अमेरिका के इलिनॉय में एक हिंदू मंदिर को निशाना बनाने की कथित साजिश और भारतीय समुदाय के खिलाफ बढ़ रही नफरत के मामलों पर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने एक खास बातचीत के दौरान कहा कि जब ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, तब स्थानीय लोगों का पीड़ित समुदाय के साथ एकजुट होकर खड़े होना एक बड़ा भरोसा देता है। उनके अनुसार, अमेरिका में भारतीय समुदाय के प्रति नफरत न तो बड़े पैमाने पर फैली है और न ही इसकी जड़ें बहुत गहरी हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अमेरिका जैसे विशाल और विविधता से भरे समाज में कुछ लोग अज्ञानी, मूर्ख या दुर्भावना से ग्रस्त हो सकते हैं। मार्को रूबियो अपनी इस साल की दूसरी भारत यात्रा के तहत मंगलवार को मुंबई पहुंचे हैं।
घटनाओं के पीछे की वजहों पर क्या बोले अमेरिकी विदेश मंत्री
चर्चा के दौरान जब उनसे यह सवाल किया गया कि भारतीय समुदाय अपनी शैक्षणिक उत्कृष्टता, कम अपराध दर और देश की प्रगति में बड़े योगदान के बावजूद शत्रुता का सामना क्यों कर रहा है, तो उन्होंने इस बात का विस्तार से जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अज्ञानता और नफरत जैसी बुराइयां केवल अमेरिका तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह पूरी दुनिया के हर समाज में किसी न किसी रूप में मौजूद हैं। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में होने वाली ऐसी वारदातों के पीछे अलग-अलग कारण होते हैं, जहां कुछ हमले आतंकवाद की देन होते हैं तो कुछ व्यक्तिगत या सामूहिक नफरत की वजह से अंजाम दिए जाते हैं। उन्होंने ऐसे कुकृत्य करने वाले तत्वों को सीधे तौर पर मूर्ख करार दिया और कहा कि यह मानव स्वभाव का एक नकारात्मक पहलू है।
भारतीय समुदाय को लेकर क्या रखी अपनी राय
मार्को रूबियो ने इस बात पर जोर दिया कि वे इस विचार से इत्तेफाक नहीं रखते कि अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ किसी प्रकार की व्यापक या गहरी नफरत मौजूद है। उनका मानना है कि अमेरिकी समाज का बड़ा हिस्सा इस प्रकार की मानसिकता से कोसों दूर है। इसके बावजूद, उन्होंने यह माना कि इतने बड़े और जटिल सामाजिक ताने-बाने में कुछ लोग दुर्भाग्य से स्टूपिड, अज्ञानी या नफरत से भरे हुए मिल जाते हैं। उन्हें सबसे ज्यादा गर्व इस बात पर होता है कि जब भी ऐसी घटनाएं घटती हैं, तो आसपास के लोग तुरंत आगे आते हैं। उन्होंने केवल भारतीय-अमेरिकी समुदाय का जिक्र नहीं किया, बल्कि उन स्थानीय नागरिकों की भी सराहना की जो पीड़ित के पक्ष में खड़े होकर इस नफरत को सिरे से खारिज करते हैं।
विस्कॉन्सिन की घटना और यहूदी-विरोधी भावना का जिक्र
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री ने कुछ साल पहले विस्कॉन्सिन राज्य में सिख समुदाय के साथ घटी एक बेहद भयावह घटना की भी याद दिलाई। उन्होंने बताया कि उस संकट के समय भी स्थानीय अमेरिकी नागरिकों ने आगे आकर सिखों का खुलकर समर्थन किया था। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिका के भीतर यहूदी-विरोधी भावना यानी एंटी-सेमिटिज्म में हुई वृद्धि पर गहरी चिंता जताई और कहा कि प्रशासन ऐसी हर घटना से कड़ाई से निपटता है और उसका विरोध करता है। उन्होंने राजनेताओं और शीर्ष पदों पर बैठे लोगों के दायित्वों पर बात करते हुए कहा कि सत्ता में बैठे किसी भी व्यक्ति की यह प्राथमिक जिम्मेदारी है कि वह कभी भी ऐसी नफरत को बढ़ावा न दे, न ही उसे सही ठहराए और न ही उस पर चुप्पी साधे। देश का बहुसंख्यक वर्ग हमेशा यह स्पष्ट संदेश देता है कि ऐसी हरकतें पूरी तरह गलत हैं।
इलिनॉय के हिंदू मंदिर पर हमले की साजिश का पूरा मामला
यह पूरा मामला अमेरिकी राज्य इलिनॉय के ऑरोरा शहर में स्थित श्री वेंकटेश्वर मंदिर से जुड़ा हुआ है, जहां एक हिंदू मंदिर पर कथित तौर पर हमला करने की बड़ी साजिश रची गई थी। इस खतरनाक योजना के सिलसिले में सुरक्षा एजेंसियों ने 19 साल के एक युवक को धर दबोचा था। जांच में सामने आया कि आरोपी युवक इस धार्मिक स्थल पर बड़े पैमाने पर अंधाधुंध गोलीबारी करने की फिराक में था, लेकिन गनीमत यह रही कि वारदात के वक्त उसकी बंदूक अचानक जाम हो गई और एक भी गोली नहीं चल सकी। पुलिस ने आरोपी को शिकागो के पास स्थित पैलेटाइन इलाके से गिरफ्तार किया। इसके बाद वह गत 14 अक्टूबर को अदालत के सामने पेश हुआ, जहां उस पर आतंकवादी धमकी देने के साथ-साथ अवैध रूप से हथियार अपने पास रखने के गंभीर आरोप तय किए गए।


















