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अमेरिकी सेना में शामिल होगी हाई-टेक M8 कार्बाइन, सैनिकों की शिकायत पर बदला फैसलाअमेरिका
9 अक्तू॰ 2026, 5:49 am (1 घंटे पहले)· 0

अमेरिकी सेना में शामिल होगी हाई-टेक M8 कार्बाइन, सैनिकों की शिकायत पर बदला फैसला

सैनिकों से मिले फील्ड फीडबैक के बाद अमेरिकी सेना 50,000 M7 राइफलों के बाद अब हल्की और ज्यादा सटीक M8 कार्बाइन को बेड़े में शामिल करने जा रही है।

सैन्य साजो-सामान के आधुनिकीकरण की दिशा में अमेरिकी थलसेना ने अपनी मुख्य सर्विस राइफल को लेकर एक बड़ा रणनीतिक बदलाव किया है। मोर्चे पर तैनात सैनिकों से मिले जमीनी अनुभवों को ध्यान में रखते हुए सेना अब भारी-भरकम M7 राइफल की जगह नई और हल्की M8 कार्बाइन को अपने शस्त्रागार का मुख्य हिस्सा बनाने की तैयारी कर रही है। यह हथियार 3,180 किलोमीटर प्रति घंटे की मजल वेलोसिटी के साथ गोली दागता है, जिससे आधुनिक सुरक्षा कवच पहने दुश्मन को भी 600 मीटर की दूरी पर निशाना बनाया जा सकता है।

सैनिकों के मैदानी फीडबैक ने बदला सेना का रुख

अमेरिकी सेना आमतौर पर अपनी मुख्य बंदूकों के चुनाव और बदलाव को लेकर लंबे परीक्षण करती है। करीब तीन साल पहले ही M7 राइफल को भविष्य के सबसे कारगर हथियार के रूप में चुना गया था और सेना अब तक लगभग 50,000 M7 राइफलों की खेप हासिल भी कर चुकी थी। हालांकि युद्ध अभ्यास और वास्तविक प्रशिक्षण शिविरों में तैनात सैनिकों ने इसके भारी वजन और लंबी बनावट को लेकर कई व्यवहारिक दिक्कतें दर्ज कराईं। लंबी गश्त और तंग जगहों में इसके संचालन को लेकर मिली शिकायतों के बाद इस बदलाव की रूपरेखा तैयार हुई।

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सैनिकों से मिली इन्हीं जानकारियों के आधार पर हथियार निर्माता कंपनी सिग सॉयर और अमेरिकी सेना के तकनीकी विशेषज्ञों ने M7 के डिजाइन में व्यापक सुधार किए। इसी संशोधित और परिष्कृत रूप को M8 कार्बाइन का नाम दिया गया, जिसे शुरुआती परीक्षण के दौर में XM8 के नाम से जाना जाता था। नई कार्बाइन की पहली आधिकारिक तैनाती इसी साल दिसंबर में उत्तर कैरोलिना स्थित फोर्ट ब्रैग से शुरू की जाएगी।

हल्की बनावट और शहरी युद्ध के अनुकूल आकार

M8 कार्बाइन को खास तौर पर शहरी अभियानों और तीव्र गतिविधियों के दौरान आसानी से संभालने के मकसद से तैयार किया गया है। नई कार्बाइन का खाली वजन केवल 3.3 किलोग्राम है, जबकि सप्रेसर और हीट शील्ड जोड़ने के बाद भी इसका कुल वजन 4 किलोग्राम ही रहता है। यह पिछली M7 राइफल की तुलना में लगभग आधा किलोग्राम (तकरीबन 1 पाउंड) हल्की है।

इसके साथ ही M8 की नली यानी बैरल को M7 से लगभग 3.5 इंच छोटा रखा गया है। बैरल की लंबाई कम होने से सैनिकों को इमारतों के अंदर और संकरी गलियों में तेजी से मुड़ने और पोजीशन लेने में भारी सहूलियत मिलती है। हथियार के आकार को सुगठित करने के बावजूद इसकी मारक क्षमता में कोई कमी नहीं की गई है, क्योंकि यह पहले की तरह ही भारी और घातक 6.8×51mm कारतूस का इस्तेमाल करती है।

फ्री-फ्लोटिंग तकनीक और आधुनिक एर्गोनॉमिक्स

हथियार की स्थिरता और निशाने को बनाए रखने के लिए M8 में M-LOK फ्री-फ्लोटिंग हैंडगार्ड लगाया गया है। यह हैंडगार्ड बैरल को सीधे छुए बिना पकड़ मुहैया कराता है, जिससे लगातार होने वाली फायरिंग के दौरान बैरल का तापमान बढ़ने पर भी गोली की सटीकता पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता है। इसके अलावा कार्बाइन में दिया गया फिक्स्ड स्टॉक गोली चलते समय लगने वाले झटके यानी रीकॉइल को नियंत्रित करने में सैनिकों की काफी मदद करता है।

फायरिंग क्षमता की बात करें तो यह कार्बाइन सेलेक्ट-फायर प्रणाली पर काम करती है। इसमें सैनिक जरूरत के हिसाब से सिंगल शॉट या फिर फुली-ऑटोमैटिक मोड चुन सकते हैं, जिसमें यह 600 से 750 राउंड प्रति मिनट की दर से गोलियां बरसाने में सक्षम है। 3,180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से निकलने वाली गोली एक सेकंड से भी कम समय में 500 मीटर से अधिक का फासला तय कर लेती है।

M157 फायर कंट्रोल सिस्टम से लैस स्मार्ट स्कोप

इस आधुनिक कार्बाइन की सबसे बड़ी तकनीकी खूबी इसका M157 फायर कंट्रोल सिस्टम है। यह सिर्फ सामान्य दृष्टि देने वाला स्कोप नहीं है, बल्कि 1.21 किलोग्राम वजन का एक अत्याधुनिक कंप्यूटरीकृत सिस्टम है। इसमें 1x से 8x तक का जूम, लेजर रेंजफाइंडर, बैलिस्टिक कैलकुलेटर, इन्फ्रारेड ऐमिंग लेजर के साथ-साथ हवा की गति और तापमान को मापने वाले विशेष सेंसर लगे हुए हैं।

यह सिस्टम फायरिंग से पहले दूरी, हवा के दबाव और तापमान का तत्काल गणितीय विश्लेषण करता है और सैनिक की स्क्रीन पर सटीक टार्गेट पॉइंट दिखाता है। इस तकनीक के चलते सिपाही 600 मीटर की दूरी पर मौजूद लक्ष्य पर भी पहले ही प्रयास में अचूक निशाना लगाने में सक्षम हो जाता है।

बजट प्रस्ताव में नई खरीद की प्राथमिकता

सेना की प्राथमिकताओं में आए इस बदलाव की पुष्टि आगामी खरीद योजनाओं से भी होती है। वित्तीय वर्ष 2027 के आधिकारिक बजट प्रस्ताव में अमेरिकी सेना ने 14,944 नई M8 कार्बाइन खरीदने के लिए वित्तीय आवंटन की मांग रखी है। इसके विपरीत, पुरानी पड़ रही M7 राइफलों की नई खरीद के लिए इस बजट में कोई अतिरिक्त फंड नहीं मांगा गया है। लगभग 50,000 M7 हथियारों को बेड़े में शामिल करने के बाद आया यह बदलाव साफ दर्शाता है कि आधुनिक रक्षा तंत्र में सिपाही की वास्तविक सुविधा और मैदानी दक्षता को तकनीकी आंकड़ों से ऊपर रखा जा रहा है।

सवाल-जवाब

अमेरिकी सेना M7 राइफल की जगह M8 कार्बाइन क्यों ला रही है?
सैनिकों ने M7 के भारी वजन और लंबी बैरल के कारण संचालन में आ रही दिक्कतों की शिकायत की थी, जिसे M8 में सुधार दिया गया है।
M8 कार्बाइन का वजन और आकार M7 से कितना कम है?
M8 का खाली वजन 3.3 किलोग्राम है, जो M7 से करीब आधा किलो हल्का है, और इसकी बैरल 3.5 इंच छोटी है।
नई M8 कार्बाइन कौन सा कारतूस इस्तेमाल करती है?
यह M7 के समान ही शक्तिशाली 6.8×51mm कारतूस फायर करती है।
M157 फायर कंट्रोल सिस्टम क्या काम करता है?
यह एक स्मार्ट कंप्यूटराइज्ड स्कोप है जो हवा और दूरी की गणना कर 600 मीटर तक सटीक निशाना लगाने में मदद करता है।
M8 कार्बाइन की पहली आधिकारिक तैनाती कब और कहां होगी?
इसकी पहली तैनाती इसी साल दिसंबर में उत्तर कैरोलिना स्थित फोर्ट ब्रैग में शुरू होगी।
अमेरिकी सेना ने बजट में कितनी नई M8 कार्बाइन की मांग की है?
सेना ने वित्तीय वर्ष 2027 के बजट प्रस्ताव में 14,944 नई M8 कार्बाइन खरीदने के लिए फंड मांगा है।
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टिप्पणियाँ 4

Sophie Laurent@sophie-laurent·10 मिनट पहले

तीन साल में ही राइफल बदलनी पड़ गई, सैनिकों की परेशानी समय पर सुनने के लिए सेना की तारीफ करनी होगी।

Li Wei@li-wei·9 मिनट पहले

सोफी, 50,000 राइफलें पहले ही ले लेना और फिर अचानक बदलना बहुत बड़ी बात है।

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·30 मिनट पहले

मैदान पर लड़ने वाले सैनिकों की बात सुनकर हथियार बदलना सही फैसला है। भारी बंदूकें सिर्फ कागज़ पर अच्छी लगती हैं, असली जंग में तो एक-एक ग्राम वजन भारी पड़ जाता है।

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·30 मिनट पहले

युकी, बात तो सही है, पर पचास हज़ार एम-सेवन राइफलें आने के बाद रातों-रात फैसला बदलना क्या बजट की बर्बादी नहीं है?

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