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गूगल सर्च पर आपकी अपलोड की हर तस्वीर और आवाज अब AI ट्रेनिंग में जा सकती है, ऐसे करें यह सेटिंग बंदएआई
2 घंटे पहले· 2

गूगल सर्च पर आपकी अपलोड की हर तस्वीर और आवाज अब AI ट्रेनिंग में जा सकती है, ऐसे करें यह सेटिंग बंद

गूगल अगले कुछ महीनों में दुनियाभर में एक नई सेटिंग ला रहा है, जिसके तहत सर्च में अपलोड की गई तस्वीरें, फाइलें और आवाज की रिकॉर्डिंग उसके AI मॉडल को बेहतर बनाने में इस्तेमाल हो सकती हैं। यह विकल्प डिफॉल्ट रूप से चालू है, इसे बंद करने का तरीका जानिए।

Ravikash GuptaRavikash GuptaSenior Correspondent 6 मिनट पढ़ें AI के लिए
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अगर आप गूगल सर्च पर तस्वीरें अपलोड करते हैं, गूगल लेंस से कुछ खोजते हैं या आवाज से सर्च करते हैं, तो यह जानना आपके लिए जरूरी है। गूगल एक नई प्राइवेसी सेटिंग ला रहा है, जिसके चलते सर्च में डाली गई आपकी तस्वीरें, फाइलें और ऑडियो रिकॉर्डिंग कंपनी के AI मॉडल को ट्रेनिंग देने में इस्तेमाल हो सकती हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि यह विकल्प पहले से ही चालू मिल रहा है, यानी आपको इसे बंद करने के लिए खुद कदम उठाने होंगे।

हाल ही में गूगल की ओर से कई यूजर्स को एक ईमेल भेजा गया, जिसका विषय था, "न्यू प्राइवेसी सेटिंग्स फॉर सर्च सर्विसेज"। यह बदलाव गूगल के उस ग्लोबल रोलआउट का हिस्सा है जो अगले कुछ महीनों में लागू होगा और यह तय करेगा कि कंपनी आपकी सर्च हिस्ट्री से जुड़े डेटा को किस तरह संभालेगी।

क्या-क्या सेव किया जा रहा है

अब गूगल सिर्फ वही सेव नहीं कर रहा जो आप सर्च बॉक्स में टाइप करते हैं, बल्कि उससे कहीं ज्यादा। रिवर्स इमेज सर्च के लिए अपलोड की गई तस्वीरों से लेकर गूगल ट्रांसलेट पर आपकी बोली गई आवाज तक, यह सारा मीडिया आपके अकाउंट में रखा जा सकता है और कंपनी के AI मॉडल को बेहतर बनाने में लगाया जा सकता है।

सेटिंग पेज के मुताबिक, "आपके सेव किए गए मीडिया में सर्च सर्विसेज के साथ आपके इंटरैक्शन से जुड़ी तस्वीरें, फाइलें और ऑडियो व वीडियो रिकॉर्डिंग शामिल हैं। इसमें गूगल लेंस की तस्वीरें, सर्च लाइव या ट्रांसलेट की स्पीकिंग प्रैक्टिस की रिकॉर्डिंग, आपके अपलोड किए गए कंटेंट और वॉइस सर्च जैसी चीजें आती हैं।"

इसकी वजह साफ है। AI मॉडल को बेहतर बनाने के लिए सिर्फ टेक्स्ट काफी नहीं होता, उन्हें ऑडियो और वीडियो जैसे अलग-अलग तरह के इनपुट की जरूरत होती है। अगर गूगल अपने करोड़ों यूजर्स से ज्यादा डेटा और ज्यादा तरह का डेटा जुटा पाता है, तो वह अपने प्रतिद्वंद्वियों से तेजी से आगे बढ़ सकता है।

डिफॉल्ट रूप से चालू मिल रही सेटिंग

अकाउंट सेटिंग में आए इस नए विकल्प का नाम है सर्च सर्विसेज हिस्ट्री। पेज पर पहली बार जाने पर यह पहले से चालू मिला। हालांकि अगर किसी यूजर ने पहले से अपने वेब एंड ऐप एक्टिविटी और सर्च पर्सनलाइजेशन के टॉगल बंद कर रखे हैं, तो यह बंद रहेगा। इतना ही नहीं, गूगल सर्च पर अपलोड किए गए सारे मीडिया को AI ट्रेनिंग के लिए सेव करने वाला बॉक्स भी पहले से टिक मिला।

इसे बंद कैसे करें

जब यह सेटिंग आपके अकाउंट में आ जाए, तो आप गूगल के माय एक्टिविटी पेज पर जाकर सर्च सर्विसेज हिस्ट्री टैब चुनकर इससे बाहर निकल सकते हैं। यह पेज आपको साफ अंदाजा देता है कि गूगल आपकी सर्च हिस्ट्री से क्या-क्या सहेज रहा है। यहीं से आप पूरी सेटिंग बंद कर सकते हैं और अपनी एक्टिविटी डिलीट भी कर सकते हैं। अगर आप नहीं चाहते कि आपकी अपलोड की गई तस्वीरें AI ट्रेनिंग में इस्तेमाल हों, तो सेव मीडिया वाले बॉक्स से टिक हटाना बेहद जरूरी है।

देर करने से पहले कर लें यह काम

यह बदलाव अभी कर लेना ही समझदारी है, बाद में नहीं। एक बार आपका मीडिया डेटा AI की भट्टी में चला गया, तो उसके बाद आपके हाथ में ज्यादा कुछ नहीं बचता। यह फीचर बंद करने पर एक पॉप-अप दिखता है, जिसमें लिखा होता है, "अगर आपका सेव किया गया मीडिया हमारे AI मॉडल को ट्रेनिंग देने में इस्तेमाल होता है, तो वह आपके गूगल अकाउंट से अलग कर दिया जाता है। यह ट्रेनिंग डेटा 4 साल तक रखा जाएगा, भले ही आप ओरिजिनल एक्टिविटी डिलीट कर दें।" यानी आपकी मामूली सी इमेज सर्च अपलोड भी इतने लंबे समय तक डिजिटल दुनिया में तैरती रहेगी।

गूगल के प्रवक्ता डेविस थॉम्पसन ने ईमेल पर कहा, "ये नई सेटिंग्स यूजर्स को ज्यादा प्रासंगिक नतीजे पाने और अपनी सर्च, जिनमें विजुअल और वॉइस सर्च भी शामिल हैं, दोबारा देखने में मदद करती हैं, और इन्हें कभी भी चालू या बंद किया जा सकता है।" हालांकि इस सवाल का उन्होंने जवाब नहीं दिया कि यह फीचर डिफॉल्ट रूप से चालू क्यों है।

दूसरों से अलग क्यों है गूगल की स्थिति

गूगल का विशाल यूजर बेस उसकी कई सेवाओं में फैला हुआ है, जो डेटा जुटाने में उसे बढ़त देता है। इलेक्ट्रॉनिक फ्रंटियर फाउंडेशन में सीनियर सिक्योरिटी और प्राइवेसी एक्टिविस्ट थोरिन क्लोसोव्स्की कहते हैं, "इस मामले में गूगल बाकी कई कंपनियों के मुकाबले बिल्कुल अलग जगह पर खड़ा है। क्योंकि वह इतनी सारी सेवाएं देता है, जिन्हें लोग बहुत लंबे समय से इस्तेमाल कर रहे हैं और जितना डेटा इकट्ठा होता है, उसे लेकर वे काफी सहज और बेपरवाह हो चुके हैं।" रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले ऐप्स में एक तरह की जड़ता आ जाती है, इसलिए यूजर्स को कोई बदलाव पसंद न आए, फिर भी वे आसानी से किसी दूसरे विकल्प की ओर नहीं जाते।

AI ट्रेनिंग से बाहर निकलने के लिए यूजर को खुद कदम उठाना अब लगभग हर साइट और प्लेटफॉर्म का चलन बन गया है, जबकि ऐसा होना जरूरी नहीं है। क्लोसोव्स्की कहते हैं, "मेरा मानना है कि 'ऑप्ट इन' तो इन कंपनियों से सबसे न्यूनतम मांग है। अपने यूजर्स से यह कहना कि वे सोच-समझकर खुद इन फीचर्स को चालू करें, यही कम से कम वे कर सकती हैं।" उनका कहना है कि अगर ये फीचर्स अपने-आप चालू न होते, तो गूगल को यूजर्स के सामने यह मजबूत दलील रखनी पड़ती कि आखिर ये क्यों फायदेमंद हैं।

ईमेल में फायदे गिनाए, ट्रेनिंग पर चुप्पी

23 जून को भेजे गए गूगल के ईमेल में पहले ही वाक्य में इस बदलाव को इस तरह पेश किया गया कि यह यूजर को "सेव की गई हिस्ट्री पर और भी ज्यादा कंट्रोल" देगा। इसके बाद संदेश में उदाहरण देकर बताया गया कि यह मीडिया सेव करना कैसे काम आ सकता है। जैसे, "उदाहरण के लिए, इससे आप लेंस के साथ की गई अपनी पुरानी विजुअल सर्च दोबारा देख सकते हैं या किसी सुने हुए गाने को लेकर सर्च लाइव की बातचीत आगे बढ़ा सकते हैं।" इसके उलट गौर करने वाली बात यह है कि ईमेल के आखिर में जब यह बताया गया कि यही सेव किया गया मीडिया AI मॉडल की ट्रेनिंग में इस्तेमाल होगा, तो वैसे कोई उदाहरण नहीं दिए गए। संदेश बस अगली जानकारी पर बढ़ गया।

यूजर्स पर बढ़ता बोझ

यह एक और बड़ा सॉफ्टवेयर बदलाव है, जिसे आम यूजर्स के लिए ठहरकर समझने की जरूरत है। कंज्यूमर फेडरेशन ऑफ अमेरिका में AI और प्राइवेसी के निदेशक बेन विंटर्स कहते हैं, "इससे उपभोक्ता के सामने हिसाब-किताब की एक और परत खड़ी हो जाती है कि जिस टूल को वह लंबे समय से इस्तेमाल कर रहा है, उसे आगे इस्तेमाल करने में वह सहज महसूस करता है या नहीं।"

विंटर्स इस बदलाव को ऐसे देखते हैं कि AI ट्रेनिंग से बचने की पूरी जिम्मेदारी यूजर्स पर डाल दी गई है, जिससे लोगों में थकान बढ़ रही है और यह कहीं न कहीं हताशा की हद तक पहुंच रही है। वे कहते हैं, "अपने डेटा को बचाने की कोशिश करने को लेकर भी असहायता और निराशा का एहसास लगातार बढ़ रहा है, क्योंकि आपकी हर छोटी से छोटी चीज निचोड़ ली जाने वाली है।"

इसका आप पर असर

  • आपके लिए: गूगल सर्च पर अपलोड की गई आपकी तस्वीरें, फाइलें और वॉइस रिकॉर्डिंग डिफॉल्ट रूप से AI ट्रेनिंग में जा सकती हैं, इसलिए माय एक्टिविटी में जाकर सर्च सर्विसेज हिस्ट्री और सेव मीडिया बॉक्स को खुद बंद करना जरूरी है।
  • ध्यान रखें: एक बार डेटा ट्रेनिंग में चला गया तो वह 4 साल तक रखा जा सकता है, भले ही आप ओरिजिनल एक्टिविटी डिलीट कर दें, इसलिए यह सेटिंग जल्द बदल लेना बेहतर है।

सवाल-जवाब

गूगल की यह नई सेटिंग क्या करती है?
यह गूगल सर्च में अपलोड की गई आपकी तस्वीरों, फाइलों और ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को आपके अकाउंट में सेव करती है और इन्हें गूगल के AI मॉडल को ट्रेनिंग देने में इस्तेमाल कर सकती है।
इस सेटिंग का नाम क्या है और इसे कहां से बंद करें?
इसका नाम सर्च सर्विसेज हिस्ट्री है। इसे गूगल के माय एक्टिविटी पेज पर सर्च सर्विसेज हिस्ट्री टैब में जाकर बंद किया जा सकता है।
क्या यह सेटिंग पहले से चालू है?
हां, पेज पर पहली बार जाने पर यह पहले से चालू मिली और मीडिया सेव करने वाला बॉक्स भी पहले से टिक था। अगर किसी ने पहले से वेब एंड ऐप एक्टिविटी और सर्च पर्सनलाइजेशन बंद कर रखे हैं तो यह बंद रहेगी।
मेरी तस्वीरें AI ट्रेनिंग में जाने से कैसे रोकूं?
सेव मीडिया वाले बॉक्स से टिक हटाना जरूरी है, तभी आपकी अपलोड की गई इमेज AI ट्रेनिंग में इस्तेमाल नहीं होंगी।
अगर मेरा मीडिया ट्रेनिंग में इस्तेमाल हो गया तो वह कितने समय तक रखा जाएगा?
गूगल के मुताबिक ऐसा ट्रेनिंग डेटा आपके अकाउंट से अलग कर दिया जाता है और 4 साल तक रखा जा सकता है, भले ही आप ओरिजिनल एक्टिविटी डिलीट कर दें।
इस मीडिया में क्या-क्या शामिल होता है?
इसमें गूगल लेंस की तस्वीरें, सर्च लाइव या ट्रांसलेट की स्पीकिंग प्रैक्टिस की रिकॉर्डिंग, आपका अपलोड किया कंटेंट और वॉइस सर्च शामिल हैं।
यह बदलाव कब लागू हो रहा है?
यह गूगल का ग्लोबल रोलआउट है जो अगले कुछ महीनों में लागू होगा। संबंधित ईमेल यूजर्स को 23 जून को भेजा गया।
#एआई#गूगलसर्च#AIट्रेनिंग#प्राइवेसीसेटिंग#सर्चसर्विसेजहिस्ट्री#डेटासुरक्षा#गूगललेंस#ऑप्टआउट

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