धरती पर जारी विभिन्न भू-राजनीतिक तनावों के बीच, वैश्विक सैन्य रणनीतियों का ध्यान अब पृथ्वी की सीमाओं को पार कर बाहरी अंतरिक्ष की ओर केंद्रित होने लगा है। अमेरिकी सेना, जो वर्तमान में ईरान के साथ एक जटिल और अनिर्णीत सैन्य संघर्ष में व्यस्त है, अब अपने रक्षा अभियानों को एक बिल्कुल नए और अभूतपूर्व स्तर पर ले जाने की तैयारी कर रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में काम कर रही अमेरिकी सेना अब केवल पारंपरिक स्थलीय मोर्चों या पृथ्वी की निचली कक्षा तक अपनी सुरक्षा तैयारियों को सीमित रखने के पक्ष में नहीं है। ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने सैन्य बलों को एक स्पष्ट और कड़ा संदेश दिया है कि उन्हें पृथ्वी और चंद्रमा के बीच के विशाल खाली स्थान, जिसे सिस्लूनर स्पेस कहा जाता है, में युद्ध लड़ने, वहां टिके रहने और अंततः विजय प्राप्त करने के लिए मानसिक और तकनीकी रूप से तैयार रहना होगा। यह गंभीर निर्देश ऐसे समय में सामने आया है जब वाशिंगटन ने अंतरिक्ष में एक अत्यंत गोपनीय हथियार तैनात करने की बात भी आधिकारिक रूप से स्वीकार कर ली है, जो भविष्य के युद्धों के तौर-तरीकों को पूरी तरह बदल सकता है।
समुद्र की गहराइयों से लेकर चंद्रमा की कक्षा तक सुरक्षा का खाका
वायुसेना, अंतरिक्ष और साइबर सुरक्षा से जुड़े एक प्रमुख सम्मेलन, 'एयर, स्पेस एंड साइबर कॉन्फ्रेंस' को संबोधित करते हुए जनरल डैन केन ने अमेरिकी सेना के भावी रणनीतिक दृष्टिकोण को रेखांकित किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि आधुनिक सैनिकों को समुद्र की सबसे निचली तलहटी से लेकर सिस्लूनर स्पेस के अंतिम छोर तक किसी भी प्रकार की सैन्य चुनौती का सामना करने और वहां विजय हासिल करने के लिए खुद को ढालना होगा। सिस्लूनर स्पेस मूल रूप से पृथ्वी के वायुमंडल की बाहरी सीमा से लेकर चंद्रमा की कक्षा तक फैले हुए विशाल शून्य को संदर्भित करता है। सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि यह क्षेत्र अब केवल वैज्ञानिक अनुसंधान या विज्ञान फंतासी फिल्मों की कल्पनाओं तक सीमित नहीं रह गया है। इसके विपरीत, पेंटागन के रणनीतिकारों ने अब बाहरी अंतरिक्ष को एक सक्रिय और संभावित युद्धक्षेत्र के रूप में वर्गीकृत कर दिया है, जहां आने वाले दशकों में प्रभुत्व स्थापित करने की होड़ मचेगी।
अंतरिक्ष में सीक्रेट हथियार की तैनाती और सैटेलाइट रोधी क्षमताएं
इस रणनीतिक बदलाव की पुष्टि करते हुए, अमेरिकी एयरफोर्स के सेक्रेटरी ट्रॉय मेइंक ने कुछ समय पहले खुलासा किया कि अमेरिकी सेना ने अपने जवानों और रणनीतिक संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अंतरिक्ष की एक विशिष्ट कक्षा में एक गोपनीय हथियार प्रणाली स्थापित की है। हालांकि, पेंटागन ने इस हथियार की सटीक प्रकृति, इसकी तकनीकी विशिष्टताओं या इसके प्रक्षेपण की तारीख के बारे में कोई भी विवरण साझा करने से पूरी तरह परहेज किया है। सैन्य विशेषज्ञों और रणनीतिक विश्लेषकों का अनुमान है कि यह कोई पारंपरिक अंतरिक्ष-आधारित मिसाइल प्रणाली नहीं है जो अंतरिक्ष से गोले बरसाए। इसके बजाय, यह एक अत्यधिक उन्नत सैटेलाइट-रोधी प्रणाली हो सकती है जो संकट के समय दुश्मन के संचार और टोही उपग्रहों को पूरी तरह निष्क्रिय या नष्ट करने की क्षमता रखती है। यह कदम विशेष रूप से तब महत्वपूर्ण हो जाता है जब शत्रु देश अमेरिकी जमीनी बलों या उनकी अंतरिक्ष संपत्तियों को निशाना बनाने के लिए अपने उपग्रहों का उपयोग करने का प्रयास करें।
गहरे अंतरिक्ष में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और चीन की चुनौती
अमेरिकी स्पेस फोर्स के कॉम्बैट फोर्सेज कमांड के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल ग्रेगरी गैगनन ने इस बात पर प्रकाश डाला कि जैसे-जैसे मानव सभ्यता पृथ्वी के वायुमंडल की सीमा को लांघकर गहरे अंतरिक्ष की ओर अग्रसर हो रही है, वैसे-वैसे वहां संभावित संघर्ष की संभावनाएं भी कई गुना बढ़ रही हैं। उन्होंने विशेष रूप से चीन, यानी पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (PRC) की अंतरिक्ष गतिविधियों का उल्लेख किया। गैगनन के अनुसार, चीन अंतरिक्ष के विभिन्न रणनीतिक क्षेत्रों में अपनी गतिविधियों को तेजी से बढ़ा रहा है, जिसमें चंद्रमा के आसपास की कक्षाएं भी शामिल हैं। यही वह मुख्य कारण है जिसके चलते अमेरिका को चंद्रमा के निकटवर्ती अंतरिक्ष में अपनी सैन्य तैयारियों को तेज करना पड़ा है। यह प्रतिस्पर्धा केवल चंद्र सतह पर कदम रखने की नहीं है, बल्कि उस पूरे सिस्लूनर क्षेत्र में अपनी सामरिक और रणनीतिक बढ़त बनाए रखने की है जो भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों का मुख्य द्वार है।
सैन्य क्षमता का विस्तार: पांच वर्षों में दोगुनी होगी स्पेस फोर्स
अंतरिक्ष सुरक्षा के इन बढ़ते खतरों से निपटने के लिए अमेरिका अपनी सैन्य संरचना में भी ऐतिहासिक बदलाव करने जा रहा है। लेफ्टिनेंट जनरल गैगनन ने खुलासा किया कि अमेरिकी सरकार अगले पांच वर्षों के भीतर अपनी स्पेस फोर्स के आकार को दोगुना करने की योजना पर सक्रिय रूप से काम कर रही है। इस योजना के तहत स्पेस फोर्स के कुल सैन्य कर्मियों की संख्या को बढ़ाकर लगभग 25,000 तक पहुंचाया जाएगा। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों का तर्क है कि इस प्रकार के सैन्य विस्तार और उन्नत हथियारों की तैनाती का उद्देश्य केवल युद्ध लड़ना नहीं है, बल्कि एक मजबूत प्रतिरोधक क्षमता (डिटरेंस) स्थापित करना है। अमेरिका का स्पष्ट संदेश है कि अंतरिक्ष में अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन करके वह किसी भी संभावित शत्रु को किसी भी प्रकार की आक्रामक कार्रवाई करने से रोकना चाहता है, ताकि भविष्य में होने वाले बड़े संघर्षों को टाला जा सके।



















