अमेरिका में होने जा रहे अहम मिडटर्म चुनाव के मतदान में अब सिर्फ 24 घंटे का वक्त बचा है, और इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी भावी विधायी रणनीति को लेकर कड़े तेवर दिखाए हैं। चुनाव से ठीक पहले अपने अगले सियासी कदमों का ब्योरा देते हुए उन्होंने साफ संकेत दिया है कि यदि विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस के दोनों सदनों में बहुमत हासिल करने में सफल रहती है, तो वे उनके किसी भी बड़े विधायी फैसले को कानूनी रूप नहीं लेने देंगे। राष्ट्रपति ने सीधे तौर पर अपने विशेषाधिकार यानी वीटो का इस्तेमाल करने का इरादा जताया है, ताकि विपक्षी दल उनके प्रशासन द्वारा अब तक किए गए नीतिगत फैसलों और कार्यों को निष्प्रभावी न कर सके।
विपक्ष की बढ़त की स्थिति में वीटो शक्ति का रुख
एक पॉडकास्ट कार्यक्रम के दौरान पत्रकार मिरांडा डिवाइन से मुखातिब होते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी यह भावी रणनीति खुलकर सामने रखी। जब उनसे संभावित चुनावी उलटफेर और विपक्षी नियंत्रण को लेकर चर्चा की गई, तो उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि वे अब मिस्टर वीटो की भूमिका में आ जाएंगे। उन्होंने जोर देकर दोहराया कि वे अपने पिछले कामकाज और नीतियों पर डेमोक्रेट्स को पानी फेरने की कतई इजाजत नहीं देंगे। इस रुख को राजनीतिक जानकार इस तरह भी देख रहे हैं कि राष्ट्रपति को मतदान से पूर्व जमीनी स्तर पर प्रतिकूल चुनावी परिणामों की संभावना का अहसास है, जिसके चलते वे पहले से ही रक्षात्मक और सख्त योजना बना रहे हैं।
शुरुआती टकराव के बाद समझौते की उम्मीद
डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यदि संसद के दोनों सदनों में डेमोक्रेटिक पार्टी संख्याबल जुटा भी लेती है, तब भी उनकी सरकार अपने तय एजेंडे पर पीछे नहीं हटेगी और अपने रास्ते तलाशती रहेगी। ऐसी सूरत में विपक्षी दल जब भी अपनी नीतियों से जुड़े नए कानून या प्रस्ताव पारित कराकर राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए व्हाइट हाउस भेजेंगे, उन पर सीधे वीटो लगा दिया जाएगा। राष्ट्रपति के आकलन के मुताबिक शुरुआत के एक या दो महीनों तक दोनों पक्षों में तीखा गतिरोध देखने को मिल सकता है। जब लगातार बिल खारिज होते रहेंगे, तो कामकाज पूरी तरह ठप होने से दोनों दलों का वक्त जाया होगा। ट्रंप का मानना है कि इस विधायी अवरोध के बाद आखिरकार विपक्षी सांसद बातचीत की मेज पर आने के लिए विवश होंगे और किसी सर्वसम्मत समझौते की राह निकलेगी, हालांकि उन्होंने यह इच्छा भी जताई कि ऐसी टकरावपूर्ण नौबत न आए।
कांग्रेस में मौजूदा शक्ति संतुलन और दांव पर लगी सीटें
यह पूरा राजनीतिक संघर्ष 3 नवंबर को होने वाले मतदान से तय होगा। इस मिडटर्म चुनाव में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों पर मुकाबला हो रहा है, जबकि 100 सदस्यीय सीनेट की 35 सीटों पर मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। इन परिणामों से सीधे तौर पर तय होना है कि राष्ट्रपति ट्रंप के मौजूदा कार्यकाल के बाकी बचे दो वर्षों में संसद का विधायी नियंत्रण किस खेमे के पास रहेगा। अगर वर्तमान दलीय स्थिति पर नजर डालें, तो सत्तारूढ़ रिपब्लिकन पार्टी बेहद नाजुक बढ़त के साथ काबिज है। प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन सदस्यों की संख्या 218 है जबकि डेमोक्रेट्स के पास 214 सीटें हैं। वहीं सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी 53-47 के अंतर से आगे चल रही है। इन चुनावों का जनादेश राष्ट्रपति की नीतिगत ताकत और उनके आगामी फैसलों की दिशा तय करने में निर्णायक साबित होगा।





















