राजस्थान के अलवर जिले में कृषि क्षेत्र की तस्वीर तेजी से बदल रही है, जहां अन्नदाता अब लीक से हटकर हाईटेक खेती की तरफ कदम बढ़ा रहे हैं। इसी बदलाव की एक बेहतरीन मिसाल पेश की है अलवर के गुजूकी गांव के रहने वाले 18 साल के युवा किसान माधव ने। एक साधारण किसानी परिवार से आने वाले माधव पिछले दो वर्षों से अपने खेतों में आधुनिक शेडनेट और ड्रिप सिंचाई तकनीक का इस्तेमाल करते हुए स्ट्रॉबेरी की बंपर फसल उगा रहे हैं। अपनी कॉलेज की पढ़ाई के साथ-साथ खेती-किसानी को समय देकर उन्होंने देश के दूसरे नौजवानों के सामने एक अनूठा उदाहरण पेश किया है। माधव का साफ तौर पर यह मानना है कि यदि कृषि कार्यों को पुरानी लीक पर चलाने के बजाय एक सुनियोजित व्यवसाय की तरह आगे बढ़ाया जाए और आधुनिक तौर-तरीकों का सहारा लिया जाए, तो इससे बंपर मुनाफा कमाया जा सकता है।
माधव का ऐसा सोचना है कि आज के दौर में कृषि के जरिए इतनी कमाई आसानी से की जा सकती है, जितनी सैलरी पाने के लिए लोगों को महीनेभर नौकरी में पसीना बहाना पड़ता है। इसके लिए सिर्फ एक ही शर्त है कि खेती को नई सोच, सही रणनीति और बेहतर प्लानिंग के साथ अंजाम दिया जाए। माधव के परिवार में उनके माता-पिता बरसों से पारंपरिक फसलों की खेती करते चले आ रहे थे, लेकिन इस युवा के मन में कुछ अलग हटकर करने का आइडिया आया। इसके बाद उन्होंने स्ट्रॉबेरी की खेती से जुड़े हर छोटे-बड़े पहलू की गहरी जानकारी जुटाई और आज से करीब दो साल पहले इस पर अमल करना शुरू कर दिया। शुरुआती दौर में उन्होंने अपने खेत में मात्र एक हजार स्ट्रॉबेरी के पौधे लगाकर एक छोटा सा प्रयोग किया था। जब उन्हें अपनी पहली ही फसल में बंपर उत्पादन के साथ तगड़ा मुनाफा हाथ लगा, तो उनका हौसला सातवें आसमान पर पहुंच गया और उन्होंने इस काम को पूरी शिद्दत के साथ आगे बढ़ाने का फैसला किया।
शेडनेट और ड्रिप सिंचाई का हो रहा है इस्तेमाल
माधव पूरी तरह से वैज्ञानिक और आधुनिक तरीकों का इस्तेमाल करते हुए शेडनेट के भीतर ड्रिप सिंचाई के जरिए स्ट्रॉबेरी की फसल तैयार कर रहे हैं। उनका यह दावा है कि वे पिछले दो साल से पूरी तरह से ऑर्गेनिक यानी जैविक तरीके से ही स्ट्रॉबेरी उपजा रहे हैं। इस तैयार फल की बिक्री के लिए वे इसे सीधे अलवर की मुख्य मंडी में भेजते हैं। इसके अलावा, जब आसपास के लोगों को उनके खेत में स्ट्रॉबेरी उगने की खबर मिलती है, तो वे सीधे उनके खेत पर पहुंचकर तरोताजा फल खरीदते हैं। क्षेत्र के तमाम लोग और अन्य किसान इस अनोखी खेती की तकनीक को देखने और समझने के लिए उनके खेत पर लगातार आ रहे हैं। माधव की दिनचर्या बेहद व्यस्त रहती है, क्योंकि वे सुबह के वक्त कॉलेज जाकर अपनी पढ़ाई पूरी करते हैं और बाकी का सारा समय अपने खेतों को देते हैं। खेती के मैनेजमेंट के साथ-साथ वे स्ट्रॉबेरी की तुड़ाई करने, उसकी सही ढंग से पैकिंग करने और उसे वक्त पर मंडी तक पहुंचाने का सारा काम खुद ही संभालते हैं। अपनी इस सफलता से उत्साहित होकर अब वे अपने खेतों में स्ट्रॉबेरी के अलावा ड्रैगन फ्रूट और एवोकाडो जैसी अन्य महंगी व हाई-वैल्यू फसलों को उगाने की योजना पर भी गंभीरता से विचार कर रहे हैं।
अन्य किसानों को भी दे रहे हैं ट्रेनिंग
माधव केवल खुद मुनाफा कमाने तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे आसपास के दूसरे किसानों को भी स्ट्रॉबेरी की खेती के गुर सिखा रहे हैं और उन्हें इसका प्रशिक्षण दे रहे हैं। हालांकि, उनका अन्य किसानों को यह स्पष्ट परामर्श रहता है कि बिना पूरी जानकारी और पर्याप्त रिसर्च के कभी भी बड़े पैमाने पर पूंजी का निवेश नहीं करना चाहिए। किसी भी फसल में उतरने से पहले उसकी आधुनिक तकनीक, स्थानीय मौसम के मिजाज, बाजार की मांग और कुल लागत का पूरा हिसाब-किताब लगा लेना बेहद जरूरी होता है। माधव के पिता महेंद्र बताते हैं कि उनके बेटे की कृषि कार्यों में बचपन से ही गहरी रुचि रही है। उसने खुद ही अलग-अलग स्रोतों से जानकारियां इकट्ठा करके स्ट्रॉबेरी के पौधे रोपे और अपनी कड़ी मेहनत के दम पर एक बेहतरीन फसल तैयार कर दिखाई। बाजार में उनकी स्ट्रॉबेरी को काफी अच्छे दाम मिले, जिससे इस युवा किसान का मनोबल और भी ज्यादा मजबूत हुआ। वर्तमान समय की बात करें तो माधव ने लगभग 5 बीघा के बड़े भूभाग में स्ट्रॉबेरी की खेती फैला रखी है। माधव की यह प्रेरक पहल साबित करती है कि यदि देश के युवा आधुनिक तकनीक और सूझबूझ के साथ आगे आएं, तो खेती को केवल गुजारे का जरिया नहीं, बल्कि एक बेहद आकर्षक और मुनाफे वाला बिजनेस बनाया जा सकता है।


















