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तेहरान की सड़कों पर हथियारों के साथ उतरी ईरानी जनता, छह महीने बाद भी अधूरा रहा अमेरिकी सत्ता परिवर्तन का मंसूबाअमेरिका
19 सित॰ 2026, 1:41 pm (41 दिन पहले)· 2

तेहरान की सड़कों पर हथियारों के साथ उतरी ईरानी जनता, छह महीने बाद भी अधूरा रहा अमेरिकी सत्ता परिवर्तन का मंसूबा

ईरान संघर्ष के छह महीने बीतने के बाद भी अमेरिकी रणनीति नाकाम दिख रही है, वहीं तेहरान में राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के साथ हजारों नागरिकों ने शक्ति प्रदर्शन किया।

ईरान के साथ जारी सैन्य टकराव को छह महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन कुछ ही हफ्तों में तेहरान का निजाम बदलने की उम्मीद लगाए वाशिंगटन को अब तक नाकामी ही हाथ लगी है। भारी सैन्य दबाव और अरबों डॉलर खर्च करने के बावजूद न तो युद्ध समाप्त हो सका है और न ही ईरान की सत्ता संरचना में कोई बदलाव आया है। इसके विपरीत, लंबे खिंचते संघर्ष ने अमेरिकी रणनीतिकारों के सामने कई गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।

सैन्य ठिकानों और नौसेना को भारी नुकसान

इस टकराव के दौरान अरब देशों में तैनात अमेरिकी सैन्य ठिकानों को ईरान की ओर से करारा नुकसान पहुंचाया गया है। इसके अलावा, अमेरिकी नौसेना के कुछ प्रमुख विमानवाहक पोत भी इस संघर्ष में प्रभावित हुए हैं। युद्ध के प्रभाव से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है, जिसने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ा दिया है। संसाधन झोंकने के बाद भी मैदान पर वांछित परिणाम हासिल नहीं हो सके हैं।

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तेहरान में एकजुटता मार्च और नागरिकों की लामबंदी

ईरान की राजधानी तेहरान की सड़कों पर हजारों नागरिकों ने उतरकर शक्ति प्रदर्शन किया है। इस एकजुटता मार्च में राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने खुद शिरकत की। मार्च के दौरान पुरुषों के साथ-साथ बड़ी संख्या में महिलाएं भी हथियारों से लैस नजर आईं। प्रदर्शनकारियों ने अंतिम क्षण तक मुकाबला जारी रखने का संकल्प दोहराया, जिससे यह स्पष्ट संदेश जाता है कि जनसमर्थन के दम पर ईरानी नेतृत्व पीछे हटने के मूड में बिल्कुल नहीं है।

सवाल-जवाब

ईरान संघर्ष को शुरू हुए कितना समय हो चुका है?
इस सैन्य टकराव को शुरू हुए छह महीने से अधिक का समय बीत चुका है।
तेहरान में आयोजित एकजुटता मार्च में किस प्रमुख नेता ने हिस्सा लिया?
इस विशाल रैली में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने खुद भाग लिया।
संघर्ष के दौरान अमेरिकी संपत्तियों को क्या नुकसान पहुंचा है?
अरब देशों में स्थित कई अमेरिकी ठिकानों के साथ-साथ नौसेना के कुछ विमानवाहक पोत भी प्रभावित हुए हैं।
इस संघर्ष से दुनिया भर में क्या बड़ा संकट खड़ा हुआ है?
इस लगातार खिंचते युद्ध के कारण पूरी दुनिया गंभीर ऊर्जा संकट का सामना कर रही है।
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