पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने पूरे इलाके की आपूर्ति व्यवस्था को गंभीर संकट में डाल दिया है। इस व्यापक तनाव के चलते कच्चे तेल और जरूरी सामान की वैश्विक आवाजाही बुरी तरह बाधित हुई है, जिसके परिणामस्वरूप अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन समेत कई अहम चीजों की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। क्षेत्र में अनिश्चितता का माहौल लगातार बना हुआ है और संकट के जल्द सुलझने के स्पष्ट संकेत भी सामने नहीं आए हैं। इस वैश्विक उथल-पुथल के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर यानी आईएमईसी परियोजना को लेकर बड़ा बयान दिया है और इसे कूटनीतिक रूप से आगे बढ़ाने का संकल्प जताया है।
ईरानी चौकियों से दूर वैकल्पिक मार्गों की जरूरत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया कि उनका प्रशासन इस महत्वाकांक्षी व्यापारिक गलियारे के पक्ष में मजबूती से खड़ा है। उन्होंने पड़ोस के समुद्री रास्तों पर व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि मौजूदा हालात ने दुनिया को सतर्क कर दिया है। उनके अनुसार, जिस तरह से कॉमर्शियल जहाजों पर हमले हुए हैं, उसने यह साफ कर दिया है कि ऊर्जा ढांचे को ईरानी चौकियों और प्रभाव वाले क्षेत्रों से अलग सुरक्षित रूट पर ले जाना बेहद जरूरी हो चुका है।
इसी संदर्भ में बात करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक महत्वपूर्ण बात कही। ट्रंप ने कहा, "मेरा प्रशासन 'इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर' और तेल बाहर निकालने के दूसरे तरीकों, चाहे वह पाइपलाइन हो या कुछ और, इसका जोरदार समर्थन करता है।" उन्होंने भरोसा जताया कि सभी साझेदार मिलकर दशकों पुरानी क्षेत्रीय बाधाओं को खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और रणनीतिक चुनौतियों से निपटने के करीब हैं।
ईरान समझौते और क्षेत्रीय गठबंधन पर चर्चा
व्यापारिक गलियारे के अलावा कूटनीतिक बातचीत के मोर्चे पर भी गतिविधियां तेज हो गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जानकारी दी कि स्टीव विटकोफ़ और जेरेड कुशनर ने ईरान से जुड़े समझौते को लेकर बातचीत कराने वाले मध्यस्थों से महत्वपूर्ण बैठकें की हैं। उन्होंने बताया कि मध्यस्थ चर्चा के लिए पहुंचे थे और बातचीत के कई पहलू काफी सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
इसके साथ ही ट्रंप ने 'शील्ड ऑफ द अमेरिकाज' की दूसरी उच्चस्तरीय बैठक को लेकर भी अपनी बात रखी। इस गठबंधन का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे पश्चिमी गोलार्ध की आर्थिक तरक्की और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से अब तक का सबसे बड़ा और बेहद ताकतवर मंच करार दिया।





















