असम के गोलाघाट जिले में वन्यजीव तस्करी के खिलाफ एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पर्यावरण और वन मंत्री जयंत मल्ला बरुआ के अनुसार, मंगलवार को बोकाखात के पास एक यात्री बस से लगभग 300 जीवित दुर्लभ चन्ना बारका मछलियों की खेप पकड़ी गई। इस कथित गैरकानूनी परिवहन में शामिल 5 लोगों को मौके से पकड़कर हिरासत में ले लिया गया है। स्थानीय भाषा में 'चेंग एली' के नाम से जानी जाने वाली यह मछली अत्यधिक दुर्लभ मानी जाती है।
खुफिया सूचना के बाद बोकाखात के पास बस की तलाशी
इस पूरी कार्रवाई की नींव पुलिस से मिली एक सटीक खुफिया जानकारी पर टिकी थी। पुलिस इनपुट के आधार पर पूर्वी असम वन्यजीव प्रभाग के कर्मियों ने तुरंत जाल बिछाया और बोकाखात के पास संदिग्ध बस को रोक लिया। जब बस की सघन तलाशी ली गई, तो अधिकारियों को डिब्बों और कंटेनरों में करीब 300 जीवित चन्ना बारका मछलियां मिलीं। इन मछलियों के परिवहन से जुड़े कोई भी वैध दस्तावेज या आवश्यक अनुमति पत्र प्रस्तुत नहीं किए जा सके। इसके बाद वन अधिकारियों ने पूरी खेप को अपने कब्जे में ले लिया। वन मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि बोकाखात से मिली जानकारी पर कार्रवाई करते हुए एक सार्वजनिक बस से लगभग 300 जीवित चन्ना बारका बरामद की गईं और पांच व्यक्तियों को पकड़ा गया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग और दुर्लभता
चन्ना बारका, जिसे आमतौर पर बारका स्नेकहेड भी कहा जाता है, मुख्य रूप से ब्रह्मपुत्र बेसिन में पाई जाने वाली एक मीठे पानी की बेहद दुर्लभ प्रजाति है। अंतरराष्ट्रीय सजावटी मछली बाजार में इसकी असाधारण मांग है, जहां एक-एक नमूने की भारी कीमत वसूली जाती है। भारी दोहन और आवास संकट के चलते इस प्रजाति को आईयूसीएन रेड लिस्ट में डेटा डेफिशिएंट श्रेणी में सूचीबद्ध किया गया है। इतनी बड़ी संख्या में इन मछलियों का पकड़ा जाना यह दर्शाता है कि सजावटी मछली कारोबार के लिए इनका बड़े पैमाने पर अवैध शिकार किया जा रहा था।
जांच का दायरा और प्राकृतिक आवास में वापसी की तैयारी
वन विभाग के बोकाखात रेंज में इस संबंध में एक अपराध रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। पकड़े गए पांचों व्यक्तियों से अधिकारी गहन पूछताछ कर रहे हैं। जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश में हैं कि इन दुर्लभ मछलियों को कहां से पकड़ा गया था, इन्हें किस गंतव्य तक पहुंचाया जाना था और इस नेटवर्क का अंतरराष्ट्रीय या अंतरराज्यीय सजावटी मछली बाजार से क्या संबंध है। वन मंत्री ने बताया कि यह पता लगाने के लिए आगे की जांच चल रही है कि क्या इस अवैध व्यापार में अन्य लोग भी शामिल हैं।
फिलहाल जब्त की गई सभी 300 जीवित मछलियों को वन विभाग की सुरक्षित निगरानी में रखा गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों द्वारा इनके स्वास्थ्य की गहन जांच की जाएगी। स्वास्थ्य परीक्षण और सभी अनिवार्य कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद, सक्षम प्राधिकारी या अदालत से आवश्यक अनुमति लेकर इन मछलियों को इनके अनुकूल प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रूप से छोड़ दिया जाएगा।




















