चीन की एक अदालत ने मध्य चीन के प्रमुख शहर वुहान के पूर्व मेयर झोउ शियानवांग को बड़े पैमाने पर रिश्वतखोरी का दोषी करार देते हुए 14 साल के कारावास की सजा सुनाई है। शनिवार को फैसला सुनाते हुए अदालत ने उन पर 50 लाख युआन, जो लगभग 7 करोड़ रुपये के बराबर हैं, का जुर्माना भी लगाया। यह वही झोउ शियानवांग हैं जो करीब 7 साल पहले पूरी दुनिया में कोरोना वायरस के शुरुआती फैलाव के दौरान वुहान प्रशासन के प्रमुख चेहरे के रूप में अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आए थे। हालांकि, अदालत द्वारा सुनाए गए इस ताजा फैसले में महामारी के शुरुआती महीनों में उनके प्रशासनिक कामकाज या निर्णयों का कोई उल्लेख नहीं किया गया है। न्यायिक प्रक्रिया पूरी तरह से दो दशकों से अधिक समय तक चले उनके भ्रष्टाचार और अवैध धन उगाही के मामले पर केंद्रित रही।
दो दशकों के प्रशासनिक कार्यकाल में 85 करोड़ रुपये से अधिक की घूसखोरी
शांगच्यू इंटरमीडिएट पीपुल्स कोर्ट द्वारा साझा किए गए विवरण के अनुसार, झोउ शियानवांग पर वर्ष 2003 से लेकर वर्ष 2025 के बीच कई महत्वपूर्ण सरकारी पदों पर रहते हुए अपने आधिकारिक रुतबे का दुरुपयोग करने का दोष सिद्ध हुआ है। अदालत के अनुसार, उन्होंने अपने पद और सरकारी प्रभाव का इस्तेमाल विभिन्न निजी व्यक्तियों और व्यावसायिक इकाइयों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए किया। इन अनुचित लाभों में व्यापारिक परियोजनाओं को आगे बढ़ाना, वाणिज्यिक सौदे कराना और विभिन्न प्रशासनिक मंजूरियां दिलवाना शामिल था। इस लंबी अवधि के दौरान झोउ ने नकदी और बहुमूल्य वस्तुओं के रूप में कुल मिलाकर 6.05 करोड़ युआन से अधिक की संपत्ति रिश्वत के तौर पर हासिल की, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 85 करोड़ रुपये बैठती है। अदालत ने अपने अवलोकन में स्पष्ट किया कि उनके द्वारा स्वीकार की गई घूस की यह कुल राशि असाधारण रूप से बहुत बड़ी थी।
दोष स्वीकार करने और संपत्ति बरामद होने से मिली सजा में रियायत
सुनवाई के दौरान अदालत ने इस पहलू पर भी विचार किया कि झोउ शियानवांग ने जांच एजेंसियों के समक्ष अपना अपराध स्वीकार कर लिया था और पूरी पड़ताल के दौरान अधिकारियों के साथ सहयोग किया। इसके अतिरिक्त, घूसखोरी के जरिए अर्जित की गई अधिकांश अवैध नकदी और अघोषित संपत्तियों को कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने सफलतापूर्वक जब्त और बरामद कर लिया था। इन विशेष परिस्थितियों, अपराध की स्वीकृति और अवैध धन की बरामदगी को ध्यान में रखते हुए अदालत ने उन्हें कानूनन मिलने वाली अधिकतम कठोर सजा में कुछ नरमी देने का निर्णय लिया। इसके बावजूद, अपराध की गंभीरता को देखते हुए उन्हें 14 वर्ष जेल की सलाखों के पीछे गुजारने होंगे और 50 लाख युआन का भारी जुर्माना अदा करना पड़ेगा।
शी जिनपिंग के व्यापक भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का दायरा
चीन में उच्च पदस्थ अधिकारियों और नौकरशाहों के खिलाफ यह कानूनी कार्रवाई राष्ट्रपति शी जिनपिंग के उस व्यापक भ्रष्टाचार विरोधी अभियान की कड़ी है, जो उनकी सरकार की सबसे प्रमुख नीतिगत प्राथमिकताओं में शामिल रहा है। वर्ष 2012 में सत्ता की बागडोर संभालने के बाद से शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीनी प्रशासन ने केंद्र से लेकर प्रांतीय स्तर तक के हजारों अधिकारियों के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक और कानूनी कदम उठाए हैं। इस सघन मुहिम की जद में कई बेहद ताकतवर नौकरशाह, पार्टी नेता और बड़े रणनीतिक पदों पर बैठे लोग आए हैं। विश्लेषक यह भी रेखांकित करते रहे हैं कि इस व्यापक अभियान के माध्यम से कई राजनीतिक रूप से रसूखदार हस्तियों और शी जिनपिंग के हाई-प्रोफाइल राजनीतिक विरोधियों को भी सत्ता तंत्र से बाहर का रास्ता दिखाया गया है। झोउ शियानवांग के खिलाफ आया यह अदालती आदेश इसी बात को दर्शाता है कि सत्ताधारी तंत्र में पुराने से पुराने मामलों की जांच भी जारी है।
महामारी की शुरुआत में वुहान की व्यवस्था और सूचना छिपाने पर उठे सवाल
झोउ शियानवांग वैश्विक स्तर पर उस समय चर्चा में आए थे जब वुहान में एक अज्ञात संक्रामक बीमारी तेजी से पैर पसार रही थी। मध्य चीन के इस औद्योगिक और व्यापारिक केंद्र में संक्रमण के शुरुआती प्रबंधन को लेकर स्थानीय प्रशासन को भारी अंतरराष्ट्रीय और घरेलू आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। उस समय वुहान के अधिकारियों पर आरोप लगे थे कि उन्होंने बीमारी की भयावहता और इसके तेजी से फैलने से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों को समय पर जनता और वैश्विक समुदाय के सामने साझा नहीं किया। इन गंभीर आरोपों के बीच झोउ शियानवांग ने सार्वजनिक रूप से सफाई दी थी कि चीन के कानूनी ढांचे के अनुसार स्थानीय नगर प्रशासन बिना राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकारियों और उच्च स्तर की मंजूरी के संक्रामक रोगों से संबंधित संवेदनशील जानकारियां स्वतंत्र रूप से जारी नहीं कर सकते।
दिसंबर 2019 से जनवरी 2020 का घटनाक्रम और 76 दिनों की पूर्ण पाबंदी
वुहान के चिकित्सालयों में दिसंबर 2019 के दौरान फ्लू के असामान्य लक्षणों वाले मरीज पहुंचने लगे थे, जो तेज बुखार, निरंतर खांसी और सांस लेने में गंभीर तकलीफ से पीड़ित थे। इसके तुरंत बाद ही चीन की एक विशेष वैज्ञानिक प्रयोगशाला ने इस नए रोगाणु का लगभग पूरा आनुवंशिक क्रम तैयार कर लिया था। आनुवंशिक विश्लेषण से यह प्रमाणित हुआ था कि यह नया वायरस वर्ष 2002-03 में फैले खतरनाक सार्स संक्रमण वाले कोरोना वायरस से अत्यधिक समानता रखता था। प्रयोगशाला के वैज्ञानिकों ने यह महत्वपूर्ण वैज्ञानिक डेटा देश के वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों को सौंप दिया था, लेकिन यह अति-महत्वपूर्ण जानकारी तत्काल सार्वजनिक डोमेन में नहीं लाई गई।
इसके बाद जनवरी 2020 के मध्य में आयोजित एक बंद कमरे की आंतरिक बैठक में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने स्वीकार किया कि एक ही स्थान पर इतने सारे मामले सामने आने का सीधा अर्थ है कि यह वायरस इंसान से इंसान में फैलने में सक्षम है। इस आकलन के साथ ही अधिकारियों को आपातकालीन चिकित्सा तैयारियां शुरू करने के गोपनीय निर्देश दे दिए गए। हालांकि, सार्वजनिक बयानों में उस दौरान भी संक्रमण की संक्रामकता और गंभीरता को काफी कम करके पेश किया जाता रहा। आखिरकार संक्रमण की बेकाबू रफ्तार के बीच 23 जनवरी 2020 को वुहान में पूर्ण लॉकडाउन लागू कर दिया गया, जो लगातार 76 दिनों तक चला। इस अभूतपूर्व पाबंदी के दौरान पूरे शहर में आम नागरिकों के बाहर निकलने और सभी प्रकार के यातायात पर कड़े प्रतिबंध रहे। उस दौर के फैसलों के कारण लंबे समय तक सवालों के घेरे में रहे वुहान के पूर्व प्रशासनिक मुखिया अब करोड़ों के भ्रष्टाचार मामले में सजा पाकर एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं।



















