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सीरिया में इजरायली एयरस्ट्राइक से भड़का नया भूचाल, तुर्की के साथ सीधी जंग की टली बड़ी आपदाएशिया
22 अग॰ 2026, 11:11 pm (1 घंटे पहले)· 1

सीरिया में इजरायली एयरस्ट्राइक से भड़का नया भूचाल, तुर्की के साथ सीधी जंग की टली बड़ी आपदा

इजरायल द्वारा सीरिया के अबू दुहूर एयरबेस पर किए गए हालिया हवाई हमले से नाटो सदस्य तुर्की के साथ सीधा टकराव पैदा होने का खतरा मंडरा गया था। अमेरिकी दूत टॉम बराक ने साफ किया है कि इस कार्रवाई की कोई पूर्व सूचना वाशिंगटन या अंकारा को नहीं दी गई थी।

सीरिया के भीतर इजरायल द्वारा अंजाम दिए गए एक नए हवाई हमले ने मध्य पूर्व की कूटनीति में खलबली मचा दी है। सीरिया के लिए अमेरिका के विशेष दूत और तुर्की में अमेरिकी राजदूत टॉम बराक ने खुलासा किया है कि इस हफ्ते उत्तरी सीरिया के अबू दुहूर एयरबेस पर हुई बमबारी से पहले इजरायल ने किसी भी सहयोगी देश को भरोसे में नहीं लिया था। इस सैन्य कार्रवाई के कारण इजरायल और नाटो सदस्य देश तुर्की के बीच आमने-सामने की जंग छिड़ने के आसार बन गए थे। हालांकि इस हमले में एयरबेस को तो नुकसान पहुंचा, लेकिन राहत की बात यह रही कि किसी की जान जाने की आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। बराक का मानना है कि यह कदम सीधे तौर पर तुर्की को उकसाने की सुनियोजित मंशा से भी जुड़ा हो सकता है, जो इस भू-राजनीतिक संकट का सबसे संवेदनशील पहलू है।

अबू दुहूर एयरबेस को क्यों बनाया गया निशाना

इस एयरस्ट्राइक के तुरंत बाद बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय की तरफ से सफाई दी गई कि अबू दुहूर एयरबेस को इसलिए चपेट में लिया गया क्योंकि सीरिया एक अहम समझौते की शर्तों को तोड़ने की तैयारी में था। इजरायल का आरोप था कि दमिश्क इस ठिकाने पर तुर्की के फौजी दस्तों को बसाने की अनुमति देने जा रहा था। टॉम बराक ने इस पर विचार रखते हुए कहा कि संभव है इजरायली खुफिया महकमे के पास ऐसी कोई रिपोर्ट रही हो जिससे उन्हें लगा हो कि तुर्की इस सामरिक क्षेत्र में अपनी ताकत बढ़ा रहा है। बराक ने इस बात को रेखांकित करते हुए कहा कि मैदान पर तैनात किसी कमांडर ने अपने स्तर पर यह कठोर निर्णय ले लिया हो कि वे इस गतिविधि को रोकेंगे, लेकिन उन्होंने इसके लिए वाशिंगटन या अंकारा को आगाह करने की जहमत नहीं उठाई। अमेरिकी दूत ने यह आशंका भी जताई कि संभव है इजरायली सेना और उसकी खुफिया एजेंसियों के बीच आपसी तालमेल की कमी या किसी गलतफहमी के कारण यह कदम उठाया गया हो।

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तुर्की और इजरायल के बीच मंडराया सीधा टकराव

जिस जगह को निशाना बनाया गया, वह अबू दुहूर एयरबेस तुर्की की सीमा से महज 80 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस भौगोलिक स्थिति ने सुरक्षा समीकरणों को बेहद नाज़ुक बना दिया था। इस बारे में बात करते हुए बराक ने बताया कि जब तुर्की की सेना अपने क्षेत्र की तरफ अचानक इन लड़ाकू विमानों को बढ़ते देखती है और उनके इरादों या गंतव्य से अनजान रहती है, तो उनके लिए भी अपने जेट विमानों को हवा में उतारने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। अमेरिकी अधिकारी ने इस बात की भी याद दिलाई कि तुर्की पहले भी सीरियाई सरहद के पास रूस के एक विमान को मार गिरा चुका है। साल 2015 की उस घटना से साबित होता है कि छोटी सी गलतफहमी किस कदर बड़े युद्ध का रूप ले सकती है। गौरतलब है कि टॉम बराक के ये तमाम खुलासे लेबनानी-ऑस्ट्रेलियाई कारोबारी मारियो नवफल द्वारा X पर साझा किए गए बयानों के जरिए सामने आए हैं।

घटना से एक दिन पहले पहुंचे थे तुर्की के प्रतिनिधि

इस पूरे घटनाक्रम के तार एक दिन पहले हुई एक अन्य गतिविधि से भी जुड़े हैं। दो सीरियाई अधिकारियों ने अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर मीडिया को बताया कि एयरस्ट्राइक से ठीक एक दिन पहले तुर्की का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल अबू दुहूर एयरबेस का दौरा कर चुका था। इन अधिकारियों के मुताबिक, दल ने उत्तर-पश्चिमी सीरिया के इदलिब प्रांत में स्थित इस बेस पर चल रहे मरम्मत और निर्माण कार्यों की प्रगति का मुआयना किया था। अमेरिकी दूत ने स्पष्ट किया कि इजरायल ने भले ही इस इलाके में तुर्की की सैन्य हलचल को लेकर चिंता जताई हो, लेकिन अमेरिका की अपनी स्वतंत्र जांच में यह साफ हो गया था कि वहां ऐसी कोई आक्रामक गतिविधि संचालित नहीं हो रही थी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जरा सी चूक से भी बेहद विनाशकारी परिणाम सामने आ सकते थे।

सीरियाई सेना को धार दे रहा है अंकारा

मौजूदा समय में तुर्की सीरिया के सुरक्षा बलों के पुनर्गठन में अहम भूमिका निभा रहा है। इसके तहत वह सीरियाई सैनिकों को आधुनिक सैन्य प्रशिक्षण देने के साथ ही जरूरी साजो-सामान और लॉजिस्टिक सहायता भी मुहैया करवा रहा है। पिछले साल दोनों देशों ने एक आपसी समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसने उनकी इस सैन्य साझेदारी को एक औपचारिक जामा पहनाया। अंकारा के हुक्मरानों का रुख साफ रहा है कि वे सीरिया की सुरक्षा को अपनी खुद की घरेलू सुरक्षा से अलग नहीं मानते। यही वजह है कि सीरियाई जमीन पर तुर्की के बढ़ते हुए फौजी दखल से इजरायल की त्यौरियां चढ़ी हुई हैं और उसकी चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं।

दमिश्क की नई सरकार पर इजरायल को अविश्वास

इजरायल की नजरें सीरिया की नई हुकूमत पर बहुत संशय के साथ टिकी हुई हैं। राजधानी दमिश्क की बागडोर संभालने वाले नए नेताओं में ऐसे पूर्व इस्लामी विद्रोही शामिल हैं जिन पर इजरायल बिल्कुल भरोसा नहीं करता। हालांकि सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने कई बार सार्वजनिक मंचों से यह दोहराया है कि उनका देश इजरायल के साथ किसी प्रकार का युद्ध नहीं चाहता है, फिर भी जमीनी स्तर पर इजरायली सैन्य कार्रवाई लगातार जारी है। साल 2024 के आखिर में बशर अल-असद का शासन पतन होने के बाद से इजरायली सेना सीरिया के अलग-अलग हिस्सों में सैकड़ों हवाई حملे कर चुकी है। इसके अलावा इजरायली फौज ने दक्षिणी सीरिया में संयुक्त राष्ट्र द्वारा नियंत्रित बफर जोन पर भी अपना कब्जा जमा लिया है और वह अब भी उस सामरिक क्षेत्र पर काबिज है।

क्षेत्रीय तनाव और कूटनीतिक दबाव

तुर्की ने हाल ही के दिनों में सऊदी अरब और पाकिस्तान के साथ मिलकर कुछ नए रक्षा समझौतों पर मुहर लगाई है। हालांकि, अबू दुहूर एयरबेस पर हुए इस इजरायली हमले के बाद अभी तक अंकारा की तरफ से किसी बड़े सैन्य प्रतिकार के संकेत नहीं मिले हैं। इसके बावजूद इस ताजा घटना ने दोनों देशों के बीच पहले से ही तनावपूर्ण चल रहे रिश्तों में खटास और बढ़ा दी है। इस पूरे संकट का सबसे डरावना पहलू यह है कि सीरियाई रणक्षेत्र में इजरायल और तुर्की की सेनाएं अब भौगोलिक रूप से एक-दूसरे के बेहद करीब आ चुकी हैं। अमेरिका के विशेष दूत का यह बयान कि इस पूरी कार्रवाई की भनक न तो वाशिंगटन को थी और न ही अंकारा को, इस अनिश्चितता भरे माहौल को और अधिक खतरनाक बना देता है।

सवाल-जवाब

इजरायल ने सीरिया के किस एयरबेस पर हमला किया?
इजरायल ने उत्तरी सीरिया में स्थित अबू दुहूर एयरबेस पर हवाई हमला किया।
क्या इस हमले की जानकारी अमेरिका को दी गई थी?
नहीं, अमेरिका के विशेष दूत टॉम बराक ने पुष्टि की कि इजरायल ने इस हमले से पहले अमेरिका को कोई पूर्व सूचना नहीं दी थी।
अबू दुहूर एयरबेस तुर्की की सीमा से कितनी दूर है?
अबू दुहूर एयरबेस तुर्की की सीमा से लगभग 80 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
इजरायल ने इस एयरबेस को क्यों निशाना बनाया?
इजरायल का दावा था कि सीरिया इस एयरबेस पर तुर्की के सैनिकों की तैनाती की अनुमति देने वाला था, जिससे एक समझौते का उल्लंघन होता।
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