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वाशिंगटन की एल्व्हा नदी से हटे सौ साल पुराने दो विशाल बांध, साल्मन मछलियों और कुदरत की हुई ऐतिहासिक वापसीअमेरिका
19 सित॰ 2026, 5:01 pm (41 दिन पहले)· 4

वाशिंगटन की एल्व्हा नदी से हटे सौ साल पुराने दो विशाल बांध, साल्मन मछलियों और कुदरत की हुई ऐतिहासिक वापसी

अमेरिका के वाशिंगटन राज्य में सौ साल तक दो विशाल पनबिजली बांधों में कैद रही 45 मील लंबी एल्व्हा नदी को मुक्त करा दिया गया है। दुनिया के इस सबसे बड़े बांध हटाओ अभियान के बाद साल्मन मछलियों और स्थानीय जनजाति की सदियों पुरानी विरासत दोबारा लौट आई है।

प्रकृति जब इंसानी बंदिशों से आजाद होती है, तो उसके दोबारा संवरने की रफ्तार हैरान कर देने वाली होती है। संयुक्त राज्य अमेरिका के वाशिंगटन राज्य में स्थित ओलंपिक प्रायद्वीप की गोद में बहने वाली 45 मील लंबी एल्व्हा नदी इसका सबसे जीवंत उदाहरण बनकर उभरी है। लगभग एक पूरी सदी तक कंक्रीट की विशालकाय दीवारों में कैद रहने के बाद जब इस नदी को मुक्त किया गया, तो वहां सिर्फ पानी का बहाव ही नहीं लौटा, बल्कि एक मरा हुआ पारिस्थितिकी तंत्र फिर से सांस लेने लगा। बंजर नजर आने वाले इलाके में हरियाली की नई चादर बिछ गई और जलीय जीवों के लौटने से दशकों पुराना सन्नाटा टूट गया।

औद्योगिक विकास की होड़ और नदी पर दो बड़ी कंक्रीट की दीवारें

इस कहानी की शुरुआत लगभग 110 साल पहले हुई थी, जब कनाडा के कारोबारी थॉमस एल्डवोल ने वाशिंगटन के तेजी से उभरते शहर पोर्ट एंजिल्स को बिजली मुहैया कराने की योजना बनाई। उस दौर में पोर्ट एंजिल्स में लकड़ी की बड़ी मिलें और नए कारखाने स्थापित हो रहे थे, जिनकी विशाल ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए नदियों के पानी को रोकने की तैयारी शुरू हुई। सरकारी मंजूरी हासिल करने के बाद थॉमस एल्डवोल ने एल्व्हा नदी पर पहले बांध का निर्माण कार्य वर्ष 1910 में शुरू कराया। तीन साल की कड़ी मेहनत के बाद वर्ष 1913 में एल्व्हा डैम बनकर पूरी तरह तैयार हो गया।

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शहर और उद्योगों की बिजली की भूख यहीं शांत नहीं हुई। जैसे-जैसे ऊर्जा की मांग में इजाफा हुआ, पहले बांध से करीब 8 मील ऊपर की तरफ एक और बांध बनाने का फैसला किया गया। वर्ष 1927 में नदी के ऊपरी हिस्से में ग्लाइन्स कैन्यन डैम नाम का दूसरा विशालकाय ढांचा खड़ा कर दिया गया। इन दोनों पनबिजली बांधों ने उस दौर में स्थानीय कारखानों को बिजली दी और शहर की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने में भूमिका निभाई, लेकिन नदी की अपनी प्राकृतिक व्यवस्था के लिए यह कदम पूरी तरह विनाशकारी साबित हुआ।

मछलियों का उजड़ता संसार और रेत की नाकेबंदी

बीसवीं सदी की शुरुआत में जब इन बांधों की रूपरेखा तैयार की गई, तब नदी के पारिस्थितिकी तंत्र और समुद्री जीवन के संरक्षण को लेकर कोई संवेदनशीलता नहीं थी। इंजीनियरों ने बांध की दीवारों के बीच मछलियों के सुरक्षित आवागमन के लिए कोई रास्ता या फिश पैसेज नहीं बनाया। इस अनदेखी की सबसे भारी कीमत एनाड्रोमस प्रजाति की मछलियों को चुकानी पड़ी। ये अनोखे जीव अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा समुद्र के खारे पानी में बिताते हैं, लेकिन वंश वृद्धि और अंडे देने के लिए उन्हें नदियों के मीठे पानी में मीलों ऊपर तैरकर आना पड़ता है।

स्वादिष्ट और पोषक साल्मन मछलियां इसी प्रजाति से ताल्लुक रखती हैं। अलास्का के बाहर एल्व्हा नदी कभी साल्मन का सबसे समृद्ध ठिकाना मानी जाती थी। बांध बनने से पहले ये मछलियां नदी के बहाव के विपरीत तैरते हुए पहाड़ों की तलहटी तक पहुंचती थीं और वहां सुरक्षित ठिकानों पर अंडे देती थीं। बांध खड़े होते ही उनका यह प्राकृतिक सफर हमेशा के लिए छिन गया। उनका पूरा दायरा नदी के मुहाने से केवल 5 मील के सीमित दायरे में सिमट कर रह गया।

इसके साथ ही पहाड़ों से पानी के साथ बहकर आने वाली उपजाऊ मिट्टी, रेत और गाद बांधों के विशाल जलाशयों में कैद होने लगी। नदी के निचले हिस्से तक गाद और नई रेत का पहुंचना बंद हो गया, जिसके चलते नदी के किनारों का कटाव तेज हो गया। पत्थरों और बजरी से बने वे प्राकृतिक गड्ढे नष्ट हो गए जहां साल्मन मछलियां अपने अंडे सुरक्षित रखती थीं। नदी का निचला हिस्सा धीरे-धीरे पथरीला और बेजान होता चला गया।

लोअर एल्व्हा क्लालम जनजाति की संस्कृति पर गहरा आघात

नदी के सूखते जीवन का सबसे मार्मिक और सीधा असर लोअर एल्व्हा क्लालम ट्राइब पर पड़ा। यह मूल अमेरिकी जनजाति सदियों से एल्व्हा नदी के तट पर फल-फूल रही थी और उसकी पूरी जीवनशैली साल्मन मछलियों के इर्द-गिर्द बुनी हुई थी। साल्मन उनके लिए सिर्फ भोजन की थाली का हिस्सा नहीं थीं, बल्कि उनकी सांस्कृतिक पहचान, धार्मिक मान्यताओं, रिवाजों और सामाजिक ताने-बाने का सबसे अहम आधार थीं।

जब नदी से मछलियां लगभग गायब हो गईं, तो इस जनजाति की पीढ़ियों पुरानी परंपराएं बिखरने लगीं। अपने अधिकारों और अपनी पवित्र नदी को बचाने के लिए जनजाति के लोगों ने दशकों तक कानूनी और सामाजिक लड़ाई लड़ी। उन्होंने पर्यावरणविदों और वैज्ञानिकों को एकजुट किया और अमेरिकी प्रशासन को यह समझाने में दशकों बिता दिए कि नदी का प्राकृतिक प्रवाह बहाल करना सिर्फ पर्यावरण ही नहीं, बल्कि इंसानी न्याय के लिए भी जरूरी है।

1992 का ऐतिहासिक कानून और मुक्ति का खाका

दशकों के कड़े संघर्ष और जन-आंदोलन के बाद अमेरिकी संसद ने हस्तक्षेप किया। वर्ष 1992 में एक ऐतिहासिक विधेयक पारित हुआ, जिसे एल्व्हा रिवर इकोसिस्टम एंड फिशरीज रीस्टोरेशन एक्ट का नाम दिया गया। इस कानून ने अमेरिका के गृह मंत्री को यह वैधानिक अधिकार दिया कि वे दोनों निजी पनबिजली बांधों का स्वामित्व सरकारी नियंत्रण में लें।

कानून का मुख्य मकसद एल्व्हा नदी के प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र और संकटग्रस्त मछलियों की आबादी को उनके मूल स्वरूप में वापस लौटाना था। इसके लिए विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन, अदालती प्रक्रियाएं और अरबों रुपये के वित्तीय बजट तय करने में लंबा वक्त लगा। कई साल की तकनीकी तैयारियों के बाद आखिरकार वह क्षण तय हुआ जब नदी को उसकी बेड़ियों से आजाद किया जाना था।

दुनिया का सबसे बड़ा बांध हटाने का अभियान

पर्यावरण सुधार के वैश्विक इतिहास में वर्ष 2011 एक युगांतरकारी मोड़ लेकर आया। इसी साल एल्व्हा नदी से दोनों विशाल बांधों को चरणबद्ध तरीके से ढहाने का विशाल कार्य शुरू किया गया। यह आधुनिक मानव इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा बांध हटाने वाला प्रोजेक्ट बना। दोनों बांधों के पीछे लगभग 100 वर्षों से जमा हुई गाद और रेत का परिमाण लगभग 2.4 करोड़ क्यूबिक यार्ड पहुंच चुका था। यह गाद इतनी अधिक थी कि इससे 8 बड़े खेल स्टेडियम जमीन से लेकर उनकी छत तक पूरी तरह भरे जा सकते थे।

जैसे ही दोनों विशाल कंक्रीट की दीवारों को तोड़ा गया, पानी के तेज और मुक्त बहाव ने दशकों से जमी इस विशाल गाद को बहाकर समुद्र की ओर धकेलना शुरू कर दिया। कुछ ही समय में नदी के मुहाने पर नया रेतीला तट उभर आया, जो दशकों पहले पूरी तरह समाप्त हो चुका था। मुहाने का विस्तार हुआ और नए समुद्री जीवों के पनपने के लिए अनुकूल दलदली और रेतीली जमीन तैयार हो गई।

नदी के मुक्त होते ही साल्मन मछलियों ने अपनी सदियों पुरानी याददाश्त के सहारे एक बार फिर पहाड़ों के ऊपरी हिस्सों की तरफ तैरना शुरू कर दिया। जिन इलाकों में एक सदी तक सन्नाटा पसरा रहा, वहां पानी की कलकल और मछलियों की छलांगों ने साबित कर दिया कि अगर इंसान अपनी गलतियां सुधारने का संकल्प ले, तो प्रकृति खुद को दोबारा जिंदा करने में जरा भी देर नहीं लगाती।

सवाल-जवाब

एल्व्हा नदी कहां स्थित है और इसकी कुल लंबाई कितनी है?
एल्व्हा नदी संयुक्त राज्य अमेरिका के वाशिंगटन राज्य में स्थित ओलंपिक प्रायद्वीप में बहती है और इसकी लंबाई 45 मील है।
एल्व्हा नदी पर कौन से दो बांध बनाए गए थे?
इस नदी पर वर्ष 1913 में बनकर तैयार हुआ एल्व्हा डैम और वर्ष 1927 में बना ग्लाइन्स कैन्यन डैम स्थित थे।
ये बांध मूल रूप से क्यों बनाए गए थे?
कनाडा के कारोबारी थॉमस एल्डवोल ने पोर्ट एंजिल्स शहर के नए कारखानों और लकड़ी की मिलों को बिजली आपूर्ति करने के लिए इन बांधों का निर्माण करवाया था।
बांधों से साल्मन मछलियों को क्या नुकसान पहुंचा था?
बांधों में कोई फिश पैसेज नहीं होने से साल्मन मछलियों का दायरा 45 मील से घटकर मात्र 5 मील रह गया और वे अंडे देने पहाड़ों की ओर नहीं जा सकीं।
इन बांधों के कारण किस स्थानीय जनजाति की आजीविका प्रभावित हुई थी?
स्थानीय लोअर एल्व्हा क्लालम ट्राइब इन बांधों के कारण सबसे ज्यादा प्रभावित हुई क्योंकि उनकी संस्कृति और जीवन साल्मन पर निर्भर था।
बांधों को हटाने का ऐतिहासिक कानून कब पास हुआ था?
अमेरिकी संसद ने वर्ष 1992 में एल्व्हा रिवर इकोसिस्टम एंड फिशरीज रीस्टोरेशन एक्ट पास करके इन बांधों को हटाने का रास्ता साफ किया था।
बांध हटाने का काम किस वर्ष शुरू हुआ और इसमें कितनी गाद निकली?
बांधों को ध्वस्त करने का प्रोजेक्ट वर्ष 2011 में शुरू हुआ और इसके पीछे जमा करीब 2.4 करोड़ क्यूबिक यार्ड गाद और रेत बाहर निकली।
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