अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तकनीक की खींचतान अब वैश्विक नागरिक उड्डयन क्षेत्र के केंद्र में पहुंच चुकी है। बीजिंग ने पश्चिमी प्रभुत्व को चुनौती देने और विमानन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के बड़े लक्ष्य के साथ अपना घरेलू यात्री विमान सी919 तैयार किया था, मगर इस महत्वाकांक्षी परियोजना की सबसे अहम कड़ी अब अमेरिकी व्यापार नियमों की जद में आ गई है। इस विमान के निर्माण के लिए जरूरी पश्चिमी कल-पुर्जों और आधुनिक प्रणोदन प्रणालियों पर बीजिंग की निर्भरता अब वॉशिंगटन के लिए दबाव बनाने का सीधा जरिया बन रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की ओर से उठाए जा रहे कदमों ने चीनी उड्डयन उद्योग की इस कमजोर नस को सीधे निशाने पर ले लिया है।
चीनी सरकारी विमान निर्माता कंपनी कोमाक को दिए जाने वाले महत्वपूर्ण उपकरणों के निर्यात लाइसेंसों को सीमित करने की दिशा में कदम बढ़ाए गए हैं। बीते कुछ हफ्तों के दौरान चीन जाने वाले विमान घटकों की प्रशासनिक मंजूरी प्रक्रिया की गति धीमी कर दी गई है। इस सख्ती का मुख्य उद्देश्य चीनी निर्माता को अमेरिकी मूल के प्रमुख उपकरणों का बड़ा भंडार तैयार करने से रोकना है, ताकि आपूर्ति श्रृंखला पर अपनी रणनीतिक बढ़त बरकरार रखी जा सके। यह नीति केवल कुछ चुनिंदा पुर्जों तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों वैश्विक ताकतों के बीच महत्वपूर्ण औद्योगिक सामग्रियों और रणनीतिक आपूर्ति श्रृंखला को लेकर जारी सौदेबाजी का सीधा हिस्सा है।
सी919 की तकनीकी निर्भरता और अमेरिकी रणनीति
चीन ने सी919 को एक संकरी बॉडी वाले कम दूरी और मध्यम दूरी के आधुनिक यात्री विमान के तौर पर विकसित किया है। इसका सीधा मकसद बोइंग 737 और एयरबस ए 320 जैसे दशकों पुराने लोकप्रिय मॉडलों के वैश्विक एकाधिकार को चुनौती देना है। वाणिज्यिक उड़ानों के लिहाज से इस विमान में 158 से 192 यात्रियों के बैठने की क्षमता निर्धारित की गई है। इस मॉडल को सितंबर 2022 में नियामक प्राधिकरण की ओर से आवश्यक प्रमाणन हासिल हुआ था, जिसके बाद मई 2023 से इसने यात्रियों के साथ अपनी नियमित वाणिज्यिक उड़ानें शुरू की थीं। चीनी नेतृत्व इसे अपने घरेलू विनिर्माण और तकनीकी क्षमता की सबसे बड़ी जीत के तौर पर पेश करता रहा है।
कागजों पर घरेलू विमान का तमगा होने के बावजूद, सी919 की आंतरिक संरचना पूरी तरह स्वदेशी नहीं है। विमान का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील हिस्सा यानी उसका जेट इंजन अभी भी पूरी तरह पश्चिमी प्रौद्योगिकी पर टिका है। सी919 में लीप-1सी इंजन का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस आधुनिक इंजन का निर्माण सीएफएम इंटरनेशनल द्वारा किया जाता है, जो अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस और फ्रांस की प्रमुख एयरोस्पेस फर्म सैफ्रान का एक संयुक्त उपक्रम है। यही विदेशी तकनीकी साझेदारी अब बीजिंग की पूरी वाणिज्यिक रणनीति के लिए एक नाजुक बिंदु साबित हो रही है, क्योंकि अमेरिकी नियामक तंत्र के किसी भी कड़े फैसले से पूरे बेड़े का निर्माण थम सकता है।
कल-पुर्जों के निर्यात और विनियामक नियमों में सख्ती
अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने चीन को भेजे जाने वाले विमानन उपकरणों के निर्यात लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को धीमा कर दिया है। इसके साथ ही नए नियमों पर भी विचार चल रहा है, जिनके लागू होने के बाद विमानों के लैंडिंग गियर और अन्य महत्वपूर्ण ढांचागत पुर्जों के निर्यात को सीमित करना कानूनी रूप से बेहद आसान हो जाएगा। एक तैयार मसौदे में यह प्रस्ताव भी शामिल किया गया है कि विमानन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर उपयोग होने वाले विशेष हाइड्रोलिक फ्लूइड के निर्यात के लिए भी अनिवार्य रूप से सरकारी लाइसेंस लेना जरूरी किया जाए।
कोमाक को मिलने वाले लाइसेंसों की संख्या कम करने का यह कदम व्यापक भू-राजनीतिक टकराव से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। चीन ने बीते समय में दुर्लभ खनिजों और औद्योगिक मैग्नेट के निर्यात पर कड़े नियंत्रण लागू किए थे। ये खनिज अमेरिकी ऑटोमोबाइल उद्योग, उन्नत सेमीकंडक्टर निर्माण, एयरोस्पेस और रक्षा उत्पादन के लिए अपरिहार्य माने जाते हैं। जब बीजिंग ने इन खनिजों की वैश्विक आपूर्ति को अपनी कूटनीतिक ढाल बनाया, तो वॉशिंगटन ने जवाब में विमानन तकनीक और उन्नत इंजन घटकों पर अपनी पकड़ का इस्तेमाल करते हुए चीन पर जवाबी दबाव बनाना शुरू कर दिया।
विमान बाजार और आपूर्ति श्रृंखला पर मंडराता संकट
अमेरिकी प्रतिबंधों के संभावित परिणामों को लेकर विभिन्न तकनीकी विश्लेषकों के अपने-अपने आकलन हैं। कुछ विशेषज्ञों का तर्क है कि यदि बोइंग विमानों से जुड़े सामान्य पुर्जों पर किसी भी तरह की व्यापक रोक लगाई जाती है, तो इसका वित्तीय खामियाजा अमेरिकी कंपनियों को भी भुगतना पड़ सकता है, क्योंकि चीन दुनिया के सबसे बड़े वाणिज्यिक विमान बाजारों में गिना जाता है। पश्चिमी कंपनियों के लिए इस बाजार से होने वाली आमदनी उनके अपने शोध और विकास के लिए बेहद जरूरी रहती है।
हालांकि सी919 विमान के मामले में पलड़ा साफ तौर पर पश्चिमी तकनीक की ओर झुका हुआ है। चीनी यात्री विमान पूरी तरह से विदेशी प्रणालियों के भरोसे हवा में हैं। यदि लीप-1सी इंजन या उसके सहायक कल-पुर्जों की आपूर्ति पर पूर्ण अथवा आंशिक रोक लगा दी जाती है, तो सी919 का बड़े पैमाने पर व्यावसायिक उत्पादन सीधे तौर पर ठप पड़ सकता है। चीनी विशेषज्ञों के बीच यह आशंका गहराने लगी है कि उत्पादन बाधित होने से कोमाक की अगले कई वर्षों की व्यावसायिक योजनाएं बुरी तरह लड़खड़ा सकती हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में बोइंग और एयरबस को टक्कर देने का सपना लंबा खिंच जाएगा।
घरेलू सीजे-1000ए इंजन की राह और चुनौतियां
विदेशी इंजनों पर अपनी भारी निर्भरता को भांपते हुए चीन काफी समय से अपने घरेलू इंजन सीजे-1000ए के विकास पर भारी निवेश कर रहा है। बीजिंग का अंतिम लक्ष्य यही है कि किसी भी भू-राजनीतिक संकट की स्थिति में उसकी विमानन महत्वाकांक्षाएं विदेशी आपूर्तिकर्ताओं के रहमोकरम पर न रहें। कुछ चीनी तकनीकी विशेषज्ञों का अनुमान है कि सीजे-1000ए इंजन को 2027 के आसपास विनियामक प्रमाणन मिल सकता है, जिसके बाद इसके उत्पादन को धीरे-धीरे गति दी जाएगी। इस योजना के सफल होने पर ही चीन लीप-1सी पर अपनी निर्भरता को धीरे-धीरे घटा सकेगा।
जमीनी हकीकत यह है कि प्रयोगशाला में इंजन का सफल परीक्षण कर लेना और उसे सैकड़ों यात्रियों से भरे विमान में सुरक्षित व्यावसायिक संचालन के लिए उतारना दो सर्वथा भिन्न प्रक्रियाएं हैं। इस नए घरेलू इंजन को न केवल अत्यंत कड़े सुरक्षा मानकों और तकनीकी प्रमाणन से गुजरना होगा, बल्कि बड़े पैमाने पर औद्योगिक उत्पादन की निरंतरता भी सिद्ध करनी होगी। इसके अतिरिक्त, इस इंजन को सी919 के ढांचे में सटीक रूप से एकीकृत करने के लिए विमान के मूल एयरफ्रेम डिजाइन में जरूरी संशोधन कराने होंगे, जिसके लिए फिर से एक लंबी और जटिल प्रमाणन प्रक्रिया से गुजरना अनिवार्य होगा।
2030 से पहले पूर्ण आत्मनिर्भरता की राह कठिन
विशेषज्ञों के विस्तृत तकनीकी आकलन बताते हैं कि सी919 को पूरी तरह स्वदेशी इंजन से लैस करने का सफर बेहद पेचीदा साबित होने वाला है। सीजे-1000ए को अभी अनगिनत सुरक्षा जांचों और उड़ान परीक्षणों के लंबे चक्रव्यूह को पार करना बाकी है। नतीजतन, पश्चिमी लीप-1सी इंजन से स्वदेशी तकनीक की ओर संक्रमण का यह दौर अपेक्षा से कहीं अधिक लंबा खिंच सकता है। कई विश्लेषक स्पष्ट मानते हैं कि वर्ष 2030 से पहले सी919 में पूरी तरह घरेलू इंजन का नियमित व्यावसायिक इस्तेमाल संभव नहीं दिखता।
इस संकट का एक दूसरा पहलू यह भी है कि अमेरिकी दबाव बीजिंग के लिए अपनी घरेलू विमानन तकनीक को तेजी से विकसित करने का एक बड़ा उत्प्रेरक बन सकता है। पश्चिमी आपूर्ति पर अनिश्चितता बढ़ते ही चीनी सरकार अपने घरेलू इंजनों, अत्याधुनिक एवियोनिक्स और अन्य सहायक विमानन प्रणालियों के स्वदेशीकरण के लिए वित्तीय और तकनीकी संसाधन कई गुना बढ़ा सकती है। आधुनिक विमानन तकनीक और दुर्लभ खनिजों के बीच जारी यह रणनीतिक रस्साकशी दोनों वैश्विक महाशक्तियों के बीच भविष्य की औद्योगिक होड़ को एक नया मोड़ दे रही है।



















