू कविता रची।
अंतरिक्ष में कंप्यूटर चिप्स को सबसे बड़ा खतरा किस बात से होता है?
ब्रह्मांडीय विकिरण से मेमोरी में बिट फ्लिप होने का खतरा रहता है, जिससे डाटा विकृत हो सकता है और सामान्य निगरानी टूल्स को इसका पता भी नहीं चलता।
गूगल इस परियोजना के तहत अगले उपग्रह कब लॉन्च करेगा?
यदि मौजूदा परीक्षण सफल रहे, तो कंपनी वर्ष 2027 में दो और उन्नत उपग्रह प्रक्षेपित करने की योजना बना रही है जो लेजर लिंक से जुड़े होंगे।
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