अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में रूस के खिलाफ प्रतिबंधों से जुड़ा एक अहम बिल पास कर दिया गया है। इस विधायी कदम के बाद भारत समेत कुल 9 देशों पर आयात शुल्क में भारी बढ़ोतरी का खतरा उत्पन्न हो गया है। इस नए घटनाक्रम के तहत प्रभावित देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का रास्ता साफ होता दिखाई दे रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
रूसी तेल और व्यापार पर अमेरिकी शिकंजा
यह पूरा मामला रूस के साथ ऊर्जा व्यापार और आर्थिक लेन-देन पर लगाम कसने के प्रयासों से जुड़ा हुआ है। अमेरिका की ओर से रूस पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है ताकि उसकी अर्थव्यवस्था को कमजोर किया जा सके। इसी रणनीति के तहत अमेरिकी संसद में रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले इस नए बिल को आगे बढ़ाया गया है, जिसका असर उन तमाम देशों पर पड़ सकता है जो मॉस्को के साथ तेल और अन्य उत्पादों का व्यापार जारी रखे हुए हैं।
भारत समेत 9 देशों पर असर की आशंका
पारित किए गए इस बिल के दायरे में भारत के अलावा कई अन्य प्रमुख देश भी शामिल हैं। जानकारों के अनुसार यदि यह प्रावधान पूरी तरह से लागू होते हैं, तो इन देशों से आने वाले सामानों या प्रभावित क्षेत्रों पर भारी-भरकम टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, अलग-अलग मंचों पर यह भी चर्चाएं सामने आती रही हैं कि कूटनीतिक वार्ताओं के जरिए ऊर्जा जरूरतों और समझौतों को ध्यान में रखते हुए कुछ देशों को इसमें राहत भी मिल सकती है, लेकिन फिलहाल अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार और कूटनीतिक हलचल
रूस पर प्रतिबंधों के इस नए दौर और संभावित 100 फीसदी टैरिफ की खबरों ने वैश्विक राजनीति और बाजार को गरमा दिया है। ब्रिक्स देशों और अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ अमेरिका के संबंधों पर भी इसका असर पड़ सकता है। भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और स्वतंत्र विदेश नीति के तहत विभिन्न स्रोतों से तेल आयात कर रहा है, ऐसे में अमेरिकी संसद के इस फैसले पर कूटनीतिक स्तर पर बारीकी से नजर रखी जा रही है।



















