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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की निगरानी के लिए वैश्विक संस्था बनाने की मांग, 34 देशों के 406 वैज्ञानिकों ने दी चेतावनीएआई
18 अक्तू॰ 2026, 4:03 am (26 मिनट पहले)· 0

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की निगरानी के लिए वैश्विक संस्था बनाने की मांग, 34 देशों के 406 वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी

दुनिया भर के 406 वैज्ञानिकों ने एक खुला पत्र जारी करके उन्नत एआई सिस्टम पर सख्त अंतरराष्ट्रीय नियंत्रण और हाई-अश्योरेंस कंटेनमेंट मानक लागू करने की अपील की है.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक के अप्रत्याशित प्रसार और उसकी बढ़ती क्षमताओं के बीच दुनिया भर के वैज्ञानिक समुदाय ने उन्नत एआई सिस्टम की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. विश्व के 34 देशों से संबंध रखने वाले 406 प्रमुख वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने एक संयुक्त खुला पत्र जारी किया है. इस पत्र के माध्यम से एक ऐसी अंतरराष्ट्रीय संस्था गठित करने की जोरदार वकालत की गई है, जिसके पास आधुनिक एआई मॉडल्स की निगरानी करने और अनिवार्य सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करने का कानूनी अधिकार हो. इस ऐतिहासिक दस्तावेज पर दस्तखत करने वालों में जेफ्री हिंटन और योशुआ बेंजियो जैसे एआई क्षेत्र के अग्रणी व शीर्ष वैज्ञानिक भी शामिल हैं.

उन्नत मॉडल्स को बाहरी नेटवर्क से अलग रखने की रणनीति

वैज्ञानिकों द्वारा जारी किए गए इस पत्र को एन ओपन लेटर ऑन एआई एंड साइबरसिक्योरिटी फ्रॉम द साइंटिफिक कम्युनिटी शीर्षक दिया गया है. इसमें साफ तौर पर रेखांकित किया गया है कि विशेष रूप से उन एआई मॉडल्स पर कड़ी निगरानी रखी जानी चाहिए जो साइबर सुरक्षा से जुड़े जटिल कार्यों को अंजाम देने की क्षमता रखते हैं. जानकारों का मानना है कि अगर इस प्रकार की शक्तिशाली प्रणालियों का गलत हाथों में इस्तेमाल हुआ, तो इससे वैश्विक स्तर पर भारी तबाही और साइबर ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है.

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शोधकर्ताओं का स्पष्ट मत है कि केवल पारंपरिक सुरक्षा इंतजामों को बेहतर बना देने भर से यह जोखिम खत्म नहीं होने वाला है. इसके समाधान के तौर पर वैज्ञानिकों ने मांग की है कि किसी भी नए और बेहद उन्नत एआई मॉडल को प्रारंभिक चरण में बाहरी नेटवर्क और इंटरनेट से पूरी तरह अलग रखा जाए. जब तक इन प्रणालियों को अलग रखकर उनकी आंतरिक क्षमताओं, सीमाओं और अप्रत्याशित जोखिमों का गहन परीक्षण न कर लिया जाए, तब तक उन्हें बाहरी दुनिया से नहीं जोड़ा जाना चाहिए.

कंपनियों के स्वैच्छिक वादों को बताया पूरी तरह नाकाफी

शोधकर्ताओं की यह वैश्विक पहल ऐसे मोड़ पर सामने आई है, जब करीब एक महीने पहले एंथ्रोपिक, ओपनएआई, गूगल, मेटा, एक्सएआई और एनवीडिया जैसी दिग्गज तकनीकी कंपनियों ने वाइट हाउस के एक अहम समझौते पर अपने हस्ताक्षर किए थे. उस समझौते के तहत इन तमाम बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने अपनी मर्जी से एआई सुरक्षा उपायों का पालन करने और जिम्मेदार विकास की प्रतिबद्धता जताई थी.

हालांकि, वैज्ञानिक समुदाय ने कॉरपोरेट जगत के इन स्वैच्छिक वचनों को सिरे से अपर्याप्त करार दिया है. वैज्ञानिकों का तर्क है कि बिना किसी कानूनी बाध्यता और स्वतंत्र जांच के केवल कंपनियों के आश्वासनों पर भरोसा नहीं किया जा सकता. यदि एआई मॉडल्स के अनुसंधान, प्रशिक्षण और सार्वजनिक रिलीज की प्रक्रिया में बुनियादी व बाध्यकारी बदलाव नहीं किए गए, तो सुरक्षा से जुड़े भयानक हादसों को रोकना असंभव हो जाएगा.

सार्वजनिक रिकॉर्ड और हाई-अश्योरेंस कंटेनमेंट की रूपरेखा

खुले पत्र में सभी संप्रभु देशों के लिए एक समान और सख्त सुरक्षा मानक तैयार करने की रूपरेखा पेश की गई है. इसके तहत एक केंद्रीय सार्वजनिक रिकॉर्ड स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है, जिसमें एआई सिस्टम से उत्पन्न होने वाली हर गंभीर सुरक्षा घटना और तकनीकी गड़बड़ी का पूरा ब्यौरा दर्ज किया जा सके. इससे दुनिया भर के नीति निर्माताओं और शोधकर्ताओं को वास्तविक खतरों को समझने में मदद मिलेगी.

इसके अलावा, सरकारों से हाई-अश्योरेंस कंटेनमेंट स्टैंडर्ड अपनाने का पुरजोर आग्रह किया गया है. यह एक ऐसा कड़ा तकनीकी ढांचा है जो उन्नत एआई सिस्टम की हर गतिविधि को एक सुरक्षित और नियंत्रित दायरे में सीमित रखने की गारंटी देता है. वैज्ञानिकों ने आगाह किया है कि नीति निर्माताओं को ऐसे सुरक्षात्मक कदम उठाने में बिल्कुल भी देरी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि तकनीक का विकास सरकारों के नियमों की तुलना में बहुत तेज रफ्तार से हो रहा है.

हालिया सुरक्षा सेंध से उपजी चिंताएं

विशेषज्ञों की यह बेचैनी हाल ही में सामने आई उन तकनीकी सुरक्षा खामियों के बाद और गहरी हो गई है, जिनसे उन्नत मॉडल्स की कमजोरी उजागर हुई थी. हगिंग फेस प्लेटफॉर्म से जुड़े एक ताजा सुरक्षा उल्लंघन का उदाहरण देते हुए वैज्ञानिकों ने आगाह किया है कि वर्तमान परीक्षण और आइसोलेशन प्रक्रियाएं काफी लचर साबित हो रही हैं. उचित और सख्त नियंत्रण के अभाव में स्वायत्त एआई एजेंट इंसानी आदेश या निगरानी के बिना भी बेहद खतरनाक कदम उठा सकते हैं, लिहाजा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रवर्तनीय कानूनों का तत्काल बनना जरूरी है.

सवाल-जवाब

वैज्ञानिकों के इस खुले पत्र पर कितने लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं?
इस पत्र पर 34 देशों के कुल 406 वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने हस्ताक्षर किए हैं, जिनमें जेफ्री हिंटन और योशुआ बेंजियो शामिल हैं.
वैज्ञानिकों की प्रमुख मांग क्या है?
वैज्ञानिक एक ऐसी अंतरराष्ट्रीय संस्था बनाने की मांग कर रहे हैं जो उन्नत एआई सिस्टम की निगरानी कर सके और बाध्यकारी सुरक्षा मानकों को लागू करा सके.
हाई-अश्योरेंस कंटेनमेंट क्या है?
यह एक कड़ा सुरक्षा ढांचा है जिसके तहत नए और शक्तिशाली एआई मॉडल्स को शुरुआती दौर में इंटरनेट और बाहरी नेटवर्क से पूरी तरह अलग रखकर जांचा जाता है.
टेक कंपनियों के पिछले समझौते को वैज्ञानिकों ने नाकाफी क्यों बताया?
वाइट हाउस में कंपनियों द्वारा किए गए वादे पूरी तरह स्वैच्छिक थे, जिनमें कोई कानूनी बाध्यता या स्वतंत्र निगरानी व्यवस्था शामिल नहीं थी.
पत्र में हालिया किस सुरक्षा घटना का उल्लेख किया गया है?
शोधकर्ताओं ने हगिंग फेस प्लेटफॉर्म से जुड़े हालिया सुरक्षा उल्लंघन का उदाहरण देते हुए मौजूदा टेस्टिंग व्यवस्था की कमजोरियों को रेखांकित किया.
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