राष्ट्रीय राजधानी में ठंड की शुरुआत के साथ ही वायु प्रदूषण ने गंभीर रूप धारण कर लिया है। शहर की आबोहवा इतनी खराब हो चुकी है कि स्वस्थ व्यक्तियों के लिए भी खुले में सामान्य रूप से सांस लेना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है। हालिया आंकड़ों के अनुसार इस पूरे सीजन में पहली बार एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी एक्यूआई 380 के अंक को पार कर गया है, जिससे राजधानी के कई इलाकों में स्मॉग और धुंध की मोटी परत जम गई है।
गंभीर श्रेणी में पहुंचा वायु गुणवत्ता सूचकांक
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी सीपीसीबी के दैनिक आंकड़ों के मुताबिक शहर का प्रदूषण स्तर अब बेहद खतरनाक और गंभीर श्रेणी की दहलीज पर पहुंच चुका है। लगातार गिरती हवा की गुणवत्ता ने बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारी से जूझ रहे मरीजों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सामान्य दिनों की तुलना में प्रदूषक तत्वों का घनत्व कई गुना बढ़ गया है, जिससे वातावरण में दृश्यता भी काफी घट गई है।
मौसम विभाग ने जताई हालात और बिगड़ने की आशंका
भारतीय मौसम विभाग यानी आईएमडी के अनुसार मौजूदा स्थिति केवल आने वाले गंभीर संकट की शुरुआत भर है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में तापमान में और गिरावट आने तथा हवा की रफ्तार सुस्त पड़ने के कारण हवा के हालात और बदतर हो सकते हैं। मौसमी बदलाव और सतह पर भारी हवा के जमाव की वजह से धूल और धुएं के कण वायुमंडल के निचले हिस्से में फंसे रह जाते हैं, जिससे हवा जहरीली बनी रहती है।
प्रदूषण पर उठते सवाल और प्रशासनिक कदम
राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में ठंड की दस्तक के साथ ही प्रदूषण का ग्राफ तेजी से ऊपर चढ़ने लगता है। विशेषज्ञों के अनुसार पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटनाएं, वाहनों का अत्यधिक धुआं, स्थानीय निर्माण कार्यों की धूल और मौसमी प्रतिकूलता मिलकर हर साल राजधानी को गैस चैंबर में तब्दील कर देते हैं। इस गंभीर स्थिति को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी मान सरकार और संबंधित प्रशासन को कड़े कदम उठाने के निर्देश दे चुका है। वहीं लंबे समय के समाधान के रूप में राजधानी में 100 ऑक्सीजन पार्क बनाने जैसी परियोजनाओं पर भी विचार किया गया है, ताकि हरित क्षेत्र को बढ़ाया जा सके। इसके बावजूद तात्कालिक रूप से जहरीली हवा से राहत मिलती नहीं दिख रही है।















