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अरुणाचल प्रदेश में किसानों के लिए डिजिटल पहचान अभियान शुरू, पहले चरण में छह जिलों को किया गया शामिलअरुणाचल प्रदेश
6 अक्तू॰ 2026, 1:42 pm (52 मिनट पहले)· 1

अरुणाचल प्रदेश में किसानों के लिए डिजिटल पहचान अभियान शुरू, पहले चरण में छह जिलों को किया गया शामिल

अरुणाचल प्रदेश सरकार ने एग्रीस्टैक ढांचे के तहत फार्मर आईडी अभियान शुरू किया है, जिससे छह शुरुआती जिलों में किसानों का सत्यापित रिकॉर्ड तैयार कर सरकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शी ढंग से पहुंचाया जा सके।

अरुणाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के कृषक समुदाय का एक प्रामाणिक डिजिटल डेटाबेस तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। कृषि कल्याण योजनाओं की बेहतर रूपरेखा तैयार करने और उन्हें धरातल पर सटीक रूप से लागू करने के उद्देश्य से फार्मर आईडी पहल की औपचारिक शुरुआत कर दी गई है। राज्य के कृषि मंत्री गेब्रियल डी वांगसु ने निचली दिबांग घाटी जिले के रोइंग में आयोजित एक विशेष शिविर के दौरान इस डिजिटल पहचान अभियान का उद्घाटन किया।

एग्रीस्टैक ढांचे के तहत छह जिलों में पायलट प्रोजेक्ट

इस नई व्यवस्था को एग्रीस्टैक ढांचे के तहत धरातल पर उतारा जा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर इसे पहले चरण में एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया है, जिसके दायरे में छह जिले रखे गए हैं। इनमें तवांग, पक्के केसांग, निचला सुबनसिरी, पूर्वी सियांग, निचली दिबांग घाटी और नामसाई शामिल हैं। संबंधित विभागों की योजना के अनुसार, इस प्रायोगिक चरण के नतीजों और प्रगति की समीक्षा करने के बाद इस व्यवस्था को राज्य के बाकी बचे 21 जिलों में भी पूरी तरह लागू किया जाएगा।

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पारदर्शी योजना और जमीनी जरूरतों की सटीक पहचान

रोइंग में किसानों, गांव बूढ़ों, जनप्रतिनिधियों तथा कृषि विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में कृषि मंत्री ने इस व्यवस्था के दूरगामी प्रभाव रेखांकित किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रणाली के जरिए प्रशासन के पास काश्तकारों की भौगोलिक स्थिति, उनके द्वारा उगाई जाने वाली फसलों और उनकी वास्तविक जरूरतों का ठोस ब्योरा उपलब्ध होगा। जब काश्तकारों, उनके खेतों और खेती से जुड़ी गतिविधियों की पुख्ता जानकारी दर्ज होगी, तब सरकारी सहायता को अधिक लक्षित और पारदर्शी ढंग से सीधे जरूरतमंदों तक पहुंचाना आसान हो जाएगा। यह पहल केवल एक पहचान पत्र देने तक सीमित नहीं है, बल्कि एक मजबूत कृषि सूचना तंत्र की नींव रखने का प्रयास है ताकि पात्र लाभार्थियों को किसी भी सरकारी योजना से वंचित न रहना पड़े।

भूमि स्वामित्व पर नहीं पड़ेगा कोई कानूनी प्रभाव

इस डिजिटल कार्ड के कानूनी पहलुओं को स्पष्ट करते हुए प्रशासन ने किसानों के मन में उठने वाले संभावित संशयों को भी दूर किया है। कृषि मंत्री ने जोर देकर कहा कि फार्मर आईडी किसी भी प्रकार का भूमि स्वामित्व दस्तावेज नहीं है। इस डिजिटल पहचान पत्र को रखने से किसी भी किसान को जमीन पर कोई कानूनी मालिकाना हक न तो मिलता है और न ही यह किसी दावे को स्थापित करता है। यह केवल किसान के कृषि संबंधी विवरण का एक सत्यापित रिकॉर्ड है, जिसका प्राथमिक कार्य सरकारी योजनाओं, कृषि सेवाओं और विभिन्न सबसिडी तक पहुंच को सुगम बनाना है।

डेटा सुरक्षा और मैपिंग में सहयोग की अपील

पहल को सफल बनाने के लिए सूचनाओं की विश्वसनीयता, पारदर्शिता और डेटा सुरक्षा पर विशेष बल दिया गया है। कृषि मंत्री ने किसानों से पंजीकरण प्रक्रिया में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने यह भी अनुरोध किया कि खेतों की सटीक मैपिंग और आंकड़े जुटाने के लिए गांवों में पहुंच रहे विभागीय क्षेत्रीय सर्वेक्षकों को पूरा सहयोग दिया जाए, जिससे राज्य भर का कृषि ढांचा अधिक सुदृढ़ और पारदर्शी बन सके।

सवाल-जवाब

अरुणाचल प्रदेश में फार्मर आईडी पहल की शुरुआत किसने की?
इस पहल का शुभारंभ राज्य के कृषि मंत्री गेब्रियल डी वांगसु ने निचली दिबांग घाटी जिले के रोइंग में किया।
पहले चरण में किन जिलों को शामिल किया गया है?
पायलट चरण में तवांग, पक्के केसांग, निचला सुबनसिरी, पूर्वी सियांग, निचली दिबांग घाटी और नामसाई सहित छह जिलों को शामिल किया गया है।
यह व्यवस्था किस तकनीकी ढांचे के तहत लागू की जा रही है?
यह डिजिटल पहचान अभियान एग्रीस्टैक ढांचे के तहत संचालित किया जा रहा है।
क्या फार्मर आईडी मिलने से जमीन का कानूनी मालिकाना हक मिल जाता है?
नहीं, कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया है कि यह आईडी केवल एक सत्यापित रिकॉर्ड है और यह जमीन पर कोई कानूनी मालिकाना हक नहीं देती।
शेष 21 जिलों में यह कार्यक्रम कब लागू होगा?
पायलट प्रोजेक्ट के छह जिलों में प्रगति और परिणामों की समीक्षा के बाद इसे बाकी 21 जिलों में विस्तारित किया जाएगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·12 मिनट पहले

ब्लॉकचेन जैसी तकनीक पर चलने वाले एग्रीस्टैक से किसानों का डेटा डिजिटल होना बहुत ज़रूरी कदम है, इससे बिचौलिये खत्म होंगे और सरकारी मदद सीधे बैंक खाते तक पहुंचेगी।

Arjun Mehta@arjun-mehta·11 मिनट पहले

रवि जी, बात तो सही है कि बिचौलिये हटेंगे, पर क्या पहाड़ी इलाकों में इंटरनेट कमजोर होने से रजिस्ट्रेशन में दिक्कत नहीं आएगी?

Karan Malhotra@karan-malhotra·32 मिनट पहले

फर्जीवाड़े और बिचौलियों के खेल पर लगाम कसने के लिए किसानों का डिजिटल डेटा बेस तैयार होना बहुत जरूरी है। अक्सर योजनाओं का पैसा असली हकदार तक पहुँचने से पहले ही बीच में गायब हो जाता है, ऐसे में यह आईडी व्यवस्था काफी मददगार साबित होगी।

Rohan Verma@rohan-verma·31 मिनट पहले

सही कहा करण जी, बिचौलियों के हटने से सीधा फायदा किसानों को ही मिलेगा।

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