एआई स्टार्टअप एंथ्रोपिक ने शुक्रवार को अपनी एक नई रिपोर्ट जारी की है, जिससे यह खुलासा हुआ है कि पिछले एक साल के दौरान कंपनी के कार्यबल के ढांचे और दैनिक कामकाज की शैली में काफी बदलाव आया है। कंपनी का मानना है कि उनके यहां चल रहे ये अंदरूनी बदलाव यह इशारा करते हैं कि आने वाले समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता किस तरह से पूरी अर्थव्यवस्था में काम के तौर-तरीकों, नई भर्तियों और श्रम की मांग को प्रभावित करेगी। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि इस कंपनी ने अपने सभी कार्यप्रवाहों को पूरी तरह से एआई के इर्द-गिर्द ढाल लिया है। हालांकि अन्य संस्थान इस तकनीक को उतनी गहराई से नहीं अपनाएं, फिर भी यह रिपोर्ट इस बात का एक दिलचस्प नजारा पेश करती है कि फिलहाल यह संगठन अंदरूनी रूप से कैसे काम कर रहा है।
जूनियर नियुक्तियों में आई भारी गिरावट
इस रिपोर्ट के मुताबिक, एंथ्रोपिक अब नए और कम अनुभव वाले लोगों को कम रख रहा है। तकनीकी विभागों में जूनियर स्तर के कर्मचारियों की हिस्सेदारी शुरुआती 2025 में 21 प्रतिशत थी, जो अब गिरकर 14 प्रतिशत रह गई है। इसके अलावा, जूनियर स्तर पर होने वाली नई तकनीकी भर्तियां तो और भी तेजी से नीचे आई हैं, जो 27 प्रतिशत से घटकर सीधे 9 प्रतिशत पर पहुंच गई हैं।
इसके साथ ही, तकनीकी टीमों की कुल वर्कफोर्स में हिस्सेदारी भी 61 प्रतिशत से घटकर 56 प्रतिशत हो गई है। कंपनी का यह कहना है कि जैसे-जैसे व्यवसाय का दायरा बढ़ रहा है, वैसे-वैसे अन्य व्यावसायिक विभागों का स्वाभाविक रूप से विस्तार हो रहा है। इसके अलावा, अब कोडिंग टूल्स की मदद से वे लोग भी खुद सॉफ्टवेयर तैयार कर पा रहे हैं जो तकनीकी पृष्ठभूमि से ताल्लुक नहीं रखते हैं।
क्लाउड के दौर में बढ़ी उत्पादकता और मीटिंग्स
कंपनी के भीतर इस बात का हमेशा दबाव रहता है कि जितना संभव हो उतनी तेजी से काम किया जाए और हर काम के लिए क्लाउड का इस्तेमाल किया जाए। अप्रैल 2026 के एक सर्वे के अनुसार, 27 प्रतिशत कर्मचारियों ने यह माना कि इस तकनीक की वजह से उनकी कार्यक्षमता में इजाफा हुआ है। वहीं 20 प्रतिशत कर्मचारियों का यह कहना था कि उनका काम असल रूप से काम करना न रहकर इन मॉडल्स को प्रबंधित करने तक सीमित हो गया है। एक इंजीनियर ने इस स्थिति की तुलना बच्चों की देखभाल यानी बेबीसिटिंग से करते हुए कहा कि जब आप बच्चों की देखभाल करते हैं, तो हर बच्चा अपनी शिकायत लेकर आता है और सबकी मांग आपके ध्यान पर समान रूप से होती है, ठीक वैसे ही ये मॉडल्स भी करते हैं।
वास्तव में, रिपोर्ट इस बात की ओर इशारा करती है कि मानवीय ध्यान और निर्णय क्षमता अब उत्पादकता के रास्ते में एक बड़ी रुकावट बनते जा रहे हैं। इसका कारण यह है कि क्लाउड द्वारा पाठ्य सामग्री का एक ऐसा अंबार तैयार किया जाता है जिसे पढ़ने और व्यवस्थित करने की जरूरत होती है।
अधिक कोडिंग और बढ़ती बैठकों का दौर
इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है कि रिपोर्ट यह तर्क देती है कि तकनीक को अपनाने से संगठन की कार्यकुशलता बेहतर हुई है। कैलेंडर के आंकड़ों से यह बात सामने आई है कि एक साल पहले की तुलना में प्रति कर्मचारी मीटिंग का समय 20 प्रतिशत तक बढ़ गया है, जबकि तकनीकी योगदानकर्ताओं के मामले में इसमें 16 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। कंपनी इसके पीछे मुख्य वजह मानवीय भरोसे और जवाबदेही को मानती है। कर्मचारियों ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि आमने-सामने बैठकर आपसी तालमेल बिठाना बेहद जरूरी है, जिसके बिना काम नहीं चल सकता है। हालांकि कंपनी ने यह स्वीकार भी किया है कि अधिक कोडिंग का मतलब यह नहीं है कि वह हमेशा बेहतर कोडिंग हो या उसका कारोबार पर अच्छा असर पड़े, लेकिन उन्हें गुणवत्ता में गिरावट के कोई संकेत नहीं मिले हैं। आप एक रिपोर्ट के जरिए इसके विस्तृत विवरण को देख सकते हैं।



















