नेब्रास्का के ग्रैंड आइलैंड में आयोजित एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान डोनाल्ड ट्रंप के एक ताजा संबोधन ने कैलिफोर्निया के शीर्ष नेतृत्व और आम जनता के बीच गहरा असंतोष पैदा कर दिया है। पिनेकल बैंक एक्सपो सेंटर में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए ट्रंप अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर चल रहे तनाव और देश में महंगे होते ईंधन पर अपने विचार साझा कर रहे थे। इसी परिप्रेक्ष्य में उन्होंने कैलिफोर्निया के दो प्रमुख महानगरीय केंद्रों का उल्लेख करते हुए कुछ ऐसी बातें कहीं, जिसे आलोचक अत्यंत गैर-जिम्मेदाराना मान रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि वैश्विक स्थिरता और व्यापक राष्ट्रीय हितों के संरक्षण के संदर्भ में यदि विरोधी ताकतों द्वारा इन दो प्रमुख पश्चिमी शहरों को नुकसान भी पहुंचाया जाता है, तो वह एक नगण्य क्षति मानी जाएगी।
नेब्रास्का रैली में कही गई बातें और सामने आई प्रतिक्रिया
इस जनसभा में भाषण देते हुए ट्रंप ने पश्चिम एशिया में जारी सैन्य तनातनी और घरेलू स्तर पर ऊर्जा की बढ़ती लागत की चुनौतियों पर अपनी बात रखी। इस दौरान उन्होंने पश्चिमी तट के दो विशाल महानगरीय इलाकों की चर्चा की, जो लंबे समय से डेमोक्रेटिक पार्टी के मजबूत राजनीतिक केंद्र के रूप में पहचाने जाते हैं। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा, "ये दुनिया और हमारे देश की सुरक्षा के लिए चुकाई जाने वाली एक बहुत छोटी कीमत है।" उन्होंने आगे जोड़ा कि किसी शहर को क्षति पहुंचना पूरे परिदृश्य में बहुत बड़ा मुद्दा नहीं बनेगा और यह पूरा घटनाक्रम जल्द ही अपनी समाप्ति की ओर बढ़ जाएगा। उनके अनुसार जमीनी स्तर पर यह टकराव लगभग अंतिम चरण तक पहुंच चुका है।
इन कथनों के सार्वजनिक होते ही राजनीतिक मंचों पर तीव्र बहस छिड़ गई। रिपब्लिकन पार्टी के समर्थक इस वक्तव्य के बचाव में आगे आए हैं और उनका दावा है कि इन शब्दों को सैन्य विनाश के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए। उनके अनुसार ट्रंप का वास्तविक मंतव्य युद्ध के कारण देशवासियों पर पड़ रहे आर्थिक दबाव, महंगाई और कच्चे तेल के उछलते दामों की ओर संकेत करना था। इसके विपरीत, विपक्षी खेमे और स्वतंत्र समीक्षकों का मानना है कि ऐसे संवेदनशील शब्दों का प्रयोग सीमाओं की सुरक्षा और जनसामान्य के जीवन को अनावश्यक जोखिम में डालने का आभास कराता है। आलोचकों के मुताबिक एक सार्वजनिक मंच से किसी भी घरेलू हिस्से के नुकसान को कमतर आंकना गंभीर चिंता का विषय है।
रणनीतिक और आर्थिक नजरिए से दोनों केंद्रों की महत्ता
जनसाधारण में इस बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रिया इसलिए भी देखने को मिल रही है क्योंकि लॉस एंजिल्स और सैन डिएगो सामान्य प्रशासनिक केंद्र मात्र नहीं हैं। यह दोनों इलाके अमेरिकी अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे के प्रमुख आधार स्तंभ माने जाते हैं, जहां एक करोड़ से अधिक नागरिक निवास करते हैं। इन दोनों स्थानों की अनदेखी करना देश की संपूर्ण आर्थिक गतिशीलता को खतरे में डालने के समान आंका जा रहा है।
लॉस एंजिल्स देश का दूसरा सबसे विशाल नगरीय क्षेत्र है। इसे मात्र हॉलीवुड और मनोरंजन जगत के केंद्र के रूप में देखना इसकी संपूर्ण भूमिका को सीमित करना होगा। वास्तव में प्रशांत महासागर के रास्ते संचालित होने वाले समूचे अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए यह शहर मुख्य प्रवेश द्वार का काम करता है। यहां स्थापित बंदरगाह और माल ढुलाई का व्यापक संजाल पूरे देश की आंतरिक आपूर्ति श्रृंखला को निरंतर चलाए रखता है। इसके साथ ही वैमानिकी, आधुनिक तकनीक और वैश्विक सांस्कृतिक गतिविधियों में भी इसका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि इस क्षेत्र की गतिविधियों में तनिक भी व्यवधान उत्पन्न होता है, तो उसका सीधा असर पूरे महाद्वीप की आर्थिक व्यवस्था पर पड़ता है।
वहीं दूसरी ओर सैन डिएगो का इलाका राष्ट्रीय रक्षा और नौसैनिक शक्ति का प्रमुख केंद्र है। यहां नौसेना के सबसे वृहद और संवेदनशील रणनीतिक ठिकाने मौजूद हैं, जिनकी निगरानी में प्रशांत महासागरीय क्षेत्र के समस्त सैन्य अभियान संचालित किए जाते हैं। सामरिक महत्व के अलावा यह नगर जैव प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य विज्ञान और पड़ोसी देश मेक्सिको के साथ सीमा पार व्यापारिक आदान-प्रदान का एक बड़ा केंद्र भी है। इस तरह के अतिसंवेदनशील रक्षा केंद्रों और व्यापारिक तंत्र को किसी भी बाहरी संघर्ष के संदर्भ में मामूली लागत बताना व्यापक स्तर पर लोगों को असहज कर रहा है।
कैलिफोर्निया के निर्वाचित प्रतिनिधियों का कड़ा पलटवार
इस संबोधन का विवरण प्रसारित होते ही कैलिफोर्निया राज्य के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों और दोनों प्रभावित नगरों के महापौरों ने जोरदार आपत्ति दर्ज कराई है। नेताओं ने स्पष्ट किया कि अपने ही नागरिकों की सुरक्षा को किसी भी राजनीतिक या कूटनीतिक सौदेबाजी का हिस्सा नहीं बनाया जा सकता।
राज्य के गवर्नर गेविन न्यूसम ने डिजिटल माध्यमों पर अपनी सख्त असहमति जताते हुए शीर्ष नेतृत्व के दृष्टिकोण की तीखी आलोचना की। उनका कहना था कि विदेशी प्रतिद्वंद्वियों के संदर्भ में अपने ही करोड़ों देशवासियों के संभावित संकट को इस रूप में पेश करना किसी भी दृष्टि से तर्कसंगत नहीं ठहराया जा सकता। गवर्नर के अनुसार ऐसा दृष्टिकोण नागरिकों की सुरक्षा के प्रति संवेदनहीनता को दर्शाता है।
लॉस एंजिल्स की मेयर करेन बास ने इस मसले पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कहा कि सर्वोच्च पद पर आसीन नेतृत्व का बुनियादी कर्तव्य अपने देशवासियों और उनके निवास स्थलों का अटूट संरक्षण करना होता है। उन्होंने जोर दिया कि किसी भी स्थिति में नागरिकों के जीवन को खतरे में डालने वाली बयानबाजी को स्वीकार नहीं किया जा सकता, न ही बाहरी ताकतों के समक्ष किसी नगर को कमजोर स्थिति में दिखाया जाना चाहिए।
सैन डिएगो के मेयर टॉड ग्लोरिया ने भी इस मामले में अपना सीधा और तीखा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने स्पष्ट किया, "सैन डिएगो का कोई भी नागरिक किसी युद्ध में बलि का बकरा बनने के लिए नहीं है।" उन्होंने आगे कहा कि वहां रहने वाले लोगों का अस्तित्व अमूल्य है और उनके कल्याण को किसी भी संघर्ष में नगण्य मूल्य के रूप में नहीं देखा जा सकता। मेयर ने आग्रह किया कि इस तरह के तनावपूर्ण और आक्रामक बयानों को तत्काल प्रभाव से बंद किया जाना चाहिए ताकि नागरिकों के विश्वास को ठेस न पहुंचे।
मध्य पूर्व का तनाव और संघर्ष समाप्ति के दावों की वास्तविकता
भाषण में यह दावा भी किया गया था कि विदेशी मोर्चे पर चल रहा टकराव अब समाप्ति के कगार पर है, लेकिन जमीनी हालात इस कथन की पूर्ण पुष्टि नहीं करते। पश्चिमी एशिया में दोनों पक्षों के बीच तनाव अब भी काफी नाजुक और अनिश्चित स्थिति में बना हुआ है।
इस पूरे संघर्ष की शुरुआत लगभग सात माह पूर्व फरवरी के दौरान हुई थी, जब ईरान के ठिकानों पर सैन्य कार्रवाइयों के बाद दोनों पक्षों के बीच सीधे टकराव की स्थिति बन गई थी। इसके पश्चात जून के महीने में पाकिस्तान की मध्यस्थता से एक अस्थाई युद्धविराम की रूपरेखा तैयार की गई थी। परंतु यह व्यवस्था काफी कमजोर साबित हुई है, क्योंकि दोनों तरफ से मिसाइलों और मानवरहित ड्रोनों के जरिए छिटपुट वार-पलटवार का सिलसिला लगातार बना हुआ है। परमाणु अनुसंधान कार्यक्रमों, होर्मुज जलडमरूमध्य में ऊर्जा टैंकरों के आवागमन और कड़े प्रतिबंधों को लेकर जारी गतिरोध के बीच यह मानना जल्दबाजी होगी कि संकट पूरी तरह शांत हो चुका है। ऐसे संवेदनशील समय में घरेलू शहरों के संदर्भ में की गई किसी भी नकारात्मक टिप्पणी का असर न केवल आंतरिक राजनीति बल्कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी गहरा पड़ता है।



















