पश्चिम एशिया में सुरक्षा हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सोमवार को जानकारी दी कि यमन की राजधानी सना के दो प्रमुख इलाकों को हवाई हमलों में निशाना बनाया गया है। इन हमलों के लिए सीधे तौर पर सऊदी अरब को जिम्मेदार ठहराया गया है, हालांकि सऊदी पक्ष की ओर से इस पर तुरंत कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। दूसरी ओर भारत सरकार ने पुष्टि की है कि होर्मुज स्ट्रेट के समीप एक कमर्शियल पोत पर ड्रोन हमले के बाद दो भारतीय नागरिक लापता चल रहे हैं।
सना में हवाई हमलों और बढ़ते तनाव की पृष्ठभूमि
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यमन के हूती गुटों और सऊदी अरब के बीच चल रहा संघर्ष एक बार फिर तेज हो गया है। हूती विद्रोहियों का कहना है कि सना के हमदान और थौरा जिलों को सोमवार की आधी रात के आसपास हवाई हमलों का सामना करना पड़ा। हूती मीडिया केंद्र ने इन हमलों की पुष्टि करते हुए सऊदी अरब पर इसका आरोप मढ़ा है, हालांकि इस संबंध में कोई विस्तृत ब्योरा साझा नहीं किया गया है। यह घटनाक्रम ऐसे वक्त में सामने आया है जब हूती गुट लगातार सऊदी अरब के हवाई अड्डों की ओर मिसाइलें और ड्रोन दागने की गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं। सऊदी अरब की सरकार ने इन शुरुआती दावों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
समुद्री मार्गों पर हमले और भारतीय नाविकों की स्थिति
समुद्र में बढ़ते खतरों के बीच भारत के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को एक गंभीर घटना की जानकारी दी। मंत्रालय के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट क्षेत्र में MT पेट्रो डॉल्फिन नामक कमर्शियल टैंकर पर एक ड्रोन आकर टकरा गया, जिसके परिणामस्वरूप उस पर सवार दो भारतीय नाविक लापता हो गए हैं। यह हादसा रविवार को हुआ था जब ड्रोन ने टैंकर को टक्कर मारी, और उस समय पोत पर कुल 11 भारतीय नाविक सवार थे।
इसके अलावा समुद्री सुरक्षा को लेकर एक अन्य घटना भी सामने आई। मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाले एक अन्य टैंकर MT वाल्थेरा पर किसी अज्ञात वस्तु से हमला किया गया जिसके कारण उसमें आग लग गई। गनीमत यह रही कि इस दूसरे पोत पर मौजूद सभी 11 भारतीय नाविक पूरी तरह सुरक्षित बताए गए हैं।
राजनयिक प्रयास और खाड़ी देशों की प्रतिक्रिया
लापता भारतीय नाविकों का सुराग लगाने के लिए मस्कट स्थित भारतीय दूतावास सक्रिय हो गया है। दूतावास ओमान के स्थानीय अधिकारियों और संबंधित जहाजों की मैनेजमेंट कंपनियों के साथ लगातार संपर्क में है ताकि क्रू सदस्यों की तलाश जल्द से जल्द पूरी की जा सके। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इन तमाम हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। मंत्रालय का कहना है कि कमर्शियल पोतों पर बार-बार हो रहे इस तरह के हमले अत्यंत चिंताजनक हैं और इनसे क्षेत्र में पहले से ही तनावपूर्ण बनी स्थिति के और अधिक बिगड़ने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
इस बीच संयुक्त अरब अमीरात की तरफ से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। यूएई के शासकों के राजनयिक सलाहकार अनवर गर्गश ने ईरान और उसके सहयोगी समूहों के आक्रामक रुख से खाड़ी देशों की सामूहिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के वास्ते संयुक्त कार्रवाई की पुरजोर मांग की है। उनकातर्क था कि ईरान और उसके समर्थकों ने यह गलत आकलन कर लिया था कि अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे संघर्ष में खाड़ी के अरब देश सबसे कमजोर कड़ी साबित होंगे। फारस की खाड़ी के पार स्थित इन देशों पर लगातार हमले किए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए अनवर गर्गश ने लिखा कि हम सभी सीधे तौर पर निशाने पर हैं और हमारी सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़ी हुई है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सऊदी अरब पर होने वाले किसी भी हमले का सीधा असर यूएई समेत तमाम खाड़ी देशों की सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर करने का काम करता है।



















