महज़ 5500 रुपये लेकर मुंबई आए सोनू सूद कैसे बने पर्दे के विलेन और असल ज़िंदगी के मसीहापुलिस बल में आंतरिक बदलाव की नई पहल: ऑस्ट्रियाई मनोविज्ञान और जर्मन मॉडल से अमेरिकी पुलिसिंग सुधारने की तैयारीफेडरल रिजर्व के ब्याज दरें स्थिर रखने से बिटकॉइन पर बढ़ा दबाव, अमेरिकी डॉलर के सामने फीकी पड़ी रफ्तारद न्यूयॉर्क टाइम्स के 'पाकिस्तानी कश्मीर' प्रयोग पर भारत का कड़ा प्रहार, बताया भ्रामक और गलतदिलीप महादु गावित को गोल्ड, मोहम्मद बासिल मोर्सिंगनाकथ को सिल्वर, कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की डबल जीतयूट्यूब एक्सपर्ट के आसान टिप्स: प्रूनिंग और खास खाद से गुड़हल में आएंगे ढेरों फूलनस्लवाद के खिलाफ लड़ाई में क्षमा की भूमिका और इसके मनोवैज्ञानिक प्रभावों की पड़तालतुला दैनिक राशिफल 30 जुलाई 2026: चंद्रमा और शुक्र के प्रभाव से जानें लव लाइफ, करियर और सेहत का हालकन्या राशिफल 30 जुलाई 2026: चंद्रमा के प्रभाव से बढ़ेगी अभिव्यक्ति, जानें करियर और आर्थिक स्थिति का पूरा हालसावन 2026 की शुरुआत: जानिए शिव पूजा की पूरी विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र, भोग और आवश्यक नियम
H-1B वीजा बचाने के बदले एक लाख डॉलर की मांग, अमेरिका में भारतीय इंजीनियर ने टेक्सास की कंपनी पर ठोका मुकदमाअमेरिका
17 जून 2026, 10:14 pm (42 दिन पहले)· 5

H-1B वीजा बचाने के बदले एक लाख डॉलर की मांग, अमेरिका में भारतीय इंजीनियर ने टेक्सास की कंपनी पर ठोका मुकदमा

अमेरिका में काम कर रहे एक भारतीय कर्मचारी का आरोप है कि उसकी कंपनी और मालिक ने H-1B वीजा और नौकरी बनाए रखने के नाम पर 1 लाख डॉलर वसूलने की कोशिश की और पे-स्लिप रोककर ICE की धमकी दी।

अमेरिका में नौकरी कर रहे एक भारतीय पेशेवर ने अपनी कंपनी और उसके मालिक के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए टेक्सास की अदालत में मुकदमा दायर किया है। उसका कहना है कि H-1B कर्मचारी वीजा चालू रखने के एवज में उससे 1 लाख डॉलर देने के लिए दबाव बनाया गया। आरोप यह भी है कि अपनी नौकरी और देश में कानूनी इमिग्रेशन स्टेटस बचाने की मजबूरी का फायदा उठाया गया।

किसने, किस पर लगाए आरोप

ऋषिकेश राज मीसाला नाम के इस कर्मचारी ने अपने भारतीय-अमेरिकी मालिक साई जितेंद्र कलागरा और कंपनी के अधिकारियों पर पैसे मांगने का आरोप लगाया है। कर्मचारी का दावा है कि कंपनी ने उसकी पे-स्लिप और दूसरे जरूरी दस्तावेज अपने पास रोक रखे थे। जब उसने भुगतान का विरोध किया तो उसे अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंसी ICE को सूचित कर देने की धमकी दी गई।

ये भी पढ़ें

छात्र वीजा से H-1B तक का सफर

शिकायत में बताया गया है कि मीसाला पहले छात्र वीजा पर अमेरिका पहुंचे और साल 2023 में अपनी मास्टर डिग्री पूरी की। इसके बाद उन्हें एक ऐसी नौकरी मिली जिसने उन्हें H-1B वीजा की स्पॉन्सरशिप दी। मुकदमे का दावा है कि टेक्सास की इस कंपनी से जुड़ने के बाद उन्हें किसी प्रोजेक्ट पर काम तक नहीं दिया गया, फिर भी नौकरी और वीजा को वैध बनाए रखने के बहाने उनसे बड़ी रकम मांगी जाती रही।

दस्तावेज को बना दिया दबाव का हथियार

यह मुकदमा इमिग्रेशन लॉ फर्म बानियास लॉ ने दायर किया है। फर्म के मुताबिक यही नौकरी मीसाला के लिए ग्रीन कार्ड और आगे चलकर अमेरिकी नागरिकता तक पहुंचने का जरिया बन सकती थी, लेकिन कंपनी ने इसी कमजोरी को भुनाकर उन पर आर्थिक दबाव डाला। शिकायत में कहा गया है कि अलग से पैसे चुकाने तक कंपनी ने उनकी पे-स्लिप और पेरोल रिकॉर्ड रोके रखे। H-1B वीजा रखने वालों के लिए ये कागजात बेहद अहम होते हैं, क्योंकि इनके बिना नौकरी बदलना, वीजा रिन्यू कराना या इमिग्रेशन नियमों के पालन को साबित करना मुश्किल हो जाता है। बानियास लॉ का कहना है कि कंपनी इस बात को बखूबी जानती थी और इसीलिए दस्तावेजों को दबाव बनाने के औजार की तरह इस्तेमाल किया गया।

डर के मारे चुकाई नकद रकम

मुकदमे में बताया गया कि अपना इमिग्रेशन स्टेटस गंवाने के डर से आखिरकार मीसाला ने करीब 8800 डॉलर नकद में चुका दिए। शिकायत में कंपनी पर लेबर ट्रैफिकिंग, जबरन मजदूरी और दस्तावेजों के जरिए कर्मचारी पर दबाव बनाने के आरोप लगाए गए हैं। फर्म का दावा है कि बकाया वेतन और जबरन कराए गए भुगतान मिलाकर मीसाला को कम से कम 97,248.94 डॉलर का नुकसान हुआ।

अभी कोर्ट में साबित नहीं हुए आरोप

फिलहाल ये सभी आरोप अदालत में साबित नहीं हुए हैं और न ही साई जितेंद्र कलागरा या उनकी कंपनी की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया आई है। उम्मीद है कि मामले की सुनवाई अमेरिकी संघीय अदालत में आगे बढ़ेगी।

H-1B बहस के बीच आया मामला

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब H-1B वीजा कार्यक्रम पर बहस तेज है। यह वीजा अमेरिकी कंपनियों को विदेशी पेशेवरों को नौकरी पर रखने की इजाजत देता है। अमेरिकी सिटीजनशिप एवं इमिग्रेशन सर्विस के आंकड़ों के मुताबिक साल 2024 में जारी हुए सभी H-1B आवेदनों में भारतीयों की हिस्सेदारी 71 प्रतिशत रही। आलोचक कहते हैं कि चूंकि कर्मचारी का वीजा अक्सर उसके मालिक से जुड़ा रहता है, इसलिए वह शोषण का आसान शिकार बन सकता है। दूसरी ओर इंडस्ट्री का तर्क है कि ऐसे मामले बहुत कम होते हैं।

सवाल-जवाब

इस मामले में कर्मचारी पर कितने पैसे की मांग का आरोप है?
आरोप है कि कंपनी और उसके मालिक ने H-1B वीजा बनाए रखने के बदले कर्मचारी से 1 लाख डॉलर देने के लिए दबाव बनाया।
कर्मचारी ने आखिरकार कितनी रकम चुकाई?
अपना इमिग्रेशन स्टेटस खोने के डर से मीसाला ने करीब 8800 डॉलर नकद में चुकाए।
मुकदमे में कुल कितने नुकसान का दावा किया गया है?
बानियास लॉ का दावा है कि बकाया वेतन और जबरन भुगतान मिलाकर मीसाला को कम से कम 97,248.94 डॉलर का नुकसान हुआ।
क्या कंपनी या मालिक ने इन आरोपों पर कुछ कहा है?
नहीं, ये आरोप अभी कोर्ट में साबित नहीं हुए हैं और साई जितेंद्र कलागरा या उनकी कंपनी ने अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR