सुबह की चाय या कॉफी को छोड़कर हर्बल ग्रीन टी अपनाने वाले लोगों के लिए बाजार से पैकेटबंद उत्पाद खरीदना हमेशा जरूरी नहीं है। घर की बालकनी, खुली छत या आंगन में सामान्य गमले का इस्तेमाल करके भी इस खुशबूदार पौधे को बेहद सरलता से उगाया जा सकता है। इसके लिए किसी बड़े खेत या फैले हुए बगीचे की बाध्यता नहीं होती, बल्कि थोड़ी सी जगह में भी यह पौधा लहलहा सकता है।
सर्दियों में लेमन ग्रास लगाने का सही समय
बागवानी के शौकीनों के लिए शीत ऋतु में यह पौधा तैयार करना काफी मुफीद साबित होता है। खरगोन में लेमन ग्रास की खेती करने वाले किसान राघव देवस्थले के अनुसार इसकी पत्तियों से नींबू जैसी सौंधी महक निकलती है और इनका मुख्य उपयोग हर्बल पेय तैयार करने में किया जाता है। जो लोग दिन की शुरुआत ताजगी और प्राकृतिक स्वाद के साथ करना चाहते हैं, उनके लिए घर में लगा यह पौधा एक बेहतरीन जरिया बन जाता है। अपने ही घर में पौधा मौजूद रहने का सबसे बड़ा लाभ यह है कि चाय बनाते समय जरूरत के मुताबिक तुरंत ताजी पत्तियां तोड़ी जा सकती हैं।
गमले का चुनाव और मिट्टी तैयार करने की विधि
इस पौधे को पनपने के लिए बुनियादी स्तर पर सही आकार के गमले की दरकार होती है। रोपाई के लिए कम से कम 10 से 12 इंच गहराई और चौड़ाई वाला पात्र चुनना सबसे उपयुक्त रहता है। इसके साथ ही गमले के निचले हिस्से में अतिरिक्त जल की निकासी के लिए छेद होना बेहद जरूरी है ताकि जड़ें सड़ने से बची रहें।
मिट्टी का मिश्रण तैयार करते समय साधारण बगीचे की मिट्टी में वर्मी कंपोस्ट या पूरी तरह सड़ी हुई पुरानी गोबर की खाद का मिश्रण करना चाहिए। खाद युक्त यह उपजाऊ मिट्टी पौधे की जड़ों को भीतर तक फैलने के लिए पर्याप्त जगह मुहैया कराती है और उन्हें निरंतर पोषण भी देती है।
पौधा रोपने का सही तरीका
लेमन ग्रास को बीज के माध्यम से उगाने की अपेक्षा जड़ों वाले तने या नर्सरी से खरीदे गए छोटे पौधे से लगाना कहीं अधिक सरल और सुरक्षित रहता है। नर्सरी से स्वस्थ पौधा लाकर गमले में बिठाते वक्त इस बात की सावधानी बरतें कि जड़ें मिट्टी में अच्छी तरह दब जाएं, लेकिन तने को अत्यधिक गहराई में न धंसाया जाए। पौधे को मिट्टी में स्थापित करने के बाद ऊपर से हल्का पानी छिड़कना चाहिए। कुछ ही दिनों के भीतर इसमें से नई और चमकदार पत्तियां फूटने लगती हैं।
धूप और कड़ाके की ठंड से हिफाजत
पौधे के समुचित विकास और पत्तियों के फैलाव के लिए पर्याप्त धूप मिलना बेहद अनिवार्य है। इसे ऐसे खुले स्थान पर रखना चाहिए जहां हर रोज कम से कम 5 से 6 घंटे की सीधी धूप आती हो। इस लिहाज से घर की बालकनी या छत का कोना सबसे बेहतर साबित होता है।
हालांकि शीत लहर और अत्यधिक पाले के दिनों में पौधे को थोड़ा संभालना पड़ता है। अत्यधिक ठंडा तापमान और पाला इसकी वृद्धि को नुकसान पहुंचा सकते हैं, इसलिए पारा काफी नीचे लुढ़कने पर गमले को ऐसी सुरक्षित जगह पर खिसका लेना चाहिए जहां कड़ाके की ठंडी हवा सीधे न लगे और पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी भी मिलती रहे।
सिंचाई और पोषण की नियमित देखभाल
लेमन ग्रास की देखभाल में पानी की संतुलित मात्रा तय करना सबसे निर्णायक पहलू माना जाता है। मिट्टी की ऊपरी सतह में हल्की नमी हमेशा बनी रहनी चाहिए, परंतु गमले के भीतर कीचड़ या पानी का जमाव बिल्कुल नहीं होना चाहिए। गर्मियों के मुकाबले सर्दियों में पौधे को पानी की जरूरत काफी कम पड़ती है। इसी वजह से बिना सोचे-समझे रोजाना पानी डालने के स्थान पर पहले अंगुलियों से मिट्टी की ऊपरी सतह छूकर देखनी चाहिए। जब मिट्टी सूखी महसूस हो, तभी इसमें नया पानी डालें।
गमले को हरा-भरा और घना बनाए रखने के लिए समय-समय पर निचली सूखी या पीली पड़ चुकी पत्तियों की छंटाई करते रहना चाहिए। पौधे को निरंतर पोषण देने के लिए महीने में एक बार थोड़ी सी मात्रा में वर्मी कंपोस्ट या जैविक खाद डालना फायदेमंद रहता है। अगर पत्तियां बहुत लंबी और घनी होकर झुकने लगें, तो उनकी हल्की कटाई भी की जा सकती है ताकि नई शाखाएं तेजी से निकल सकें।
ताजी पत्तियों से हर्बल ग्रीन टी तैयार करना
पौधे से पत्तियां तोड़ने से पहले उसके पूर्ण रूप से विकसित और मजबूत होने की प्रतीक्षा करनी चाहिए। जब पौधा अच्छी तरह बढ़ जाए, तब आवश्यकता के अनुसार केवल बाहरी पत्तियों को आधार के पास से काटा जा सकता है।
चाय बनाने के लिए तोड़ी गई ताजी पत्तियों को पहले साफ पानी से अच्छी तरह धो लें और फिर चाकू से छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें। इन कटी हुई पत्तियों को उबलते हुए गर्म पानी में कुछ मिनट के लिए डालकर छोड़ दें ताकि उनका अर्क और नींबू जैसी खुशबू पानी में पूरी तरह घुल जाए। इसके बाद छलनी से पानी को छानकर कप में निकाल लें। पेय का स्वाद अधिक मनभावन बनाने के लिए इसमें इच्छा अनुसार शहद या नींबू की कुछ बूंदें भी मिलाई जा सकती हैं।


















