न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र महासभा के वार्षिक सत्र के दौरान कूटनीतिक तल्खी उस समय चरम पर पहुंच गई, जब ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन मंच पर संबोधन दे रहे थे। जैसे ही उन्होंने अमेरिकी और इजरायली नीतियों की तीखी आलोचना शुरू की, वाशिंगटन के प्रतिनिधिमंडल ने सदन से बाहर का रास्ता चुन लिया। वैश्विक कूटनीति के इस बड़े मंच पर दोनों देशों के बीच उपजी खींचतान स्पष्ट रूप से दिखाई दी, जबकि वहां मौजूद अन्य देशों की निगाहें नई दिल्ली के राजनयिक रुख पर टिकी रहीं।
मंच से अमेरिकी धमकियों पर कड़ा पलटवार
ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उन हालिया टिप्पणियों का जवाब दिया, जिनमें ईरान को तबाह करने की चेतावनी दी गई थी। मसूद पेजेशकियन ने जोरदार ढंग से यह तर्क रखा कि उनका मुल्क आक्रामकता फैलाने वाला नहीं, बल्कि खुद लंबे समय से आतंकवाद की मार झेलता रहा है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों और उनके सहयोगियों के घातक हथियारों के चलते उनके निर्दोष बच्चों, अस्पतालों, विश्वविद्यालयों और रिहायशी बस्तियों को गंभीर नुकसान उठाना पड़ा है।
अपने संबोधन में उन्होंने पूर्व में अपने शीर्ष नेतृत्व को बिना किसी विधिक प्रक्रिया के निशाना बनाए जाने का मुद्दा भी उठाया। पेजेशकियन ने स्पष्ट किया कि कई हमलों का सामना करने के बाद भी ईरान ने कभी समर्पण नहीं किया है। अपने देश की रक्षा रणनीति को सुदृढ़ बताते हुए उन्होंने दोहराया कि अपनी सीमाओं और अवाम की हिफाजत के लिए तेहरान को किसी बाहरी शक्ति की मंजूरी लेने की जरूरत नहीं है।
सदन छोड़कर बाहर निकला अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल
भाषण के दौरान जब हथियारों के इस्तेमाल और आम नागरिकों पर हुए हमलों की सीधी जवाबदेही तय की जाने लगी, तब अमेरिकी राजनयिक अपनी सीटों से उठे और सदन से वॉकआउट कर गए। इस कूटनीतिक कदम ने यह दिखा दिया कि दोनों पक्षों के बीच वार्ता की संभावनाएं कितनी कठिन दौर में पहुंच चुकी हैं। इस व्यवधान के बावजूद ईरानी राष्ट्रपति ने अपनी बात जारी रखी और स्पष्ट किया कि उनके देश ने कभी निर्दोष नागरिकों को निशाना नहीं बनाया, जबकि उनके नागरिक बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य केंद्रों पर लगातार हमले किए गए।
सोशल मीडिया मंच X पर जारी एक वीडियो फुटेज में अमेरिकी प्रतिनिधि को उस क्षण सभा से बाहर जाते देखा गया जब ईरानी राष्ट्रपति अपना पक्ष रख रहे थे।
भारतीय प्रतिनिधियों का संतुलित और शांत रुख
हॉल में बने इस तनावपूर्ण माहौल के बीच भारतीय राजनयिक दल की कार्यशैली ने सबका ध्यान खींचा। नई दिल्ली के प्रतिनिधियों ने किसी भी प्रकार की जल्दबाजी या नाटकीयता से बचते हुए अत्यंत परिपक्व कूटनीति का प्रदर्शन किया। वे अपनी तय सीटों पर पूरी गंभीरता के साथ बने रहे और पूरे व्याख्यान को शांतिपूर्वक सुना।
इस कदम से यह स्पष्ट संदेश गया कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत किसी बाहरी धड़े के दबाव में निर्णय नहीं लेता। क्षेत्रीय और वैश्विक विवादों को सुलझाने के लिए भारत लगातार बातचीत, तनावमुक्ति और कूटनीतिक संवाद का समर्थन करता रहा है। सदन में बिना किसी पक्षपात के डटे रहकर भारतीय डेलिगेशन ने अपनी निष्पक्ष और स्वतंत्र विदेश नीति की परंपरा को एक बार फिर रेखांकित किया।



















