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घातक गोलीबारी और नागरिक अधिकारों के उल्लंघन पर विवाद के बावजूद आई.सी.ई. की सख्त कार्रवाई पर अडिग है डोनाल्ड ट्रंप का मुख्य आधारअमेरिका
30 जुल॰ 2026, 3:11 am (1 घंटे पहले)· 1

घातक गोलीबारी और नागरिक अधिकारों के उल्लंघन पर विवाद के बावजूद आई.सी.ई. की सख्त कार्रवाई पर अडिग है डोनाल्ड ट्रंप का मुख्य आधार

अमेरिका में आप्रवासन नियंत्रण एजेंसी आई.सी.ई. की हालिया हिंसक घटनाओं और दो मौतों के बाद भी रिपब्लिकन समर्थक निर्वासन की गति बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। हालिया सर्वेक्षणों के अनुसार, आम जनता में नाराजगी के बीच भी ट्रम्प समर्थकों का भरोसा इस एजेंसी पर बना हुआ है।

संयुक्त राज्य अमेरिका में इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट यानी आई.सी.ई. की हालिया कार्यशैली, वाहनों में गोलीबारी की हिंसक घटनाओं और आम नागरिकों के अधिकारों के उल्लंघन की खबरों के बावजूद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थक इस एजेंसी के सख्त रुख का पूरा समर्थन कर रहे हैं। हालिया हफ्तों में एजेंसी के अधिकारियों द्वारा की गई घातक गोलीबारी और हिरासत केंद्रों में निगरानी को लेकर सवाल उठने के बाद भी रिपब्लिकन पार्टी के समर्थक और कट्टरपंथी दक्षिणपंथी विचारक निर्वासन की गति को और तेज करने पर जोर दे रहे हैं। विभिन्न सर्वेक्षण आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि जहां देश की अधिकांश आबादी इस बल प्रयोग पर चिंता जता रही है, वहीं ट्रम्प के राजनीतिक आधार में इस कार्रवाई को लेकर अटूट समर्थन बना हुआ है।

दक्षिणपंथी विचारकों और सहयोगियों का आक्रामक रुख

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लंबे समय से सहयोगी रहे स्टीव बैनन ने अपने वार रूम पॉडकास्ट के दौरान देश में अस्थायी संरक्षित स्थिति यानी टीपीएस की समाप्ति के बाद भी विदेशी नागरिकों के मौजूद रहने पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पात्रता समाप्त हो चुकी थी, तो हैती के नागरिकों को तुरंत बसों या उड़ानों से वापस क्यों नहीं भेजा गया। स्टीव बैनन ने सार्वजनिक रूप से पूछा, "Why are they not out of the country?" उनके इस रुख का समर्थन करते हुए रूढ़िवादी रणनीतिकार माइक डेविस ने कहा, "The solution is to get these people the hell out of our country as fast as possible, and that includes these Haitians."

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इसी तरह, राष्ट्रपति की निर्वासन नीतियों को पर्याप्त रूप से सख्त न मानने वाले श्वेत राष्ट्रवादी निक फ़्यूएंट्स ने भी अपने रूम्बल शो पर हैती के नागरिकों को लेकर अत्यधिक विवादित टिप्पणी की। वहीं कोलंबस के प्राउड बॉयज़ से जुड़े टेलीग्राम चैनल पर सदस्यों ने टीपीएस रद्द होने की खबर के साथ गाने की क्लिप साझा करते हुए लिखा कि इन लोगों को वापस जाना ही होगा। ये टिप्पणियां दर्शाती हैं कि समर्थक वर्ग में निर्वासन की धीमी रफ्तार को लेकर असंतोष है और वे और अधिक आक्रामक कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं।

नेतृत्व परिवर्तन और एजेंसी के परिचालन में बदलाव

पूर्व में आई.सी.ई. द्वारा मिनियापोलिस और शिकागो जैसे बड़े शहरों में चलाए गए अभियानों ने राष्ट्रीय स्तर पर काफी ध्यान आकर्षित किया था। उस दौरान पूर्व सीमा गश्त प्रमुख ग्रेग बोविनो जैसे अधिकारियों का दबदबा था। हालांकि, होमलैंड सिक्योरिटी विभाग की पूर्व सचिव क्रिस्टी नोएम के स्थान पर मार्कवेन मुलिन को जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद से एजेंसी के अभियानों की सार्वजनिक दृश्यता में कुछ बदलाव आया है। स्टीव बैनन ने मार्कवेन मुलिन को व्यंग्यात्मक रूप से कुंग फू प्लंबर कहकर संबोधित किया था। भले ही अभियानों की शैली पहले से अधिक गुप्त हो गई हो, लेकिन एजेंसी द्वारा की जाने वाली गिरफ्तारियों और निर्वासन के कुल आंकड़े अभी भी अत्यंत उच्च स्तर पर बने हुए हैं।

घातक घटनाएं और विवादित कार्यप्रणाली

हाल के हफ्तों में कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं जिन्होंने एजेंसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस महीने की शुरुआत में टेक्सस के शहर ह्यूस्टन में आई.सी.ई. के एक एजेंट ने लोरेन्ज़ो साल्गाडो अराउजो को गोली मार दी, जिससे उनकी मौत हो गई। अराउजो 35 वर्षों से अमेरिका में रह रहे थे, उनके 3 बच्चे हैं और वे अपना स्वयं का व्यवसाय चलाते थे। इसके कुछ ही दिनों बाद, मेन राज्य के बिडफ़ोर्ड में एक अन्य एजेंट की गोलीबारी में जोहान सेबेस्टियन ड्यूरान ग्युरेरो की जान चली गई। ये दोनों घटनाएं उस समय हुईं जब पीड़ित अपने वाहनों में मौजूद थे।

इसके अलावा, डिजिटल क्षेत्र में भी निगरानी की गंभीर चिंताएं उभरी हैं। यह बात सामने आई है कि एजेंसी अपने आलोचकों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रख रही है, डेटा दलालों की मदद से बिना अभिभावक वाले नाबालिगों की पहचान कर रही है और अपने हिरासत केंद्रों के निरीक्षण से राज्य के स्वास्थ्य निरीक्षकों को रोकने का प्रयास कर रही है। साथ ही, हवाई अड्डों पर भी उन प्रवासियों को निशाना बनाया जा रहा है जिनके वीजा की अवधि समाप्त हो चुकी है या जो परिवर्तनकालीन स्थिति में हैं, जिनमें अमेरिकी नागरिकों के पति या पत्नी भी शामिल हैं।

सर्वेक्षण के आंकड़े और समर्थकों का अटूट विश्वास

विवादों के बावजूद रिपब्लिकन पार्टी के मतदाताओं के बीच आई.सी.ई. को मजबूत समर्थन प्राप्त है। यूगोव द्वारा पिछले सप्ताह जारी किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, खुद को मागा रिपब्लिकन मानने वाले 74 प्रतिशत लोग इस एजेंसी में पूरा विश्वास जताते हैं। इसके अतिरिक्त, 80 प्रतिशत मागा रिपब्लिकन आई.सी.ई. को समाप्त करने के किसी भी प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हैं।

पब्लिक रिलिजन रिसर्च इंस्टीट्यूट के एक अन्य सर्वेक्षण में भी इसी तरह के नतीजे देखे गए। इस सर्वेक्षण के मुताबिक तीन-चौथाई रिपब्लिकन आई.सी.ई. के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं, एजेंसी के लिए अधिक बजट आवंटन का समर्थन करते हैं और इस बात से असहमत हैं कि इससे समुदाय की सुरक्षा कम होती है। सर्वेक्षण में शामिल 73 प्रतिशत रिपब्लिकन समर्थकों ने अवैध रूप से देश में मौजूद प्रवासियों को निर्वासन तक नजरबंदी शिविरों में रखने के विचार का भी समर्थन किया।

दिलचस्प तथ्य यह है कि यूगोव पोल के अनुसार, गोलीबारी की घटनाओं वाले सप्ताह के दौरान केवल 51 प्रतिशत रिपब्लिकन ने ही प्रवासियों की मौत से जुड़ी खबरों को देखा या सुना था। उसी दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने अपने समर्थकों के आक्रोश के बाद वाहनों को रोकने पर रोक लगाने वाले आंतरिक ज्ञापन को दरकिनार करने का संकेत दिया। ट्रंप ने अपनी पोस्ट में कहा कि आई.सी.ई. को "loved and respected in America" माना जाता है।

निर्वासन के लक्ष्य और नागरिक अधिकारों पर असर

प्रशासन के आक्रामक दावों के बावजूद, निर्वासन के वास्तविक आंकड़े राष्ट्रपति के शुरुआती वादों से पीछे चल रहे हैं। एजेंसी के अपने आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष 458,000 व्यक्तियों को निर्वासित करने का अनुमान है। यद्यपि यह संख्या अपने आप में बहुत बड़ी है, फिर भी यह राष्ट्रपति द्वारा पदभार संभालने के बाद वादा किए गए 10 लाख निर्वासन के लक्ष्य से काफी कम है। सीमा मामलों के प्रभारी टॉम होमन ने इस रणनीति को सार्वजनिक रूप से "deportation-maxxing" नाम दिया है।

नागरिक अधिकारों की संस्था अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया गया कि आठ राज्यों में फैले अभियानों के दौरान एजेंसी ने राष्ट्रपति के दूसरे कार्यकाल के पहले वर्ष में 155 अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाया, जिनमें 32 बच्चे भी शामिल थे। यूसी बर्कले के पिछले शोध से पता चलता है कि गिरफ्तार किए गए कुल लोगों में से आधे से अधिक का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था, जबकि प्रशासन लगातार सबसे खतरनाक अपराधियों को बाहर निकालने का दावा करता रहा है। कुल मिलाकर संघीय एजेंटों की गोलीबारी में अब तक 4 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 2 अमेरिकी नागरिक शामिल हैं।

व्यापक जनमत और राजनीतिक दांव

समर्थक वर्ग से इतर, अमेरिका की आम जनता का रुख इसके बिल्कुल विपरीत दिखाई देता है। यूगोव के आंकड़ों के अनुसार, अधिकांश अमेरिकियों का मानना है कि एजेंसी ने अत्यधिक बल प्रयोग किया है और उन्हें इस संस्था पर बहुत कम या शून्य भरोसा है। देश की लगभग आधी आबादी मानती है कि अब इस एजेंसी को पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाना चाहिए।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि जहां आम अमेरिकी नागरिक इस आप्रवासन नीति से दूरी बना रहे हैं, वहीं रिपब्लिकन पार्टी का मुख्य आधार पूरी तरह से इसके पक्ष में खड़ा है। मध्यवधि चुनावों में केवल कुछ ही महीने शेष हैं, ऐसे में रिपब्लिकन नेता इस मुद्दे पर पीछे हटने के बजाय और अधिक आक्रामक प्रचार कर रहे हैं। एनपीआर की रिपोर्ट के मुताबिक रिपब्लिकन पार्टी आप्रवासन के मुद्दे पर विज्ञापन अभियानों में डेमोक्रेट्स की तुलना में अधिक धनराशि खर्च कर रही है। आगामी नवंबर के चुनावों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि रिपब्लिकन पार्टी का यह राजनीतिक दांव कितना सफल सिद्ध होता है।

सवाल-जवाब

ट्रंप समर्थकों में आई.सी.ई. को लेकर क्या रुख है?
सर्वेक्षण के अनुसार, लगभग 74 प्रतिशत मागा रिपब्लिकन आई.सी.ई. में विश्वास जताते हैं और 80 प्रतिशत इसे समाप्त करने के प्रस्ताव का विरोध करते हैं।
इस वर्ष कितने निर्वासन का अनुमान लगाया गया है?
एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष लगभग 458,000 व्यक्तियों को निर्वासित करने का अनुमान है, जो 10 लाख के शुरुआती लक्ष्य से कम है।
हाल की हिंसक घटनाओं में किन लोगों की मौत हुई?
टेक्सस के ह्यूस्टन में लोरेन्ज़ो साल्गाडो अराउजो और मेन के बिडफ़ोर्ड में जोहान सेबेस्टियन ड्यूरान ग्युरेरो की आई.सी.ई. एजेंटों द्वारा की गई गोलीबारी में मौत हुई।
नागरिकों पर इस कार्रवाई का क्या असर पड़ा है?
एसीएलयू रिपोर्ट के अनुसार, 8 राज्यों में 155 अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाया गया, जिनमें 32 बच्चे शामिल थे। संघीय एजेंटों की गोलीबारी में 2 अमेरिकी नागरिकों की भी जान गई है।
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