हॉलीवुड में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग को लेकर बहस लगातार जारी है। इस बीच अभिनेता और निर्देशक मार्क वाह्लबर्ग ने कहा है कि अगर तकनीक का सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए, तो यह फिल्म इंडस्ट्री के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।
पेट रोज़ की बायोपिक में एआई का उपयोग
मार्क वाह्लबर्ग अपनी आगामी फिल्म में मुख्य भूमिका निभाने जा रहे हैं, जो दिवंगत बेसबॉल खिलाड़ी पेट रोज़ के जीवन पर आधारित एक बायोपिक है। अभिनेता ने बताया कि वह इस प्रोजेक्ट के कुछ हिस्सों को बेहतर बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा ले सकते हैं। यह एक काफी महंगी फिल्म है और इसके स्टेडियम के दृश्यों को और अधिक भव्य तथा सजीव बनाने के लिए इस तकनीक के इस्तेमाल पर चर्चा की जा रही है।
मार्क वाह्लबर्ग का यह भी कहना है कि केवल चैटजीपीटी में कोई आइडिया डालकर उससे स्क्रिप्ट तैयार करवा लेना और असली कलाकारों के बिना फिल्म बना देना सही नहीं है। उनका मानना है कि तकनीक का इस्तेमाल मूल काम को निखारने और बेहतर बनाने के लिए किया जाना चाहिए, जिसके वह पूरी तरह समर्थन में हैं।
कहानी को प्राथमिकता और वीएफएक्स का दौर
सिनेमा जगत में तकनीक और कहानी के संतुलन पर बात करते हुए मार्क वाह्लबर्ग ने जोर देकर कहा कि किसी भी फिल्म के केंद्र में उसकी मूल कहानी ही होनी चाहिए। उन्होंने अपने करियर के शुरुआती दौर को याद करते हुए बताया कि उन्होंने कई बड़े बजट की और विजुअल इफेक्ट्स पर आधारित फिल्मों में काम किया है। जब जुरासिक पार्क रिलीज हुई थी या परफेक्ट स्टॉर्म फिल्म आई थी, तब वह उस दौर का हिस्सा रहे थे जब कंप्यूटर जनित इमेजरी तकनीक में क्रांतिकारी बदलाव आ रहे थे।
हालांकि वर्तमान समय में केवल स्पेशल इफेक्ट्स के दम पर फिल्में बनाना काफी कठिन हो गया है। इसलिए अब उनका झुकाव केवल दिखावटी इफेक्ट्स वाली फिल्मों की बजाय मजबूत और वास्तविक कहानी कहने की कला की तरफ ज्यादा है।
डिजिटल क्लोनिंग और भविष्य की संभावनाएं
जब मार्क वाह्लबर्ग से पूछा गया कि क्या उन्होंने कभी CAA Vault का दौरा किया है, जो क्रिएटिव आर्टिस्ट्स एजेंसी की एक ऐसी सुविधा है जहां अभिनेता अपनी स्कैनिंग तकनीक के जरिए चेहरे, शरीर और आवाज के डिजिटल क्लोन बनवा सकते हैं, तो उन्होंने बताया कि उन्होंने अभी तक इसका दौरा नहीं किया है। हालांकि, वह इस विचार के प्रति पूरी तरह खुले हुए हैं और उन्हें इसमें कोई आपत्ति नहीं है।
उनका मानना है कि भविष्य में अगर ऐसा दौर आता है, तो यह दिलचस्प होगा कि उनके बच्चे या पोते-पोती उनकी डिजिटल छवि और रूप-रंग के संरक्षक बन सकें और उम्मीद है कि वे उन्हें किसी अच्छी फिल्म का हिस्सा बना पाएंगे। यह देखना वाकई दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में तकनीक किस दिशा में आगे बढ़ती है।
मार्क वाह्लबर्ग ने यहां तक कहा कि अगर उनका आने वाला एनिमेटेड शो टेड उनकी उपस्थिति के बिना भी दशकों तक चलना जारी रखे और उसमें उनकी जगह एक डिजिटल एआई संस्करण का उपयोग किया जाए, तो उन्हें इस बात से कोई परेशानी नहीं होगी। यदि कोई कलाकार काम करने में सक्षम नहीं रहता या इस दुनिया में नहीं रहता है और दर्शक अभी भी उसे देखना चाहते हैं, तो इस दिशा में सोचना एक दिलचस्प विकल्प हो सकता है। उनके अनुसार लोग अपनी पसंद की सामग्री देखने के लिए भविष्य में बड़े अवसरों का लाभ उठाएंगे और यदि इसके लिए एक वास्तविक दर्शक वर्ग मौजूद है, तो दर्शकों को वही मिलना चाहिए जो वे देखना चाहते हैं।



















