पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों की एक और दर्दनाक घटना सामने आई है। बलूचिस्तान के नुश्की कस्बे में अज्ञात हथियारबंद हमलावरों ने दिनदहाड़े एक हिंदू व्यापारी की उनकी ही दुकान के भीतर गोली मारकर बेरहमी से हत्या कर दी। इस सनसनीखेज वारदात के बाद से इलाके में रह रहे हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के बीच गहरा खौफ और दहशत का माहौल बना हुआ है।
नुश्की बाजार के कासिराबाद स्टॉप पर हुई वारदात
यह खौफनाक घटना बलूचिस्तान प्रांत के नुश्की कस्बे में स्थित व्यस्त नुश्की बाजार के कासिराबाद स्टॉप पर हुई। घटना के वक्त बाजार में सामान्य दिनों की तरह चहल-पहल थी, तभी बेखौफ हमलावर साजिश के तहत इलाके में दाखिल हुए। मृतक हिंदू व्यापारी की पहचान राकेश कुमार के रूप में हुई है, जो इसी बाजार में अपनी दुकान चलाकर किसी तरह अपने परिवार का गुजर-बसर कर रहे थे। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, हमलावर सीधे राकेश कुमार की दुकान के अंदर जबरन घुस गए।
विरोध करने पर बदमाशों ने बरसाईं गोलियां
जब दुकान के अंदर अचानक घुसे हथियारबंद बदमाशों की मंशा भांपकर राकेश कुमार ने उनका विरोध करने की हिम्मत दिखाई, तो हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चलानी शुरू कर दीं। गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरा बाजार गूंज उठा और अफरा-तफरी मच गई। राकेश कुमार को संभलने का मौका तक नहीं मिला और गोलियों से छलनी होकर उन्होंने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया। वारदात को अंजाम देने के बाद सभी हमलावर मौके से आसानी से फरार होने में कामयाब रहे। घटना की सूचना मिलने पर स्थानीय पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंचकर शव को अपने कब्जे में लिया और उसे जिला अस्पताल पहुंचाया। पुलिस ने अज्ञात हमलावरों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई और छानबीन शुरू कर दी है।
अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
इस कायराना और बर्बर हमले के बाद बलूचिस्तान से लेकर खैबर पख्तूनख्वा तक तीखा आक्रोश फैल गया है। खैबर पख्तूनख्वा प्रांतीय विधानसभा के सदस्य और प्रमुख सिख नेता गुरपाल सिंह ने इस जघन्य हत्याकांड की कड़ी शब्दों में भर्त्सना की है। गुरपाल सिंह ने इस हमले को राज्य विरोधी और बलूचिस्तान विरोधी तत्वों की कायराना करतूत बताया। उन्होंने अपने बयान में कहा कि हिंदू समुदाय सदियों से बलूचिस्तान का एक अभिन्न हिस्सा रहा है और इस समुदाय ने समय-समय पर पाकिस्तान तथा बलूचिस्तान के प्रति अपनी वफादारी और योगदान को पूरी तरह साबित किया है।
पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के हालात
कुछ समय पहले ही पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने यह दावा किया था कि उनके देश में अल्पसंख्यक बेहद सुरक्षित और खुशहाल हैं, लेकिन इस घटना ने उनके दावों की पोल खोल दी है। पाकिस्तान में हिंदू आबादी पहले से ही घटकर मात्र चार प्रतिशत रह गई है, और उस पर भी आए दिन ऐसी लक्षित हत्याओं और हमलों की खबरें सामने आती रहती हैं। बलूचिस्तान में मौजूदा समय में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं, जहां स्थानीय जनता अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही है। आरोप है कि क्षेत्र के कई हिस्सों में पाकिस्तानी सेना द्वारा निहत्थे नागरिकों को जबरन अगवा किए जाने और अगले दिन उनकी लाश मिलने की घटनाएं आम हो चुकी हैं। बुनियादी हक जैसे बिजली, पानी और राशन की मांग करने वाले आम नागरिकों को भी गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ता है। इन दमनकारी नीतियों और हमलों के बावजूद बलोच लड़ाकों और स्थानीय लोगों ने पाकिस्तानी सेना के इस रवैए के आगे झुकने से साफ इनकार कर दिया है और अपने संघर्ष पर अडिग हैं।





















