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पश्चिम एशिया में कूटनीतिक उम्मीदों के बीच यूरो में बढ़त, पर फ्रांसीसी कर्ज संकट से तेजी सीमितबाज़ार
2 नव॰ 2026, 7:23 am (4 मिनट पहले)· 0

पश्चिम एशिया में कूटनीतिक उम्मीदों के बीच यूरो में बढ़त, पर फ्रांसीसी कर्ज संकट से तेजी सीमित

ईरान के साथ कूटनीतिक वार्ता की नई उम्मीदों के कारण अमेरिकी डॉलर पर दबाव देखा गया, जिससे यूरो को सहारा मिला। हालांकि, फ्रांस के गहराते राजकोषीय संकट और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की आशंकाओं ने इस तेजी को सीमित कर दिया।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में कारोबारी सप्ताह की शुरुआत सकारात्मक संकेतों के साथ हुई है, जहां एशियाई सत्र के दौरान यूरो ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले हल्की बढ़त दर्ज की। ईरान से जुड़े कूटनीतिक समाधान की ताजा उम्मीदों ने सुरक्षित निवेश माने जाने वाले अमेरिकी डॉलर पर दबाव बनाया है। हालांकि, बाजार में किसी बड़े एकतरफा उछाल की कमी साफ दिखाई दे रही है, क्योंकि यूरोजोन की आंतरिक आर्थिक चुनौतियां और अमेरिका से जुड़े सख्त मौद्रिक अनुमान निवेशकों को सतर्क रहने पर मजबूर कर रहे हैं। वर्तमान में EUR/USD जोड़ी 1.1150 के स्तर से थोड़ा ऊपर कारोबार कर रही है, जहां परस्पर विरोधी वैश्विक कारक कीमतों की दिशा तय कर रहे हैं।

डॉलर पर कूटनीतिक दबाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के संकेत

वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की दिशा मुख्य रूप से दो प्रमुख मोर्चों से संचालित हो रही है। एक तरफ पश्चिम एशिया में तनाव घटने और कूटनीतिक बातचीत के आगे बढ़ने की संभावना ने निवेशकों के जोखिम लेने की क्षमता को बढ़ाया है, जिससे डॉलर की सुरक्षित पनाहगाह के तौर पर मांग घटी है। दूसरी ओर, हालिया अमेरिकी व्यापक आर्थिक आंकड़े यह दिखाते हैं कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत बनी हुई है और मूल्य दबाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

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सीएमई ग्रुप के फेडवॉच टूल के ताजा आंकड़ों के अनुसार, मुद्रा बाजार के कारोबारी दिसंबर में अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा उधार लेने की लागत में एक और बढ़ोतरी किए जाने की करीब 75% संभावना जता रहे हैं। इस मजबूत उम्मीद के चलते डॉलर को निचले स्तरों पर ठोस तकनीकी सहारा मिल रहा है। इस पृष्ठभूमि में निवेशक तुरंत नए बड़े दांव लगाने से बच रहे हैं और आने वाले महत्वपूर्ण आंकड़ों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

फ्रांस का बढ़ता कर्ज और राजनीतिक अनिर्णय का माहौल

यूरो की इस सीमित बढ़त के रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा यूरोजोन की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था फ्रांस से आ रहा है। फ्रांस में बढ़ते सार्वजनिक कर्ज स्तर और आगामी चुनावी परिदृश्य से पहले राजनीतिक गतिरोध गहरा गया है। इस वित्तीय और नीतिगत अनिश्चितता ने वित्तीय बाजारों में गंभीर चिंताएं पैदा की हैं, जो यूरो के किसी भी आक्रामक उछाल पर ऊपरी स्तरों पर लगाम लगा रही हैं।

बाजार सहभागी अब तात्कालिक संकेतों के लिए यूरोजोन के अंतिम विनिर्माण पीएमआई आंकड़ों पर नजरें गड़ाए हुए हैं। इसके तुरंत बाद अमेरिकी आईएसएम विनिर्माण पीएमआई के आंकड़े सामने आएंगे। हालांकि, पूरे हफ्ते के दौरान निवेशकों की सबसे बड़ी नजर शुक्रवार को जारी होने वाली अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल यानी रोजगार रिपोर्ट पर टिकी रहेगी, जिससे फेडरल रिजर्व के अगले नीतिगत कदमों का स्पष्ट खाका तैयार होगा।

वैश्विक व्यापार और विदेशी मुद्रा विनिमय में यूरो की भूमिका

यूरोपीय संघ के 20 सदस्य देशों की साझा मुद्रा के रूप में यूरो अंतरराष्ट्रीय वित्त तंत्र का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। यह अमेरिकी डॉलर के बाद दुनिया की दूसरी सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली मुद्रा है। वैश्विक विदेशी मुद्रा विनिमय में यूरो का प्रभुत्व व्यापक स्तर पर दर्ज किया जाता है। वर्ष 2022 के ऐतिहासिक लेनदेन आंकड़ों के मुताबिक, सभी वैश्विक मुद्रा विनिमय सौदों में यूरो की हिस्सेदारी 31% रही थी, जिसमें दैनिक औसत कारोबार 2.2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक दर्ज किया गया था।

विदेशी मुद्रा विनिमय में EUR/USD जोड़ी वैश्विक स्तर पर सबसे लोकप्रिय और सबसे भारी कारोबार वाली मुद्रा जोड़ी है, जो कुल वैश्विक विदेशी मुद्रा सौदों का लगभग 30% हिस्सा कवर करती है। इसके बाद अन्य प्रमुख क्रॉस-करेंसी जोड़ियों का स्थान आता है, जिनमें EUR/JPY की हिस्सेदारी 4%, EUR/GBP की हिस्सेदारी 3% और EUR/AUD की हिस्सेदारी करीब 2% मापी गई है। यह पैमाना दर्शाता है कि यूरोपीय आर्थिक परिदृश्य में मामूली फेरबदल भी दुनिया भर के वित्तीय प्रवाह को सीधे प्रभावित करता है।

यूरोपीय सेंट्रल बैंक का अधिदेश और ब्याज दर नीति

जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में स्थित यूरोपीय सेंट्रल बैंक पूरे यूरोजोन के लिए केंद्रीय रिजर्व बैंक की भूमिका निभाता है। ईसीबी ही मौद्रिक नीति का प्रबंधन करता है और क्षेत्र के लिए मानक ब्याज दरें निर्धारित करता है। ईसीबी का प्राथमिक संवैधानिक अधिदेश मूल्य स्थिरता बनाए रखना है, जिसका व्यावहारिक अर्थ मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना अथवा आर्थिक सुस्ती के समय विकास को गति देना होता है। इस संतुलन को साधने के लिए बैंक का मुख्य साधन नीतिगत ब्याज दरों में कटौती या वृद्धि करना है।

आमतौर पर अन्य केंद्रीय बैंकों की तुलना में अपेक्षाकृत ऊंची ब्याज दरें या भविष्य में दरें बढ़ने की उम्मीदें यूरो के मूल्य को मजबूत करती हैं, क्योंकि यह वैश्विक निवेशकों को यूरोजोन में पूंजी लगाने के लिए प्रोत्साहित करती हैं। इसके विपरीत, ब्याज दरों में कमी से मुद्रा कमजोर होती है। ईसीबी गवर्निंग काउंसिल की नीतिगत बैठकें वर्ष में आठ बार आयोजित की जाती हैं। इन महत्वपूर्ण बैठकों में निर्णय यूरोजोन के सदस्य राष्ट्रीय केंद्रीय बैंकों के प्रमुखों और छह स्थायी सदस्यों द्वारा मिलकर लिए जाते हैं, जिनमें यूरोपीय सेंट्रल बैंक की प्रमुख क्रिस्टीन लेगार्ड शामिल हैं।

आर्थिक संकेतक, मुद्रास्फीति और व्यापार संतुलन का प्रभाव

यूरोजोन में मुद्रास्फीति की निगरानी उपभोक्ता मूल्यों के सामंजस्यपूर्ण सूचकांक यानी एचआईसीपी के माध्यम से की जाती है, जो यूरो के स्वास्थ्य को मापने का सबसे संवेदनशील पैमाना है। यदि मुद्रास्फीति ईसीबी के निर्धारित 2% के वार्षिक लक्ष्य से अधिक बढ़ती है, तो केंद्रीय बैंक को बढ़ती महंगाई पर अंकुश लगाने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने के लिए बाध्य होना पड़ता है।

इसके अलावा सकल घरेलू उत्पाद, विनिर्माण और सेवा पीएमआई, रोजगार के आंकड़े और उपभोक्ता भावना सर्वेक्षण जैसे समष्टिगत संकेतक एकल मुद्रा की दिशा निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आर्थिक आंकड़े मजबूत रहने पर विदेशी निवेश बढ़ता है और केंद्रीय बैंक को सख्त दरें बनाए रखने का आधार मिलता है, जिससे मुद्रा चढ़ती है। कमजोर आंकड़ों की स्थिति में यूरो में गिरावट की संभावना प्रबल हो जाती है। विशेष रूप से यूरोजोन की चार सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन के आंकड़े सर्वाधिक संवेदनशील होते हैं, क्योंकि ये चारों देश मिलकर कुल यूरोजोन अर्थव्यवस्था का लगभग 75% हिस्सा बनाते हैं।

इसके साथ ही व्यापार संतुलन का आंकड़ा भी मुद्रा मूल्यांकन में निर्णायक साबित होता है। यह संकेतक किसी निश्चित अवधि में किसी देश द्वारा अपने निर्यात से की गई कमाई और आयात पर किए गए खर्च के शुद्ध अंतर को मापता है। जब यूरोजोन के देश वैश्विक बाजार में उच्च मांग वाले उत्पादों का बड़े पैमाने पर निर्यात करते हैं, तो विदेशी खरीदारों को उन सामानों के भुगतान के लिए यूरो खरीदना पड़ता है, जिससे मुद्रा में प्राकृतिक मांग पैदा होती है। सकारात्मक व्यापार संतुलन मुद्रा को ताकत देता है, जबकि व्यापार घाटा मुद्रा पर नकारात्मक असर डालता है।

अन्य प्रमुख मुद्राओं और सर्राफा बाजार का हाल

सप्ताह के पहले दिन अन्य विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में भी कूटनीतिक गतिविधियों का असर देखा गया। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने एशियाई सत्र के दौरान अपनी शुरुआती गिरावट की भरपाई करते हुए बढ़त हासिल की। ईरान कूटनीति पर नए सिरे से जगी आशाओं ने जोखिम के प्रति संवेदनशील ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मजबूती दी, हालांकि गुरुवार को छुए गए एक महीने के उच्च स्तर से यह नीचे रहा क्योंकि निवेशक रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के आगामी ब्याज दर फैसले का इंतजार कर रहे हैं।

दूसरी ओर, USD/JPY जोड़ी ने पिछले सत्र की तेजी को आगे बढ़ाते हुए 157.00 से नीचे के स्तरों से उबरकर सकारात्मक गति पकड़ी। बैंक ऑफ जापान द्वारा अगली ब्याज दर वृद्धि के समय को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण जापानी येन दबाव में रहा, जबकि कूटनीतिक उम्मीदों और जापानी अधिकारियों द्वारा बाजार में संभावित हस्तक्षेप की अटकलों ने इस मुद्रा जोड़ी की तेजी को सीमित दायरे में रखा। वहीं सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों ने नए हफ्ते की शुरुआत हरे निशान में की और शुक्रवार को अक्टूबर 2025 के बाद के सबसे निचले स्तर से मामूली सुधार दिखाया। हालांकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की 75% संभावना ने गैर-ब्याज वाली इस सुरक्षित धातु पर दबाव बनाए रखा है।

सवाल-जवाब

सोमवार को EUR/USD मुद्रा जोड़ी में किस स्तर पर कारोबार हो रहा था?
एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान EUR/USD मुद्रा जोड़ी 1.1150 के स्तर से थोड़ा ऊपर कारोबार कर रही थी।
अमेरिकी डॉलर पर दबाव क्यों देखा गया?
ईरान के साथ कूटनीतिक बातचीत के नए संकेतों और पश्चिम एशिया में तनाव घटने की उम्मीदों ने सुरक्षित पनाहगाह डॉलर की मांग कम कर दी।
दिसंबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की कितनी संभावना जताई जा रही है?
सीएमई ग्रुप के फेडवॉच टूल के अनुसार, कारोबारी दिसंबर में फेडरल रिजर्व द्वारा उधारी दरें बढ़ाने की लगभग 75% संभावना मान रहे हैं।
यूरो की बढ़त को सीमित करने वाला मुख्य कारक क्या रहा?
फ्रांस के गहराते कर्ज संकट और आगामी चुनावों से पहले बने राजनीतिक गतिरोध की चिंताओं ने यूरो की बढ़त को सीमित किया।
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में यूरो और EUR/USD की कितनी हिस्सेदारी है?
यूरो 2022 में सभी विदेशी मुद्रा सौदों के 31% हिस्से के साथ दूसरी सबसे बड़ी मुद्रा रही, जबकि EUR/USD जोड़ी कुल वैश्विक सौदों के लगभग 30% का प्रतिनिधित्व करती है।
इस सप्ताह निवेशकों की नजर किन प्रमुख आर्थिक आंकड़ों पर टिकी है?
बाजार प्रतिभागी यूरोजोन और अमेरिका के विनिर्माण पीएमआई आंकड़ों के अलावा शुक्रवार को जारी होने वाली अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल रिपोर्ट पर नजर रख रहे हैं।
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