आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किए गए टेक्स्ट की पहचान सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा तकनीकी कदम उठाया गया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अनुसंधान फर्म ओपनएआई ने यूरोपीय संघ के भीतर चैटजीपीटी और कोडेक्स उपयोगकर्ताओं द्वारा तैयार की जाने वाली सामग्री में एक अदृश्य वॉटरमार्क जोड़ने की घोषणा की है। इस व्यवस्था के अमल में आने के बाद यह आसानी से पता लगाया जा सकेगा कि कोई विशेष लेख या मसौदा इंसानी दिमाग की उपज है अथवा उसे मशीन ने तैयार किया है।
यूरोपीय संघ के कड़े नियमों के तहत उठाया गया कदम
यूरोपीय संघ में लागू किए गए एआई कानून यानी ईयू एआई एक्ट के तहत एआई जनरेटेड कंटेंट के लिए नई पारदर्शिता शर्तें तय की गई हैं। इसी विनियामक ढांचे के अनुपालन में ओपनएआई ने 5 अक्टूबर 2026 को इस बदलाव की आधिकारिक घोषणा की। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि आने वाले हफ्तों के दौरान यूरोपीय संघ के पात्र चैटजीपीटी और कोडेक्स यूजर्स के खातों में यह नई वॉटरमार्किंग प्रणाली चरणबद्ध तरीके से लागू कर दी जाएगी। यूरोपीय संघ के बाहर सामान्य व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं के लिए इसे स्वतः लागू करने की फिलहाल कोई योजना घोषित नहीं की गई है, हालांकि दुनिया भर के एपीआई ग्राहक चुनिंदा मॉडल्स के लिए इस प्रणाली को अपनी मर्जी से सक्रिय करने का विकल्प चुन सकते हैं।
कैसे काम करती है टेक्स्टग्रेन तकनीक
ओपनएआई ने अपने इस नए सिस्टम को टेक्स्टग्रेन नाम दिया है। यह आम तौर पर दिखने वाले पारदर्शी या ग्राफिक वॉटरमार्क से पूरी तरह अलग है क्योंकि इसमें स्क्रीन पर या प्रिंट में कोई विशेष प्रतीक, चिन्ह, गुप्त अक्षर या फॉन्ट बदलाव नजर नहीं आता है। इसके बजाय, यह तकनीक शब्दों के चयन और वाक्य संरचना के क्रम में एक सूक्ष्म सांख्यिकीय पैटर्न का निर्माण करती है।
कंपनी ने बताया है कि इस गुप्त सांख्यिकीय पैटर्न को बाद में एक विशेष रूप से प्रशिक्षित एआई टेक्स्ट डिटेक्टर के जरिए आसानी से पहचाना जा सकता है। ओपनएआई के अनुसार, यह वॉटरमार्क किसी भी प्रकार के छिपे हुए कैरेक्टर, अदृश्य स्पेसिंग या असामान्य विराम चिह्नों का सहारा नहीं लेता है। इसके अलावा कंपनी ने यह भी आश्वस्त किया है कि इस तकनीक के जुड़ने से चैटजीपीटी के मूल प्रदर्शन या उसके उत्तरों की गुणवत्ता और स्पष्टता पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।
डिटेक्शन क्षमता और इस प्रणाली की सीमाएं
हालांकि यह तकनीक महत्वपूर्ण है, लेकिन ओपनएआई ने यह भी साफ कर दिया है कि यह कोई अचूक या त्रुटिहीन डिटेक्टर नहीं है। कंपनी के आंतरिक परीक्षणों के अनुसार, 1% फॉल्स पॉजिटिव दर के पैमाने पर मनोविज्ञान से संबंधित सामग्री में 200 टोकन के अनुच्छेदों पर इसकी पहचान सटीकता करीब 80% दर्ज की गई। वहीं, 400 टोकन के लंबे अनुच्छेदों के मामले में पहचान की दर लगभग 95% तक पहुंच जाती है।
इसके बावजूद प्रणाली में कुछ व्यावहारिक सीमाएं मौजूद हैं। छोटे आकार के टेक्स्ट, गणितीय गणनाओं या समीकरणों, अनुवादित वाक्यों तथा भारी संपादन के दौर से गुजर चुकी सामग्री में इस वॉटरमार्क का पता लगाना काफी कठिन साबित हो सकता है। यह प्रणाली यह बताने में भी असमर्थ है कि किसी अंतिम मसौदे का कितना प्रतिशत हिस्सा मनुष्य द्वारा लिखा गया है और कितना एआई द्वारा। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि डिटेक्टर किसी टेक्स्ट में वॉटरमार्क नहीं ढूंढ पाता है, तो इसका यह स्वतः अर्थ बिल्कुल नहीं निकाला जा सकता कि वह सामग्री शत-प्रतिशत किसी इंसान ने ही लिखी है। ओपनएआई वर्तमान में ऐसे डिटेक्टर टूल पर भी सक्रियता से काम कर रहा है जो उसके वॉटरमार्क की सटीक पहचान कर सके।



















