पश्चिम एशिया का सैन्य संकट अब फारस की खाड़ी से आगे निकलकर अरब सागर के खुले पानी तक फैल चुका है। दक्षिण-पूर्वी ईरान के रणनीतिक रूप से अहम कोनार्क नौसैनिक ठिकाने पर अमेरिकी सेना द्वारा की गई एयरस्ट्राइक के बाद दोनों देशों के बीच टकराव बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। ओमान की खाड़ी में चाबहार के निकट स्थित इस ईरानी नौसैनिक बेस पर हमले की पुष्टि तेहरान द्वारा की गई है। इस कार्रवाई में ईरानी नौसेना के दो जवान जख्मी हुए हैं। इस सैन्य कार्रवाई के साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य के मुहाने पर तनाव नए चरम पर पहुंच गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा पर गंभीर खतरे मंडराने लगे हैं।
कोनार्क नौसैनिक अड्डे को बनाया गया निशाना
सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत में स्थित कोनार्क नौसैनिक अड्डा भौगोलिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील स्थान पर बना हुआ है। यह अड्डा होर्मुज जलडमरूमध्य के निकास द्वार के ठीक बाहर ओमान की खाड़ी के तट पर चाबहार की खाड़ी के पास स्थित है। ईरानी नौसेना के आधिकारिक बयानों के अनुसार, मंगलवार तड़के अमेरिकी बलों ने इस ठिकाने पर दो हल्के प्रोजेक्टाइल दागे। इस हमले का सीधा निशाना नौसैनिक अड्डे की परिधि में तैनात 35 मिलीमीटर की एक रक्षात्मक तोप थी। हालांकि इस खास तोप को नष्ट करने के सामरिक कारणों या किसी हालिया झड़प में इसकी प्रत्यक्ष भूमिका को लेकर स्पष्ट विवरण सामने नहीं आए हैं। इस हमले को बहुत सीमित और सटीक दायरे में अंजाम दिया गया प्रतीत होता है, जिस पर अमेरिकी रक्षा विभाग की तरफ से तत्काल कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
उत्तरी अरब सागर में अमेरिकी विध्वंसक पर मिसाइल दागने का प्रयास
कोनार्क पर हुए हमले के समानांतर ही उत्तरी अरब सागर में भी भारी सैन्य गतिविधि दर्ज की गई। ईरानी सेना ने उत्तरी अरब सागर में गश्त कर रहे अमेरिकी नौसेना के अर्ले बर्क क्लास के एक मिसाइल विध्वंसक पोत को आधुनिक एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों और बैलिस्टिक मिसाइल से निशाना बनाने का प्रयास किया। यह युद्धपोत ईरानी समुद्री सीमा की दिशा में आगे बढ़ रहा था, तभी तेहरान की ओर से यह जवाबी कार्रवाई शुरू की गई। ईरानी मिसाइल खतरे को देखते हुए अमेरिकी नौसेना ने यूएसएस जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश विमानवाहक पोत से एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमानों को तत्काल रवाना किया। इन लड़ाकू विमानों ने दक्षिण-पूर्वी ईरान के कोनार्क क्षेत्र में स्थित इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के नौसैनिक बुनियादी ढांचे पर नए सिरे से सटीक हमले किए।
इस्फहान और कुम से मिसाइल प्रक्षेपण
समुद्री मोर्चे पर संघर्ष भड़कने के साथ ही ईरान के भीतरी इलाकों से भी भारी हथियारों की तैनाती देखने को मिली है। देश के प्रमुख रणनीतिक केंद्रों इस्फहान और कुम प्रांतों से कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। इन मिसाइलों के सटीक ठिकानों और इनसे हुए रणनीतिक नुकसान का पूरा ब्योरा अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है, लेकिन आंतरिक प्रांतों से हथियारों का यह इस्तेमाल दिखाता है कि सैन्य संघर्ष अब केवल सीमावर्ती या तटीय क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहा है। इस पूरी श्रृंखला ने स्पष्ट कर दिया है कि दोनों देशों के बीच चल रही तनातनी अब क्षेत्रीय जलक्षेत्र से बाहर निकलकर व्यापक महासागरीय दायरे में फैल चुकी है।
खर्ग द्वीप और तेल आपूर्ति पर मंडराता खतरा
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे संवेदनशील पहलू वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ा हुआ है। अरब सागर के पाकिस्तानी अधिकार क्षेत्र वाले समुद्री इलाके में अमेरिकी युद्धपोतों की सक्रिय मौजूदगी दर्ज की गई है। इसके साथ ही खर्ग द्वीप की सुरक्षा को लेकर भी भारी आशंकाएं पैदा हो गई हैं। खर्ग द्वीप ईरान की पूरी अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा माना जाता है, क्योंकि देश के कुल कच्चे तेल निर्यात का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा अकेले इसी द्वीप के तेल टर्मिनलों के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भेजा जाता है। यदि यह टकराव खर्ग द्वीप के बुनियादी ढांचे तक फैलता है, तो इसका सीधा असर न केवल ईरानी अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा, बल्कि दुनिया भर के कच्चे तेल बाजारों में भारी आपूर्ति संकट खड़ा हो सकता है। दोनों पक्षों की इस खुली सैन्य कार्रवाई ने क्षेत्र में तत्काल शांति की संभावनाओं को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है।



















