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अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित जलविद्युत परियोजना पर विवाद, किसान संगठन का दावा 67 ग्रामीण घायलअरुणाचल प्रदेश
6 अक्तू॰ 2026, 9:03 pm (27 मिनट पहले)· 0

अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित जलविद्युत परियोजना पर विवाद, किसान संगठन का दावा 67 ग्रामीण घायल

अरुणाचल प्रदेश में सियांग नदी पर प्रस्तावित 11,000 मेगावाट की जलविद्युत परियोजना के सर्वे के विरोध में 4 अक्टूबर को हुई झड़पों में किसान संगठन ने 67 ग्रामीणों के घायल होने की बात कही है।

अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध तेज हो गया है। इस जलविद्युत परियोजना के विरोध का नेतृत्व कर रहे सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम ने दावा किया है कि 4 अक्टूबर को हुई हिंसक झड़पों में 67 ग्रामीण घायल हुए हैं। इससे पहले कानून व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों ने 8 पुलिसकर्मियों के घायल होने तथा दो महिलाओं समेत कुल 5 लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी दी थी। संगठन द्वारा ग्रामीणों के घायल होने के इन दावों पर प्रशासन अथवा पुलिस की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा की जा रही है।

विभिन्न गांवों में झड़प और वाहनों के नुकसान का विवरण

आंदोलनकारी किसान मंच के महासचिव लिकेंग लिबांग के अनुसार, कुल 67 घायलों में से 31 लोगों को गंभीर चोटें आई हैं, जबकि 36 ग्रामीणों को हल्की चोटें लगी हैं। मंच ने क्षेत्रवार ब्योरा साझा करते हुए कहा कि रीगा में 52 प्रदर्शनकारी घायल हुए और पांगकांग में 15 ग्रामीण चोटिल हुए हैं। इसके साथ ही फोरम ने यह भी आरोप लगाया कि परियोजना से प्रभावित परिवारों के कुल 8 वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया, जिसमें रीगा और पांगकांग दोनों स्थानों पर 4-4 वाहन शामिल हैं।

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इसके अतिरिक्त, संगठन ने दिते दिमे स्थित सियांग पुल के नजदीक हुई एक अलग घटना का भी उल्लेख किया। मंच का कहना है कि वहां रियू और बेगिंग गांव के कुल 7 लोग घायल हुए। इनमें से 5 लोग रियू के रहने वाले हैं और 2 लोग बेगिंग गांव से हैं। इस घटना में एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ, जबकि अन्य 6 ग्रामीणों को मामूली चोटें आईं।

11,000 मेगावाट की परियोजना और स्थानीय असंतोष की वजह

यह पूरा टकराव तब सामने आया जब स्थानीय समुदाय सियांग नदी पर प्रस्तावित 11,000 मेगावाट क्षमता वाली परियोजना के लिए जारी प्रारंभिक व्यवहार्यता रिपोर्ट यानी पीएफआर से संबंधित तकनीकी गतिविधियों का विरोध कर रहे थे। परियोजना प्रभावित क्षेत्रों के लोगों की मांग है कि बांध निर्माण से जुड़े सभी सर्वेक्षण और जमीनी गतिविधियां तत्काल प्रभाव से रोकी जाएं। सियांग क्षेत्र में इस विशाल परियोजना का विरोध लगातार जारी है। स्थानीय लोगों ने अपनी कृषि भूमि छिनने, आजीविका के साधन नष्ट होने, बड़े पैमाने पर विस्थापन, पर्यावरण को नुकसान पहुंचने तथा बड़े स्तर पर नदी का रुख मोड़े जाने से होने वाले दुष्परिणामों को लेकर गहरी चिंता जताई है।

तकनीकी अध्ययन और सरकार का रुख

दूसरी तरफ, राज्य सरकार की स्थिति यह रही है कि वर्तमान में चल रही पीएफआर केवल परियोजना की तकनीकी व्यवहार्यता का प्रारंभिक आकलन है, न कि बांध निर्माण का कोई अंतिम निर्णय। मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने स्पष्ट किया है कि जब तक सभी आवश्यक तकनीकी अध्ययन, कानूनी प्रक्रियाएं और वैधानिक परामर्श पूरे नहीं हो जाते, तब तक निर्माण कार्य को लेकर कोई अंतिम कदम नहीं उठाया जाएगा। इसके बावजूद, नदी घाटी में रहने वाले समुदायों और विकास योजनाओं के बीच विश्वास की कमी के कारण जमीनी स्तर पर तनाव बना हुआ है।

सवाल-जवाब

4 अक्टूबर की झड़पों में कितने लोग घायल हुए हैं?
किसान संगठन सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम ने 67 ग्रामीणों के घायल होने का दावा किया है, जबकि पुलिस ने पूर्व में 8 पुलिसकर्मियों के घायल होने की जानकारी दी थी।
प्रस्तावित सियांग परियोजना की क्षमता कितनी है?
सियांग नदी पर प्रस्तावित सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट की क्षमता 11,000 मेगावाट बताई गई है।
ग्रामीण और किसान संगठन किस बात का विरोध कर रहे हैं?
प्रदर्शनकारी जमीन छिनने, विस्थापन, आजीविका के नुकसान और नदी का रुख मोड़े जाने से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान के डर से प्रारंभिक व्यवहार्यता रिपोर्ट से जुड़े सर्वेक्षण का विरोध कर रहे हैं।
इस मामले पर मुख्यमंत्री पेमा खांडू का क्या रुख है?
मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा है कि जब तक सभी तकनीकी अध्ययन, कानूनी प्रक्रियाएं और वैधानिक परामर्श पूरे नहीं होते, तब तक बांध निर्माण पर कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·11 मिनट पहले

विकास के नाम पर जमीन और livelihoods छीनने का ऐसा डर यूपी से लेकर अरुणाचल तक हर जगह एक जैसा ही तनाव पैदा कर देता है, जब तक सरकारें भरोसे में नहीं लेंगी तब तक विरोध रुकने वाला नहीं है।

Ravikash Gupta@ravikash·10 मिनट पहले

रोहन भाई, बात सही है कि भरोसा चाहिए, पर सिर्फ पुलिस और सरकार को ही गलत ठहराना ठीक नहीं। सर्वे रोकने से तो प्रोजेक्ट कभी आगे ही नहीं बढ़ेगा।

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