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13 अरब डॉलर का अमेरिकी युद्धपोत, फिर भी F-35C नहीं उड़ा सकता USS जेराल्ड फोर्डअमेरिका
16 जून 2026, 2:23 pm (89 दिन पहले)· 3

13 अरब डॉलर का अमेरिकी युद्धपोत, फिर भी F-35C नहीं उड़ा सकता USS जेराल्ड फोर्ड

दुनिया के सबसे महंगे युद्धपोत USS जेराल्ड R. Ford को जिस स्टील्थ फाइटर F-35C लाइटनिंग II के लिए बनाया गया था, वही जेट यह अब तक नहीं उड़ा पा रहा, क्योंकि इंजन की भीषण गर्मी जहाज के डेक को नुकसान पहुंचा सकती है।

अमेरिका का सबसे महंगा युद्धपोत USS जेराल्ड R. Ford इस समय एक अजीब विरोधाभास का सामना कर रहा है। करीब 13 अरब डॉलर की लागत वाला यह जहाज दुनिया का सबसे आधुनिक और सबसे महंगा युद्धपोत माना जाता है, लेकिन जिस अत्याधुनिक स्टील्थ फाइटर के इर्द गिर्द इसे डिजाइन किया गया था, उसी को यह अब तक अपने डेक से उड़ा नहीं पा रहा। अमेरिका के स्टील्थ लड़ाकू विमान F-35C लाइटनिंग II को यह जहाज आज तक ऑपरेट नहीं कर सका है। हैरानी की बात यह है कि अगर मौजूदा हालत में इस जेट को इससे उड़ाया गया, तो जहाज के डेक पर ही छेद होने तक का खतरा बताया जा रहा है।

जिस जेट के लिए बना, उसी के बिना लड़ना पड़ा

सबसे बड़ी विडंबना यही है कि फोर्ड को भविष्य की युद्ध जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ठीक इसी F-35C के लिए तैयार किया गया था। मगर हकीकत यह रही कि असल युद्ध जैसी परिस्थितियों में भी जेराल्ड फोर्ड को पुराने F/A-18 सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमानों के भरोसे ही काम चलाना पड़ा। यानी जिस ताकत के लिए इतना पैसा खर्च हुआ, वह ताकत मोर्चे पर मौजूद ही नहीं थी।

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326 दिन की तैनाती और लगातार मुसीबतें

हाल के दिनों में यह युद्धपोत लगातार सुर्खियों और विवादों में रहा है। पहले इसकी तैनाती वेनेजुएला के पास हुई और फिर ईरान के नजदीक। इस दौरान कभी इसके टॉयलेट बंद होने की खबरें आईं तो कभी जहाज पर आग लगने की। महीनों तक समंदर में रहकर इस पर तैनात सैनिक भी थक और परेशान हो चुके थे। आखिरकार 326 दिनों की लंबी तैनाती के बाद यह वापस अमेरिका लौटा है। माना जा रहा है कि वियतनाम युद्ध के बाद किसी एयरक्राफ्ट कैरियर की यह अब तक की सबसे लंबी तैनाती है। इतने बड़े अभियानों और कई बड़े ऑपरेशनों के बावजूद यह F-35 फाइटर जेट उड़ाने लायक नहीं बन सका। अब इसे व्यापक मरम्मत और अपग्रेड के लिए शिपयार्ड भेज दिया गया है, जहां इसके कम से कम एक साल तक रहने की उम्मीद है।

आखिर दिक्कत कहां है? जवाब है भीषण गर्मी

इस पूरी समस्या की जड़ में है इंजन से निकलने वाली बेतहाशा गर्मी। F-35C का इंजन करीब 3600 डिग्री फारेनहाइट तक का तापमान पैदा करता है। यह फोर्ड पर अब तक इस्तेमाल हो रहे सुपर हॉर्नेट विमानों की तुलना में कहीं ज्यादा है। जहाज के डेक पर लगे जेट ब्लास्ट डिफलेक्टर्स और उसके आसपास की सतहें इतनी ऊंची गर्मी को बार बार झेलने के लिहाज से नहीं बनी हैं। अमेरिकी नौसेना को आशंका है कि अगर मौजूदा स्थिति में लगातार F-35C उड़ाया गया, तो डेक को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।

सिर्फ डेक नहीं, पूरी देखभाल व्यवस्था अधूरी

दिक्कत सिर्फ रनवे या डेक तक सीमित नहीं है। F-35C एक स्टील्थ विमान है और इसकी देखभाल के लिए खास इंतजाम चाहिए होते हैं। इसमें स्टील्थ कोटिंग की मरम्मत के लिए विशेष वर्कशॉप, इसके संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के लिए सुरक्षित कमरे और ODIN नाम का डिजिटल डायग्नोस्टिक नेटवर्क शामिल हैं। फोर्ड पर इनमें से कई सुविधाएं अभी पूरी तरह मौजूद ही नहीं हैं, जिसके कारण इस जेट को संभालना और भी मुश्किल हो जाता है।

असली चूक 20 साल पहले हुई थी

असली गलती समय के तालमेल में हुई। फोर्ड का डिजाइन साल 2005 के आसपास तय कर दिया गया था, जबकि उस वक्त तक F-35C के अंतिम तकनीकी मानक तय ही नहीं हुए थे। यानी पहले जहाज का खाका बना और विमान बाद में आकार ले रहा था। जब तक F-35C की असली जरूरतें सामने आईं, तब तक फोर्ड का निर्माण काफी आगे निकल चुका था। नतीजा यह हुआ कि दोनों प्लेटफॉर्म एक दूसरे के साथ पूरी तरह तालमेल नहीं बैठा पाए, और दुनिया का सबसे महंगा युद्धपोत अपने सबसे अहम हथियार से अब तक महरूम है।

सवाल-जवाब

USS जेराल्ड फोर्ड F-35C क्यों नहीं उड़ा सकता?
F-35C का इंजन करीब 3600 डिग्री फारेनहाइट तक गर्मी पैदा करता है, जिसे जहाज के डेक और जेट ब्लास्ट डिफलेक्टर्स बार बार झेलने के लिए नहीं बने हैं और इससे डेक को नुकसान हो सकता है।
यह युद्धपोत कितने समय तक तैनात रहा?
जेराल्ड फोर्ड 326 दिनों की तैनाती के बाद अमेरिका लौटा है, जिसे वियतनाम युद्ध के बाद किसी एयरक्राफ्ट कैरियर की सबसे लंबी तैनाती माना जा रहा है।
इस जहाज की कीमत कितनी है?
USS जेराल्ड फोर्ड की कीमत करीब 13 अरब डॉलर है, जो इसे दुनिया का सबसे महंगा युद्धपोत बनाती है।
समस्या की असली वजह क्या मानी जा रही है?
फोर्ड का डिजाइन 2005 के आसपास तय हुआ था, जब F-35C के अंतिम तकनीकी मानक तय नहीं हुए थे, जिससे दोनों प्लेटफॉर्म में पूरा तालमेल नहीं बैठ पाया।
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