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असम के डिब्रूगढ़ ने रचा इतिहास, लगातार दो साल तक हर बच्चे का जन्म अस्पताल में हुआअसम
24 सित॰ 2026, 1:19 pm (3 घंटे पहले)· 0

असम के डिब्रूगढ़ ने रचा इतिहास, लगातार दो साल तक हर बच्चे का जन्म अस्पताल में हुआ

असम के डिब्रूगढ़ जिले में लगातार दूसरे वित्तीय वर्ष 100 प्रतिशत संस्थागत प्रसव दर्ज किए गए हैं, जहां अप्रैल 2025 से जुलाई 2026 के बीच हुए सभी 5,848 प्रसव चिकित्सा केंद्रों में संपन्न हुए।

असम के पूर्वी हिस्से में स्थित डिब्रूगढ़ जिले ने मातृत्व और शिशु स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय मुकाम हासिल किया है। जिले ने लगातार दूसरे वित्तीय वर्ष में शून्य घरेलू प्रसव का रिकॉर्ड बनाए रखते हुए शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव सुनिश्चित किया है। अप्रैल 2025 से जुलाई 2026 की अवधि के दौरान दर्ज किए गए सभी 5,848 नवजातों का जन्म चिकित्सा केंद्रों में हुआ, जिससे किसी भी घर पर प्रसव का मामला सामने नहीं आया।

स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव के आंकड़ों में निरंतर उछाल

जिला स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इससे पूर्व वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान भी क्षेत्र में 21,895 बच्चों का जन्म पूरी तरह से स्वास्थ्य केंद्रों में ही संपन्न हुआ था। वहीं चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से जुलाई 2026 के चार महीनों में 5,848 प्रसव दर्ज किए गए। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की इसी समान अवधि में दर्ज 5,379 प्रसवों की तुलना में 469 अधिक है, जो 8.72 प्रतिशत की सीधी वृद्धि को दर्शाता है।

यदि पिछले छह वर्षों के समग्र आंकड़ों पर नजर डालें, तो जिले ने स्वास्थ्य केंद्रों में कुल 1,33,256 सफल प्रसव दर्ज किए हैं। वर्ष 2020-21 में यह संख्या 23,252 रही, जिसके बाद 2021-22 में 21,662, 2022-23 में 22,600, 2023-24 में 21,509, 2024-25 में 22,338 तथा 2025-26 में 21,895 प्रसव अस्पताल परिसरों में कराए गए थे।

सफलता के पीछे की रणनीति और जमीनी प्रयास

मुख्यमंत्री कार्यालय ने गुरुवार को X पर लिखा कि इस उपलब्धि ने पूरे जिले में सुरक्षित प्रसव और गुणवत्तापूर्ण मातृ देखभाल को मजबूत किया है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि का श्रेय चिकित्सा ढांचे के विस्तार, गर्भावस्था की सटीक निगरानी और समाज में बढ़ती जागरूकता को दिया है।

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीकरण, निरंतर फॉलो-अप जांच, उच्च जोखिम वाले गर्भधारण की पहचान और नियमित परामर्श सत्रों ने इस सफलता में केंद्रीय भूमिका निभाई है। इस अभियान को सफल बनाने में डॉक्टरों, नर्सों, आशा कार्यकर्ताओं और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के साथ-साथ 108 एम्बुलेंस नेटवर्क की त्वरित परिवहन सेवा ने अहम योगदान दिया। विशेष रूप से चाय बागानों और दूरदराज के इलाकों में रहने वाली महिलाओं को ऐन वक्त पर अस्पताल पहुंचाने में इन जीवनरक्षक वाहनों ने निर्णायक मदद पहुंचाई।

संस्थागत देखभाल के प्रति बढ़ता भरोसा

स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया कि घर पर प्रसव पूरी तरह समाप्त होना सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली पर आम जनता के गहरे होते विश्वास का प्रमाण है। विभाग ने आगे भी शून्य घरेलू प्रसव की स्थिति बनाए रखने और प्रत्येक मां व नवजात शिशु को गुणवत्तापूर्ण जीवन सुरक्षा प्रदान करने के संकल्प को दोहराया है।

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सवाल-जवाब

डिब्रूगढ़ जिले ने हाल ही में क्या उपलब्धि हासिल की है?
डिब्रूगढ़ ने लगातार दो वित्तीय वर्षों तक शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव दर्ज करते हुए शून्य घरेलू प्रसव का रिकॉर्ड बनाया है।
अप्रैल 2025 से जुलाई 2026 के बीच जिले में कितने बच्चों का जन्म हुआ?
इस अवधि के दौरान कुल 5,848 बच्चों का जन्म हुआ और ये सभी प्रसव स्वास्थ्य केंद्रों में संपन्न हुए।
वर्ष 2025-26 के दौरान जिले में कुल कितने संस्थागत प्रसव दर्ज किए गए थे?
वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 21,895 संस्थागत प्रसव दर्ज किए गए थे।
दूरदराज के इलाकों से महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने में किसकी मुख्य भूमिका रही?
आशा कार्यकर्ताओं, जमीनी स्वास्थ्य कर्मियों और 108 एम्बुलेंस नेटवर्क ने दूरदराज व चाय बागानों की महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुंचाया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·1 घंटे पहले

108 एम्बुलेंस सेवा का समय पर पहुंचना सच में कमाल है, चाय बागानों तक गाड़ी पहुंचना आसान नहीं होता।

Ravikash Gupta@ravikash·1 घंटे पहले

डिब्रूगढ़ के अस्पतालों में शत-प्रतिशत प्रसव होना वाकई बड़ी बात है, खासकर चाय बागानों वाले इलाकों में जहां आना-जाना मुश्किल होता है। ज़मीनी स्तर पर स्वास्थ्य कर्मियों और 108 एम्बुलेंस की मेहनत रंग लाई है।

Neha Verma@neha-verma·1 घंटे पहले

रविकश जी, बिल्कुल सही कहा आपने। पिछले साल जब मैं असम के दौरे पर थी, तब डिब्रूगढ़ के एक चाय बागान में आशा दीदी से मिली थी; उनकी मेहनत देखकर ही समझ आ गया था कि ज़मीनी स्तर पर काम कितना शानदार हो रहा है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·2 घंटे पहले

असम के डिब्रूगढ़ जिले का यह रिकॉर्ड वाकई कमाल का है, जहाँ लगातार दूसरे साल सभी बच्चों का जन्म अस्पताल में ही हुआ।

Arjun Mehta@arjun-mehta·2 घंटे पहले

करण, बात तो बिल्कुल सही है। पर क्या ये पता चल पाया कि सुदूर चाय बागानों तक एम्बुलेंस और स्वास्थ्य कर्मियों ने इतनी मुस्तैदी कैसे बनाए रखी?

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