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पेंटागन ने बनाया फोर्ट्रेस प्लान, युद्ध छिड़ने पर 90 दिन तक खुद चलेंगे अमेरिकी सैन्य अड्डेअमेरिका
26 अक्तू॰ 2026, 4:26 am (4 दिन पहले)· 4

पेंटागन ने बनाया फोर्ट्रेस प्लान, युद्ध छिड़ने पर 90 दिन तक खुद चलेंगे अमेरिकी सैन्य अड्डे

पेंटागन ने मुख्य भूभाग के सैन्य अड्डों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए फोर्ट्रेस योजना तैयार की है ताकि बड़े संघर्ष की स्थिति में भी बिजली, पानी और अन्य जरूरी आपूर्ति तीन महीने तक बिना रुके जारी रह सके।

अगर अमेरिका में कभी कोई गंभीर हमला होता है और बिजली, पानी तथा ईंधन की आपूर्ति के साथ-साथ आवश्यक सामान पहुंचाने का पूरा तंत्र ठप पड़ जाता है, तब भी अमेरिकी सेना के कामकाज पर कोई आंच न आए, इसके लिए पेंटागन ने एक विशेष योजना पर काम शुरू कर दिया है। इस पहल का नाम फोर्ट्रेस रखा गया है और इसके तहत अमेरिका अपने मुख्य भूभाग पर बने सैन्य अड्डों को कम से कम नब्बे दिन तक पूरी तरह अपने दम पर संचालित करने की तैयारी कर रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के महत्वपूर्ण तंत्र या वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने की स्थिति में भी सेना के सामरिक अभियान बिना किसी रुकावट के लगातार चलते रहें। रक्षा विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस रणनीति के तहत मुख्य भूमि के सैन्य अड्डों को इस प्रकार तैयार किया जा रहा है जिससे बड़े संघर्ष के दौरान आम नागरिकों के लिए बनी बिजली, जल आपूर्ति और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर सेना की निर्भरता को पूरी तरह से कम किया जा सके।

बिजली के मामले में आत्मनिर्भरता और माइक्रोग्रिड

इस पूरी योजना का एक सबसे अहम और बड़ा हिस्सा सैन्य अड्डों को बिजली के मोर्चे पर पूरी तरह से स्वावलंबी बनाना है। इसके लिए छोटे पोर्टेबल परमाणु रिएक्टर, विशाल बैटरी स्टोरेज सिस्टम और आधुनिक माइक्रोग्रिड जैसे उन्नत विकल्पों पर तेजी से काम करने की योजना बनाई गई है। माइक्रोग्रिड बिजली का एक ऐसा लघु और स्वतंत्र नेटवर्क होता है जो आवश्यकता पड़ने पर मुख्य बिजली ग्रिड से अलग होकर भी सुचारू रूप से काम कर सकता है। इस तकनीक की मदद से यदि लंबे समय तक मुख्य बिजली आपूर्ति बाधित रहती है, तब भी सैन्य अड्डों को अपने जरूरी अभियानों को जारी रखने में बहुत बड़ी मदद मिलेगी। पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता सीन पार्नेल का कहना है कि देश की रक्षा व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए आम नागरिकों के हिस्से की बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर निर्भर रहना एक बहुत बड़ा जोखिम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिजली अब आधुनिक युद्ध का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुकी है और यदि बिजली नहीं होगी तो संचार, पानी की आपूर्ति, सामान की आवाजाही, विनिर्माण और सेना के कमांड सिस्टम पर सीधा और गहरा असर पड़ेगा।

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आपूर्ति श्रृंखला और जरूरी सामानों का विशाल भंडार

फोर्ट्रेस योजना केवल बिजली संकट से निपटने तक ही सीमित नहीं है बल्कि इसके दायरे में हथियारों, ईंधन, जीवन रक्षक दवाओं, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, स्पेयर पार्ट्स और तमाम जरूरी खनिजों की संभावित कमी से निपटने की पुख्ता तैयारी भी शामिल है। इस योजना के अंतर्गत आवश्यक सामग्रियों का एक बड़ा रणनीतिक भंडार तैयार रखने और प्रत्येक महत्वपूर्ण रक्षा जरूरत के लिए कम से कम दो भरोसेमंद आपूर्ति या उत्पादन मार्ग खुले रखने की बात कही गई है। इसका बुनियादी मकसद यह है कि यदि किसी अप्रत्याशित कारण से किसी एक विशेष कंपनी या सप्लायर से सामान मिलना बंद भी हो जाए, तो भी देश की सेना के दैनिक कामकाज और सामरिक तैयारियों में किसी भी प्रकार की रुकावट न आए।

नागरिक फैक्ट्रियों की भूमिका और उत्पादन नेटवर्क

पेंटागन इस योजना के तहत केवल अपने आंतरिक तंत्र को ही नहीं बल्कि नागरिक फैक्ट्रियों को भी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पहले से तैयार करना चाहता है। इसके लिए सिविल रिजर्व मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क नामक एक विशेष व्यवस्था के तहत काम करने की रूपरेखा तैयार की गई है। इसके अंतर्गत इस बात का बारीकी से आकलन किया जाएगा कि देश की कौन-सी नागरिक फैक्ट्रियां कितनी तेजी से और कितनी मात्रा में रक्षा से जुड़ा साजो-सामान तैयार कर सकती हैं। इसके साथ ही कारखानों को साइबर हमलों से सुरक्षित रखने के कड़े इंतजाम करने और किसी भी गंभीर संकट के समय देश के भीतर रक्षा उत्पादन क्षमता को तेजी से बढ़ाने के तौर-तरीके भी विकसित किए जा रहे हैं।

जीपीएस और उपग्रह संचार प्रणालियों की सुरक्षा

फोर्ट्रेस योजना के दायरे में सैन्य संचार प्रणालियों, सटीक नेविगेशन सिस्टम और सैटेलाइट सेवाओं को किसी भी बाहरी खतरे या व्यवधान से सुरक्षित रखना भी शामिल है। इसमें विशेष रूप से जीपीएस सिग्नल को जाम करने की तमाम कोशिशों का डटकर मुकाबला करने और उनसे पार पाने पर पूरा ध्यान केंद्रित किया गया है। पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता सीन पार्नेल ने जोर देकर कहा कि किसी बड़े युद्ध के बीच अचानक ऐसे कठिन फैसले लेने की नौबत आने से काफी पहले ही देश को पूरी तरह से तैयार कर लेना चाहिए। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अमेरिका की अपनी घरेलू सुरक्षा को लेकर जो पुरानी सोच चली आ रही थी जिसके तहत यह माना जाता था कि देश के दोनों तरफ स्थित महासागर प्राकृतिक रूप से सुरक्षा प्रदान करेंगे, अब उस पारंपरिक सोच पर नए सिरे से विचार करने की गहरी आवश्यकता महसूस की जा रही है।

सवाल-जवाब

फोर्ट्रेस योजना क्या है?
फोर्ट्रेस पेंटागन की एक विशेष योजना है जिसके तहत अमेरिकी सैन्य अड्डों को मुख्य भूभाग पर कम से कम 90 दिन तक बिना बाहरी मदद के खुद चलाने की तैयारी की जा रही है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य बड़े संघर्ष के दौरान आम नागरिकों के लिए बनी बिजली, पानी और आपूर्ति व्यवस्था पर सेना की निर्भरता को कम करना है।
सैन्य अड्डों को बिजली के मामले में आत्मनिर्भर कैसे बनाया जाएगा?
इसके लिए छोटे पोर्टेबल परमाणु रिएक्टर, बड़े बैटरी स्टोरेज सिस्टम और माइक्रोग्रिड जैसे विकल्पों का उपयोग किया जाएगा।
पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता कौन हैं?
सीन पार्नेल पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता हैं।
नागरिक फैक्ट्रियों को तैयार करने के लिए किस नेटवर्क का उपयोग किया जाएगा?
इसके लिए सिविल रिजर्व मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क नामक व्यवस्था के तहत काम करने की योजना है।
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टिप्पणियाँ 5

Sophie Laurent@sophie-laurent·3 दिन पहले

अमेरिका अब अपनी सुरक्षा को लेकर सच में बहुत डरा हुआ है। अगर सेना को भी खुद के भरोसे तीन महीने जीने की तैयारी करनी पड़ रही है, तो हालात वाकई गंभीर हैं।

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·3 दिन पहले

नब्बे दिन का इंतजाम तो ठीक है, पर जंग लंबी खिंची तो क्या होगा? इतनी बड़ी तैयारी भी शायद कम पड़ जाए।

Li Wei@li-wei·3 दिन पहले

यूकी, नब्बे दिन भी बहुत बड़ा वक्त होता है, अगर तब तक भी बात न बनी तो फिर क्या ही कहेंगे।

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·3 दिन पहले

अमेरिका अब अपनी ज़मीन पर भी इतनी बड़ी जंग की तैयारी कर रहा है तो बाकी दुनिया के लिए यह साफ संकेत है कि हालात कितने सुधरने से रहे। जब पेंटागन खुद नब्बे दिन तक बिना बाहर की मदद के अड्डों को चलाने में जुट गया है, तो समझ लीजिए कि बड़े टकराव का खतरा अब कागजों से निकलकर जमीन पर आ चुका है।

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·3 दिन पहले

आयशा, बात बिल्कुल सही है। अमेरिका अगर खुद को इस तरह से ढाल रहा है, तो साफ है कि आने वाले दिनों में भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ने वाला है।

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