पूर्वी यूरोप के युद्धक्षेत्र में समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं, जहाँ अमेरिका के नए रुख ने यूक्रेन के लिए रणनीतिक और तकनीकी मोर्चों पर भारी संकट खड़ा कर दिया है। यूक्रेन को अब तक मिलने वाले पश्चिमी सहयोग पर अनिश्चितता के बादल गहरा गए हैं, क्योंकि वाशिंगटन ने मॉस्को के साथ सीधे ऊर्जा कारोबार की राह चुन ली है। दूसरी ओर, अग्रिम मोर्चे पर यूक्रेनी सेना की रीढ़ माने जाने वाले उपग्रह संचार नेटवर्क की गति को अत्यधिक घटा दिया गया है। रक्षा और कूटनीति के इन दोहरे फैसलों ने युद्ध की दिशा को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया है, जिससे कीव की रक्षात्मक और आक्रामक दोनों क्षमताएं गंभीर रूप से सीमित हो गई हैं।
स्टारलिंक पर बंदिशों से चरमराई यूक्रेनी सैन्य कमान
युद्धक्षेत्र में यूक्रेनी बलों के संचालन का एक बहुत बड़ा हिस्सा एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक के इंटरनेट नेटवर्क पर निर्भर रहा है। इस नेटवर्क की गति में अचानक की गई भारी कटौती ने सेना के मिलिट्री-ग्रेड सैटेलाइट टर्मिनलों के कामकाज को लगभग ठप कर दिया है। ये टर्मिनल सिर्फ साधारण संपर्क के साधन नहीं हैं, बल्कि इनके जरिए मानवरहित हवाई वाहनों यानी ड्रोनों को सटीक दिशा दी जाती है और हवाई सुरक्षा प्रणाली का समन्वय किया जाता है। गति कम होने का सीधा नतीजा यह निकला है कि यूक्रेन के लिए रूसी ठिकानों पर निगरानी रखना अथवा सीमा पार सटीक ड्रोन हमले करना बेहद कठिन हो गया है। साथ ही, आसमान से बरसने वाले रूसी ड्रोनों और मिसाइलों को ट्रैक करके उन्हें नष्ट करने की वायु रक्षा प्रणाली की क्षमता भी बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे सेना अपने ही क्षेत्र की रक्षा करने में असमर्थ महसूस कर रही है।
स्टारशील्ड पर पाबंदी और व्हाइट हाउस का अधिकार
जब नेटवर्क में आई इस गंभीर रुकावट को लेकर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने सीधे एलन मस्क से संपर्क किया, तो स्थिति का दूसरा पहलू सामने आया। मस्क ने स्पष्ट किया कि स्पेसएक्स की विशेष सैन्य उपग्रह सेवा स्टारशील्ड पर यह नियंत्रण उनकी निजी पहल नहीं है। उन्होंने कहा कि यह फैसला सीधे अमेरिकी राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र से संबंधित है और शीर्ष कमान के निर्देशों के तहत ही उठाया गया है। इस खुलासे के बाद जेलेंस्की ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे एक बहुत बड़ा विश्वासघात करार दिया। उनका कहना है कि इस फैसले के मानवीय और रणनीतिक परिणाम भयानक होंगे और हजारों लोगों की जानें जोखिम में पड़ जाएंगी। यूक्रेनी नेतृत्व का मानना है कि ऐसे नाज़ुक मोड़ पर तकनीकी समर्थन छीन लेना युद्ध के मैदान में सीधे तौर पर उन्हें असहाय छोड़ने जैसा है।
रूसी तेल की खरीद और पुरानी नीतियों में बदलाव
तकनीकी झटके के साथ-साथ कूटनीतिक धरातल पर भी भारी उलटफेर देखने को मिला है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ने रूस से खुद तेल खरीदने की घोषणा कर दी है। यह कदम वाशिंगटन की अपनी ही पुरानी नीति से बिल्कुल उलट है, जिसके तहत अमेरिका दुनिया भर के देशों को रूसी ऊर्जा उत्पाद खरीदने से रोकता रहा था। इससे पहले अमेरिकी प्रशासन का कड़ा रुख था कि रूस से कच्चा तेल खरीदने वाला कोई भी मुल्क वास्तव में यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में आर्थिक मदद पहुंचा रहा है। इसी तर्क के आधार पर भारत और चीन जैसे बड़े देशों पर सवाल उठाए गए थे और उनके व्यापार पर कड़े टैरिफ लगाए गए थे। अब वही अमेरिका खुद रूसी ऊर्जा का बड़ा खरीदार बन चुका है, जिसने वैश्विक कूटनीति में कई तरह के विरोधाभास पैदा कर दिए हैं।
घातक हवाई हमले और नेतृत्व बदलने की मांग
इस ऊर्जा समझौते के तुरंत बाद रूसी सेना ने यूक्रेन के ठिकानों पर भीषण हवाई हमले किए, जिनमें कम से कम 20 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। इस घटना ने साबित कर दिया है कि रणनीतिक स्तर पर ढील मिलते ही मॉस्को ने अपने आक्रामक तेवर और ज्यादा कड़े कर लिए हैं। इसके अलावा अमेरिकी प्रशासन की तरफ से यह सुझाव भी सार्वजनिक रूप से सामने आया कि यूक्रेन को अपना नया राष्ट्रपति चुन लेना चाहिए। एक तरफ बुनियादी तकनीकी सहायता में कटौती और दूसरी तरफ नेतृत्व परिवर्तन के ऐसे बयानों ने यूक्रेन के शीर्ष नेतृत्व को असहज स्थिति में ला खड़ा किया है, जहाँ वे बिना मजबूत विदेशी मदद के अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ने पर विवश नजर आ रहे हैं।



















