असम में पेट्रोलियम डीलरों ने अपनी मांगों को लेकर एक बड़े विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। राज्यभर में तेल की खरीद और बिक्री को 24 घंटे के लिए पूरी तरह से ठप रखने का फैसला किया गया है। यह सांकेतिक हड़ताल 12 नवंबर को सुबह 6 बजे से शुरू होगी और अगले दिन यानी 13 नवंबर को सुबह 6 बजे तक जारी रहेगी। डीलरों का कहना है कि यह कदम तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के कथित मनमाने रवैये और उत्पीड़न के विरोध में उठाया गया है।
किसने बुलाई है हड़ताल और क्या हैं चेतावनी?
इस विरोध प्रदर्शन का आह्वान नॉर्थ ईस्ट इंडिया पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन (NEIPDA), ग्रेटर गुवाहाटी यूनिट ने किया है। एसोसिएशन ने साफ कर दिया है कि यह आंदोलन का सिर्फ पहला चरण है। यदि तेल कंपनियां निर्धारित समय सीमा के भीतर डीलरों की समस्याओं का समाधान करने में असफल रहती हैं, तो 23 नवंबर से पूरे राज्य में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी, जिसके तहत पेट्रोल और डीजल के कारोबार को अनिश्चितकाल के लिए बंद रखा जाएगा।
डीलरों के मुख्य आरोप और समस्याएं
एसोसिएशन ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) समेत तमाम तेल कंपनियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। डीलरों का कहना है कि ये कंपनियां तानाशाही रवैया अपना रही हैं और तयशुदा प्रक्रियाओं को ताक पर रखकर दंडात्मक कार्रवाई कर रही हैं। मुख्य शिकायतों में बिना किसी ठोस सबूत के केवल अनुमान के आधार पर पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति रोकने की धमकियां देना शामिल है। इसके अलावा, बिना किसी पूर्व नोटिस के टैंक-ट्रक कंसोर्टियम व्यवस्था को रद्द करना और डीलरों पर लुब्रिकेंट जैसे अतिरिक्त उत्पादों को खरीदने का भारी दबाव बनाया जाना भी प्रमुख मुद्दे हैं।
अन्य परेशानियां और वित्तीय विवाद
प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि तेल कंपनियों के अधिकारियों द्वारा फ्यूल-लोडिंग की सुविधाओं को जबरन बाधित किया गया। डीलरों को भुगतान बकाया होने और भारी वित्तीय नुकसान की आशंका के बावजूद पॉइंट-ऑफ-सेल (POS) मशीनें लगवाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इसके साथ ही, डीलरों के एसएपी खातों से एकतरफा और मनमाने ढंग से पैसे काटे जाने का मामला भी सामने आया है। लीगल मेट्रोलॉजी डिपार्टमेंट की जरूरतों के लिए किए गए भुगतान और स्वीकृत सब्सिडी के रिम्बर्स्मेंट में भी लगातार देरी की जा रही है।
एसोसिएशन की प्रमुख मांगें
NEIPDA ने मांग की है कि रद्द किए गए परिवहन समझौतों को तुरंत बहाल किया जाए, विवादित कटौतियों को वापस लिया जाए और लंबित भुगतानों का जल्द से जल्द निपटारा किया जाए। एसोसिएशन चाहती है कि तेल कंपनियां अपनी दमनकारी नीतियों पर रोक लगाएं। डीलरों की मांग है कि किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई या ईंधन आपूर्ति प्रभावित करने से पहले उन्हें अपनी बात रखने का निष्पक्ष अवसर मिलना चाहिए, ताकि मनमाने फैसलों से बचा जा सके।



















