अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध तेज हो गया है। इस जलविद्युत परियोजना के विरोध का नेतृत्व कर रहे सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम ने दावा किया है कि 4 अक्टूबर को हुई हिंसक झड़पों में 67 ग्रामीण घायल हुए हैं। इससे पहले कानून व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों ने 8 पुलिसकर्मियों के घायल होने तथा दो महिलाओं समेत कुल 5 लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी दी थी। संगठन द्वारा ग्रामीणों के घायल होने के इन दावों पर प्रशासन अथवा पुलिस की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा की जा रही है।
विभिन्न गांवों में झड़प और वाहनों के नुकसान का विवरण
आंदोलनकारी किसान मंच के महासचिव लिकेंग लिबांग के अनुसार, कुल 67 घायलों में से 31 लोगों को गंभीर चोटें आई हैं, जबकि 36 ग्रामीणों को हल्की चोटें लगी हैं। मंच ने क्षेत्रवार ब्योरा साझा करते हुए कहा कि रीगा में 52 प्रदर्शनकारी घायल हुए और पांगकांग में 15 ग्रामीण चोटिल हुए हैं। इसके साथ ही फोरम ने यह भी आरोप लगाया कि परियोजना से प्रभावित परिवारों के कुल 8 वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया, जिसमें रीगा और पांगकांग दोनों स्थानों पर 4-4 वाहन शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, संगठन ने दिते दिमे स्थित सियांग पुल के नजदीक हुई एक अलग घटना का भी उल्लेख किया। मंच का कहना है कि वहां रियू और बेगिंग गांव के कुल 7 लोग घायल हुए। इनमें से 5 लोग रियू के रहने वाले हैं और 2 लोग बेगिंग गांव से हैं। इस घटना में एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ, जबकि अन्य 6 ग्रामीणों को मामूली चोटें आईं।
11,000 मेगावाट की परियोजना और स्थानीय असंतोष की वजह
यह पूरा टकराव तब सामने आया जब स्थानीय समुदाय सियांग नदी पर प्रस्तावित 11,000 मेगावाट क्षमता वाली परियोजना के लिए जारी प्रारंभिक व्यवहार्यता रिपोर्ट यानी पीएफआर से संबंधित तकनीकी गतिविधियों का विरोध कर रहे थे। परियोजना प्रभावित क्षेत्रों के लोगों की मांग है कि बांध निर्माण से जुड़े सभी सर्वेक्षण और जमीनी गतिविधियां तत्काल प्रभाव से रोकी जाएं। सियांग क्षेत्र में इस विशाल परियोजना का विरोध लगातार जारी है। स्थानीय लोगों ने अपनी कृषि भूमि छिनने, आजीविका के साधन नष्ट होने, बड़े पैमाने पर विस्थापन, पर्यावरण को नुकसान पहुंचने तथा बड़े स्तर पर नदी का रुख मोड़े जाने से होने वाले दुष्परिणामों को लेकर गहरी चिंता जताई है।
तकनीकी अध्ययन और सरकार का रुख
दूसरी तरफ, राज्य सरकार की स्थिति यह रही है कि वर्तमान में चल रही पीएफआर केवल परियोजना की तकनीकी व्यवहार्यता का प्रारंभिक आकलन है, न कि बांध निर्माण का कोई अंतिम निर्णय। मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने स्पष्ट किया है कि जब तक सभी आवश्यक तकनीकी अध्ययन, कानूनी प्रक्रियाएं और वैधानिक परामर्श पूरे नहीं हो जाते, तब तक निर्माण कार्य को लेकर कोई अंतिम कदम नहीं उठाया जाएगा। इसके बावजूद, नदी घाटी में रहने वाले समुदायों और विकास योजनाओं के बीच विश्वास की कमी के कारण जमीनी स्तर पर तनाव बना हुआ है।





















