ऊपरी असम के बाढ़ प्रभावित परिवारों को त्वरित सरकारी सहायता और उचित मुआवजा दिलाने के उद्देश्य से गुवाहाटी में एक व्यापक जनआंदोलन की तैयारी की जा रही है। शिवसागर से विधायक और राइजर दल के अध्यक्ष अखिल गोगोई ने घोषणा की है कि 23 सितंबर को राज्य की राजधानी में एक बड़ा जनसमूह एकत्र होगा। इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य उन नागरिकों की आवाज सरकार तक पहुंचाना है, जो हालिया प्राकृतिक आपदा के कारण बेघर हो गए हैं या जिनका सब कुछ नष्ट हो चुका है।
चंचल में सुबह 10 बजे से जुटेगा पीड़ितों का समूह
यह विरोध प्रदर्शन गुवाहाटी के चंचल इलाके में सुबह 10 बजे से शुरू होगा। इस सभा में ऊपरी असम के सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों शिवसागर, जोरहाट और चराइदेव से बड़ी संख्या में बाढ़ पीड़ितों और उनके समर्थकों के पहुंचने की उम्मीद है। आयोजकों ने इस सार्वजनिक कार्यक्रम के संचालन के लिए पहले ही प्रशासनिक अनुमति ले ली है ताकि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखी जा सकें।
10 लाख रुपये मुआवजे और सीबीआई जांच की मांग
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के समक्ष कई प्रमुख मांगें रखी हैं। अखिल गोगोई का आरोप है कि बाढ़ राहत वितरण में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुई हैं और सरकार द्वारा घोषित मदद अभी तक सभी जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पाई है। दल की मुख्य मांग है कि जिन परिवारों के घर और सामान पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं, उन्हें प्रति परिवार 10 लाख रुपये का वित्तीय मुआवजा दिया जाए। इसके अतिरिक्त, ऊपरी असम में आई इस भीषण बाढ़ के मूल कारणों की केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई से निष्पक्ष जांच कराई जाए।
आंदोलन और तेज करने की चेतावनी
राजनीतिक दल के सामाजिक दायित्वों पर बोलते हुए गोगोई ने कहा,
“किसी भी राजनीतिक दल का मुख्य काम जनता से सीधे जुड़े रहना है।”उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि ऊपरी असम में आई विनाशकारी तबाही के बाद प्रभावित नागरिकों के साथ खड़े रहना और उनकी हर संभव सहायता करना उनकी पार्टी की पहली प्राथमिकता है।
विधायक ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 23 सितंबर के इस जनप्रदर्शन के बाद भी प्रशासन ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया, तो राइजर दल अपने आंदोलन को और अधिक उग्र करेगा। इससे पहले उन्होंने 17 सितंबर को एक दिवसीय भूख हड़ताल की थी और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर बाढ़ पीड़ितों के लिए फौरन राहत की गुहार लगाई थी। हालांकि, उनका कहना है कि सरकारी सहायता अब भी जमीन पर बेसहारा लोगों तक पहुंचने में विफल रही है।



















