अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक सोशल मीडिया बयान ने सोमवार को दुनिया भर के कूटनीतिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी। उन्होंने ब्राजील में संपन्न हुए राष्ट्रपति चुनाव के पहले दौर के मतदान पर टिप्पणी करने के दौरान एक बड़ा दावा किया, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया को गलती से भारत का राष्ट्रपति चुनाव बता दिया। ट्रंप ने अपनी पोस्ट में लिखा कि भारत में पहले चरण में 12.5 करोड़ मतदाताओं ने हिस्सा लिया और उसी दिन मतगणना पूरी कर नतीजे भी जारी कर दिए गए। भौगोलिक और लोकतांत्रिक व्यवस्था की इतनी बड़ी चूक सामने आते ही सोशल मीडिया मंचों पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
अमेरिकी चुनाव व्यवस्था पर सवाल और व्हाइट हाउस का रुख
ट्रंप ने अपने इस बयान का इस्तेमाल अमेरिकी चुनाव प्रणाली की आलोचना करने के लिए किया। उन्होंने इस कथित चुनावी प्रक्रिया की तुलना संयुक्त राज्य अमेरिका की मतदान व्यवस्था से की और पूछा कि अमेरिका में मतगणना और नतीजे घोषित करने में इतना लंबा समय क्यों लग जाता है। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिकी चुनाव तंत्र में कथित अनियमितताओं का आरोप भी दोहराया। इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू तब सामने आया जब व्हाइट हाउस के आधिकारिक 'रैपिड रिस्पॉन्स' हैंडल ने भी इस गलत जानकारी वाली पोस्ट को बिना किसी जांच के दोबारा साझा कर दिया। इसके बाद इंटरनेट उपयोगकर्ताओं ने तेजी से प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें अपने तथ्य तुरंत सुधारने की नसीहत दी।
ब्राजील के चुनावी आंकड़े और दूसरे दौर की जंग
असल में यह मतदान ब्राजील में राष्ट्रपति पद की दौड़ के लिए आयोजित किया गया था। मतगणना के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, लगभग 98.81 प्रतिशत मतों की गिनती पूरी होने तक दक्षिणपंथी उम्मीदवार फ्लावियो बोल्सोनारो ने 47.24 प्रतिशत वोट हासिल किए। वहीं उनके प्रतिद्वंद्वी और मौजूदा राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा को 44.91 प्रतिशत मत प्राप्त हुए। चूंकि पहले दौर में किसी भी प्रत्याशी को सीधे जीत दर्ज करने के लिए जरूरी 50 प्रतिशत से अधिक मत नहीं मिल सके, इसलिए अब दोनों शीर्ष दावेदारों के बीच 25 अक्टूबर को दूसरे चरण का कड़ा मुकाबला तय किया गया है।
फ्लावियो बोल्सोनारो पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे हैं और उनके इस मजबूत प्रदर्शन ने ब्राजील की राजनीति में दक्षिणपंथी ताकतों की गहरी पकड़ को फिर से उजागर कर दिया है। दूसरी तरफ मौजूदा राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा अब उन मतदाताओं का समर्थन जुटाने में लग गए हैं, जिन्होंने पहले चरण में बाहर हो चुके अन्य उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान किया था। दक्षिण अमेरिकी देश की सत्ता के लिए यह बेहद निर्णायक चुनावी जंग मानी जा रही है।
नामों और तथ्यों को लेकर पहले भी हुई हैं चूक
इस अहम राजनीतिक पृष्ठभूमि के बीच 12.5 करोड़ यानी 125 मिलियन मतों वाली पोस्ट ने वैश्विक स्तर पर भारी सुर्खियां बटोरीं, क्योंकि दो विशाल लोकतांत्रिक देशों के बीच अंतर न कर पाना कोई सामान्य भूल नहीं थी। इतिहास गवाह है कि ट्रंप पहले भी कई सार्वजनिक अवसरों पर बड़े राजनेताओं के नामों और पहचान को लेकर भ्रमित हो चुके हैं। वह पहले डेमोक्रेटिक नेता जो बाइडेन के स्थान पर पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा का नाम ले चुके हैं। इसके अतिरिक्त रिपब्लिकन नेता निक्की हेली के संदर्भ में बात करते हुए वह डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता नैन्सी पेलोसी का नाम लेकर भी चर्चा में आ चुके हैं।


















