देश के भीतर वोट चोरी और मुख्य चुनाव आयुक्त के मुद्दे पर विपक्षी दलों के जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इसी क्रम में भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने विपक्ष के इन कदमों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि देश में चल रहे विभिन्न आंदोलनों और विरोध के पीछे अंतरराष्ट्रीय शक्तियां सक्रिय हैं और इसके पीछे अरबपति बिजनेसमैन एलन मस्क की भूमिका है। यह बयान उन्होंने उन्नाव जिले के पुरवा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत सरवई गांव में एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान दिया, जहां वे अपने पूर्वजों द्वारा स्थापित मंदिर के जीर्णोद्धार समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने पहुंचे थे।
आंदोलनों की टाइमिंग और विदेशी हितों पर उठाए सवाल
कार्यक्रम के दौरान संवाददाताओं से बातचीत करते हुए पूर्व सांसद ने देशव्यापी प्रदर्शनों को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि देश के खिलाफ एक बड़ा षड्यंत्र रचा जा रहा है, जिसमें कई तरह के आंदोलन विदेशी व्यापारिक हितों और एलन मस्क के इशारे पर प्रायोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन विरोध प्रदर्शनों की टाइमिंग और तौर-तरीके स्पष्ट संकेत देते हैं कि इनके माध्यम से भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचाने की सुनियोजित योजना पर काम चल रहा है।
पड़ोसी देशों से तुलना और संवैधानिक संस्थाओं पर टिप्पणी
बृजभूषण शरण सिंह ने भारत की स्थिति की तुलना पड़ोसी मुल्कों से किए जाने पर भी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि आज जानबूझकर भारत की तुलना पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों के साथ की जा रही है, जिसे किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही उन्होंने विपक्षी प्रदर्शनकारियों पर तंज कसते हुए आरोप लगाया कि देश की न्यायपालिका तथा अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर अनावश्यक दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को धमकाने के अंदाज में मार्च निकालना देश के लोकतांत्रिक ढांचे पर सीधा प्रहार करने जैसा है, हालांकि देश की जनता इन सभी विदेशी साजिशों को पूरी तरह समझ रही है।
धार्मिक अनुष्ठान और सांस्कृतिक संदेश
सरवई गांव में आयोजित इस भव्य धार्मिक अनुष्ठान के अवसर पर भारी संख्या में स्थानीय ग्रामीण और पूर्व सांसद के समर्थक उपस्थित रहे। मंदिर के जीर्णोद्धार और लोकार्पण कार्यक्रम में जनता को संबोधित करते हुए उन्होंने अपनी सांस्कृतिक तथा धार्मिक जड़ों से निरंतर जुड़े रहने का संदेश दिया। इस धार्मिक आयोजन के बीच दिए गए उनके राजनीतिक बयानों ने सियासी हलचल बढ़ा दी है और पूरे मामले को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।



















